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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Pitru Paksha 2024 Shraadha performed with jewelry and medicine in Kashi to get rid of Pitra Dosha

पितृपक्ष: सोने-चांदी-तांबे की मूर्तियों, तीन तरह की औषधियों से करते हैं श्राद्ध, छह माह पहले से होती है तैयारी

Fri, 20 Sep 2024 07:29 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Fri, 20 Sep 2024 07:29 PM IST
सार

पितृपक्ष में काशी के पिशाचमोचन कुंड पर सोने, चांदी व तांबे की मूर्तियों और तीन तरह की औषधियों से श्राद्ध करते हैं। इस दौरान पितृदोष की मुक्ति के लिए 40 से 70 तरह की सामग्रियों की जरूरत पड़ती है। 

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Pitru Paksha 2024 Shraadha performed with jewelry and medicine in Kashi to get rid of Pitra Dosha
पितृपक्ष 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पितृपक्ष में पितृदोष से मुक्ति के लिए काशी में पिशाचमोचन कुंड पर विभिन्न तरह के श्राद्धकर्म कर पितरों को तृप्त किया जाता है। पितृदोष की मुक्ति के लिए 40 से 70 तरह की सामग्रियों की जरूरत पड़ती है और इसे छह महीने पहले ही जुटाना शुरू कर दिया जाता है। ये सामग्रियां विभिन्न प्रांतों से मंगाई जाती हैं। इसमें त्रिदेवों की सोने, चांदी और तांबे की मूर्तियों के अलावा तीन तरह की औषधियां, छह तरह के फूल व पत्तियां, चार तरह के पल्लव आदि होते हैं।

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पौराणिक मान्यतानुसार पिशाचमोचन कुंड पर श्राद्धकर्म होते हैं। गरुण पुराण में भी इसका वर्णन है। यहां पर श्राद्ध करने के बाद ही लोग गया (बिहार) में श्राद्ध करने जाते हैं। वैसे यहां पर पूरे साल लोग श्राद्धकर्म करवाते हैं। मगर, पितृपक्ष में श्राद्धकर्म का विशेष महत्व होता है। श्राद्ध के लिए कई सामग्रियों की जरूरत होती है। पूजन सामग्री के दुकानदार अमित ने बताया कि इन सामग्रियों को छह माह पहले से ही जुटाना पड़ता है। सबसे ज्यादा मिट्टी के वर्तन और जंगलों की लकड़ियां मंगानी पड़ती हैं। केरल, मध्यप्रदेश, कोलकाता, मुरादाबाद, भदोही, रावर्ट्सगंज आदि राज्यों व शहरों से पूजन सामग्रियां आती हैं।
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कर्मकांडी ब्राह्मण पं. कुलवंत मणि त्रिपाठी और पं. महेंद्र तिवारी ने बताया कि मुख्य रूप से चार तरह के श्राद्धकर्म होते हैं। त्रिपिंडी, नारायण बलि, पार्वण और तीर्थ श्राद्ध। त्रिपिंडी (तीन पिंडदान) में ब्रह्मा, विष्णु और महेश, नारायण बलि में (16 पिंडदान) त्रिदेवों के अलावा यम व प्रेत, पार्वण श्राद्ध में (12 पिंडदान से अधिक) भगवान विष्णु के साथ उनके पितृ और तीर्थ श्राद्ध में (16 पिंडदान) पूरे पूर्वजों की पूजा होती है।

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ये हैं सामग्रियां

त्रिपिंडी श्राद्ध में करीब 40 सामग्री की जरूरत पड़ती है। नारायण बलि में 70, पार्वण श्राद्ध में 35 से 40 और तीर्थ श्राद्ध में करीब 20 सामग्रियों की जरूरत पड़ती है। इनमें प्रमुख रूप से त्रिदेवों की मूर्तियां (ब्रह्मा की चांदी, विष्णु जी की सोने व महेश की तांबे), धातु के लोटा, नारियल, चार तरह के कपड़े, तीन तरह का झंडा, 16 पीस जनेऊ, 16 सोपाड़ी, नारा, पीला सरसो, रोरी, चंदन, घी, बुका, कपूर, लौंग, इलायची, दूध, शहद, पंचरत्न, सर्व औषधी, गुलाबजल, केवड़ा, अतर, केला, मिठाई, नींबू, मोसमी, अदरक, कूसा, पान का पत्ता, तील, चावल, जौ, जूता, छाता, अपराजिता, मदार, दौना का फूल, बेलपत्र, तुलसी, दुर्वा, लोटा, कसोरा, दीया, कलश, पत्तल आदि शामिल होते हैं।
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