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25 रुपये किलो टमाटर व प्याज बेचना का दावा पहले ही दिन धड़ाम
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 14 Nov 2017 10:50 PM IST
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प्याज और टमाटर
- फोटो : amar ujala
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वाराणसी के पहड़िया मंडी के बाहर स्टाल लगाकर सस्ते दर पर प्याज-टमाटर बेचने की मंडी प्रशासन की पहल आधी-अधूरी तैयारी के चलते मंगलवार को पहले ही दिन औंधे मुंह गिर गई। वाहवाही बटोरने के लिए जल्दबाजी में स्टाल तो लगवा दिए गए लेकिन दोपहर से पहले ही टमाटर खत्म हो गया।
प्याज की क्वालिटी इतनी घटिया कि लोगों के लिए उसे खरीदते नहीं बन रहा था। रह-रहकर लोगों की नाराजगी जाहिर हो रही थी और मंडी प्रतिनिधियों की ओर से अपने बचाव में बार-बार यही तर्क पेश किया जा रहा था कि ‘नया प्याज ऐसा ही होता है’।
उपनिदेशक मंडी (प्रशासन) डॉ. हिमांशु शेखर त्रिपाठी ने मंगलवार से पहड़िया मंडी के द्वार पर स्टाल लगाकर 25 रुपये में प्याज और टमाटर आम लोगों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। स्टॉल लगा तो जरूर लेकिन विभागीय अधिकारियों की निगरानी के बावजूद पूरी कवायद महज खानापूर्ति साबित हुई।
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दोपहर से पहले ही टमाटर खत्म हो गया और जो प्याज उपलब्ध थी, उसकी गुणवत्ता से उपभोक्ता संतुष्ट नहीं थे। उनका कहना था कि एक तो प्याज की साइज काफी छोटी है, दूसरे सड़े प्याज की मात्रा ज्यादा है। कई लोग टमाटर न होने के चलते खाली हाथ लौटे तो कई को प्याज की घटिया क्वालिटी ने मायूस किया।
इन अव्यवस्थाओं पर लोग मंडी परिषद के अधिकारियों को कोसते नजर आए। उधर, उपनिदेशक मंडी का कहना था कि मंडी बंद होने की वजह से टमाटर की शार्टेज हुई। प्याज की गुणवत्ता ठीक न होने की शिकायत की जांच कराई जाएगी। जब तक प्याज-टमाटर के रेट सामान्य नहीं हो जाते तब तक इस व्यवस्था को चालू रखा जाएगा।
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प्याज की क्वालिटी इतनी घटिया कि लोगों के लिए उसे खरीदते नहीं बन रहा था। रह-रहकर लोगों की नाराजगी जाहिर हो रही थी और मंडी प्रतिनिधियों की ओर से अपने बचाव में बार-बार यही तर्क पेश किया जा रहा था कि ‘नया प्याज ऐसा ही होता है’।
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उपनिदेशक मंडी (प्रशासन) डॉ. हिमांशु शेखर त्रिपाठी ने मंगलवार से पहड़िया मंडी के द्वार पर स्टाल लगाकर 25 रुपये में प्याज और टमाटर आम लोगों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। स्टॉल लगा तो जरूर लेकिन विभागीय अधिकारियों की निगरानी के बावजूद पूरी कवायद महज खानापूर्ति साबित हुई।
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दोपहर से पहले ही टमाटर खत्म हो गया और जो प्याज उपलब्ध थी, उसकी गुणवत्ता से उपभोक्ता संतुष्ट नहीं थे। उनका कहना था कि एक तो प्याज की साइज काफी छोटी है, दूसरे सड़े प्याज की मात्रा ज्यादा है। कई लोग टमाटर न होने के चलते खाली हाथ लौटे तो कई को प्याज की घटिया क्वालिटी ने मायूस किया।
इन अव्यवस्थाओं पर लोग मंडी परिषद के अधिकारियों को कोसते नजर आए। उधर, उपनिदेशक मंडी का कहना था कि मंडी बंद होने की वजह से टमाटर की शार्टेज हुई। प्याज की गुणवत्ता ठीक न होने की शिकायत की जांच कराई जाएगी। जब तक प्याज-टमाटर के रेट सामान्य नहीं हो जाते तब तक इस व्यवस्था को चालू रखा जाएगा।
आखिर 25 रुपये में प्याज-टमाटर कैसे
टमाटर का स्टॉल
- फोटो : अमर उजाला
मंडी प्रशासन 25 रुपये की देर से आम लोगों को टमाटर, प्याज कैसे उपलब्ध करा रहा है, इसका गणित मंडी के आढ़ती भी नहीं समझ पा रहे हैं। उपनिदेशक मंडी का कहना है कि मंडी में प्याज और टमाटर जिस पर पहुंच रहा है, उसी दर पर उन्हें बेचा जा रहा है।
जबकि नई प्याज नासिक में 30 से 32 रुपये किलो थोक में मिल रही है। नासिक के आढ़ती पारस सेठ ने बताया कि नई प्याज 3000 से 3200 रुपये क्विंटल है। लूज क्वालिटी (कम अच्छी) की प्याज भी 2600 से 2700 रुपये में मिल रहा है।
नासिक के ही विज्जू सेठ ने बताया कि पुराना प्याज ही थोक में 2500 क्विंटल से कम में मिल रहा है। ऐसी स्थिति में थोक से भी कम रेट में प्याज और टमाटर मंडी प्रशासन आम जनता को कैसे उपलब्ध कराएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
जबकि नई प्याज नासिक में 30 से 32 रुपये किलो थोक में मिल रही है। नासिक के आढ़ती पारस सेठ ने बताया कि नई प्याज 3000 से 3200 रुपये क्विंटल है। लूज क्वालिटी (कम अच्छी) की प्याज भी 2600 से 2700 रुपये में मिल रहा है।
नासिक के ही विज्जू सेठ ने बताया कि पुराना प्याज ही थोक में 2500 क्विंटल से कम में मिल रहा है। ऐसी स्थिति में थोक से भी कम रेट में प्याज और टमाटर मंडी प्रशासन आम जनता को कैसे उपलब्ध कराएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।