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ट्रायल सफल, फिर भी नहीं बन रहीं प्लास्टिक की सड़कें, ये है परेशानी

Tue, 03 Jul 2018 05:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 03 Jul 2018 05:22 PM IST
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Plastic road not build after trail in varanasi
- फोटो : अमर उजाला

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प्लास्टिक को गलाकर 10 सड़कों को बनाने का प्रयोग सफल रहा। इसके बावजूद सड़कों को बनाने में इसका कोई प्रयोग नहीं हो रहा है, जबकि प्लास्टिक का कचरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यदि शहर के प्लास्टिक कचरे का प्रयोग सड़क बनाने में होता तो बहुत हद तक कचरे से निजात मिल सकती है।

वाराणसी में प्रतिदिन 100 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। इस कचरे का प्रयोग हो, इसके लिए गुणवत्ता के तौर प्रयोग के लिए दिल्ली से प्लास्टिक का दाना मंगाकर दस सड़कें बनाई गईं।
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इनमें प्रमुख रूप से 80 मीटर की पिशाच मोचन की सड़क ढाई लाख रुपये खर्च करके बर्नाई गई, जबकि महमूरगंज के गोकुल नगर में 400 मीटर साढ़े तीन लाख और मंडुवाडीह में राम नगर कॉलोनी में 250 मीटर की सड़क करीब तीन लाख रुपये खर्च करके बनाई गई।
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ये सभी सड़कें ही सफल हैं। इसके बावजूद यहां अब तक कोई प्लास्टिक को गलाकर दाना बनाने की मशीन नहीं लग सकी, जिससे यहां के प्लास्टिक कचरे का न तो निदान हो सका और न ही इसके प्रयोग से आगे सड़कें बनाने की प्रक्रिया चल सकी।

इन सड़कों को बनवाने वाले नगर निगम के एई पीएन पाल ने बताया कि सभी सड़कें सफल हैं और इनके बनाने में लागत भी कम आती है। इस संबंध में नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि शहर में छोटी-बड़ी कुल 10 जगहों पर प्लास्टिक के प्रयोग से सड़कों का निर्माण किया गया है।

इसके लिए प्लास्टिक का दाना दिल्ली से मंगाना पड़ रहा है। यहां भी प्लांट लगाने के लिए नगर निगम प्रयास कर रहा है। यदि प्लांट यहां लग जाता है तो यहां की सड़कें भी प्लास्टिक का प्रयोग कर बनाई जाने लगेंगी।

ऐसे तैयार होती है प्लास्टिक की सड़क

Plastic road not build after trail in varanasi
किसी भी सड़क में प्रयोग की जाने वाली बिटुमिन की मात्रा में प्लास्टिक के कचरे को गलाकर बनाए गए दाने को मिलाया जाता है। इसका अनुपात 80 और 20 का होता है। बिटुमिन के साथ इसको गलाकर सड़क का निर्माण कराया जाता है। इससे सड़क में प्लास्टिक की मात्रा अधिक होने से उस सड़क पर पानी का दुष्प्रभाव कम होता है और सड़क खराब होने के चांस कम हो जाते हैं। ऐसे में इस तरह की सड़कों के बनाने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए। 

 इसलिए आ रही परेशानी
शहर में प्लास्टिक का कचरा तो अधिक निकल रहा है, लेकिन इस प्लास्टिक को गलाकर दाना तैयार करने का उपकरण न तो निगम के पास है और न ही लोक निर्माण विभाग के पास, ऐसे में दिल्ली से प्लास्टिक का दाना खरीदना महंगा पड़ रहा है, जबकि शहर में अगर प्लास्टिक का दाना बनाने की मशीन लगाई जाए तो यह सड़क निर्माण सस्ता पड़ेगा। साथ ही सड़क की उम्र भी अधिक होगी।

वाराणसी सरकारी कार्यालयों में पॉलिथीन और प्लास्टिक पर प्रतिबंध

Plastic road not build after trail in varanasi
प्लास्टिक पर प्रतिबंध - फोटो : अमर उजाला
पॉलिथीन के खिलाफ चल रहे प्रशासन के अभियान के तहत जिलाधिकारी ने सरकारी कार्यालयों में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके तहत सभी विभागों, कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को प्लास्टिक मुक्त करने का निर्देश दिया गया है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी नगर वीरेंद्र पांडेय ने अधिसूचना का हवाला देते हुए प्लास्टिक की थैलियों के निर्माण, आयात, भंडारण, विक्रय और ढुलाई पर प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराने को कहा है।

इसके अलावा जिले के सभी विभागों और शैक्षणिक संस्थानों को पत्र जारी कर प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन और ऐसी प्लास्टिक की वस्तु जो प्रयोग कर फेंक दी जाती हैं उसे प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसकी अवहेलना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
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