'खाना नहीं है, पानी पीकर सो जाओ', मुंबई-गुजरात और पंजाब से आए यात्रियों ने बयां किया दर्द
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लॉकडाउन के बाद से गैर प्रांतों में फंसे लोगों को घर वापसी में तमाम तरह की दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। उन्हें बसों में बैठाकर लाया भी जा रहा है, जहां-तहां उतारने के बाद उनके हाल पर छोड़ दिया जा रहा है। भूख-प्यास से बेहाल लोगों की सुध लेने वाला भी कोई नहीं। संवेदनहीनता का आलम यह है कि अगर वह खाना मांगते भी हैं तो उन्हें दो टूक कहा जा रहा कि खाना अभी नहीं मिलेगा। पानी पीकर पेट भर लो। ताजा मामला जौनपुर जिले का है।
यहां सोमवार की रात लगभग छह बसों से ढाई सौ लोग सिंगरामऊ बॉर्डर पर पहुंचे। मुंबई, गुजरात, पंजाब से ट्रेन में लखनऊ तक आए इन यात्रियों को राजा हरपाल सिंह इंटर कॉलेज में बने क्वारंटीन सेंटर में रख दिया गया। उनकी निगरानी के लिए कानूनगो अनिल कुमार की ड्यूटी लगाई गई है।
यहां रहने-खाने का कोई इंतजाम नहीं है। संदीप कुमार ने बताया कि ट्रेन में एक बार खाना मिला था। इसके बाद लखनऊ पहुंचने पर दोपहर में नाश्ता कराया गया। इसके बाद से ही भूखे हैं। राकेश कुमार, सुनील, सोनू का कहना था कि रात में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से भोजन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सुबह कुछ नहीं मिलेगा। साथ ही कहा कि ज्यादा भूख है तो पानी पीकर पेट भर लो और गमछा बिछाकर सो जाओ।
आशुतोष मिश्र ने रात भर बच्चे भूख से छटपटाते रहे। सुबह पास में दूध निकाल रहे ग्रामीण ने तो उन्हें आधा लीटर दूध दिया। महाराष्ट्र से आ रहे यात्री राजेश ने बताया कि सोमवार की रात दस बजे हमें बस यहां उतार कर वापस चली गई। अब यहां से पूरे जिले के यात्री पैदल ही अपने घर जाए।
प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को यही डर है दूसरे प्रान्तों से तो हम जान बचा कर अपने जिले में पहुंच गए, कहीं घर पहुंचाने से पहले हमारे प्राण न निकल जाए। सुबह यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग शुरू की गई, मगर नाश्ते व चाय की कोई व्यवस्था नहीं थी। यात्री अपना थर्मल स्क्रीनिंग करा कर स्वयं ही गंतव्य की तरफ रवाना हो गए।