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बीएचयूः बीता एक साल, नहीं पता चला किसने करवाया था छात्राओं पर लाठीचार्ज

Mon, 24 Sep 2018 12:00 PM IST
रबीश श्रीवास्तव,अमर उजाला,वाराणसी
रबीश श्रीवास्तव,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 24 Sep 2018 12:00 PM IST
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One year passed did not know who had lathicharge on BHU girl students
आंदोलित छात्राएं - फोटो : file photo
बीएचयू महिला महाविद्यालय की छात्राएं शायद ही 23 सितंबर 2017 की वह रात भूल पाए, जब उन पर लाठियां बरसाई गई थीं। आज भी उस घटना का जिक्र करने के बाद उनकी आंखें भर आती है।
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घटना के बाद जांच करने और जल्द ही कार्रवाई का भरोसा भी विश्वविद्यालय, जिला और पुलिस प्रशासन के साथ ही महिला आयोग की टीम ने दिया था। लेकिन पूरे एक साल बाद आज तक यह तय नहीं हो सका कि आखिर किसने महाविद्यालय गेट से अंदर घुसकर छात्राओं पर लाठीचार्ज किया था।
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पिछले साल छेड़खानी की इस घटना के बाद सुरक्षा को लेकर बातें भी बड़ी-बड़ी हुई लेकिन तब से लेकर अब तक आधा दर्जन से अधिक ऐसी घटनाएं हुई, जिससे इन दावों पर सवाल खड़े हुए।
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लाठीचार्ज की घटना के बाद देश ही नहीं विदेशों में इसकी निंदा हुई, न्याय को लेकर छात्र संगठनों के साथ ही सामाजिक, राजनीतिक संगठनों ने आवाज उठाई और दोषियों को चिह्नित कर कार्रवाई की मांग की लेकिन यह सब केवल कागजों पर ही चला।

महिला आयोग की टीम भी यहां आई, छात्राओं, शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों के बयान भी हुए। लेकिन अब तक यह पता ही नहीं चल सका कि महिला महाविद्यालय गेट पर लाठीचार्ज किसने किया। कोई इसके लिए विश्वविद्यालय सुरक्षा कर्मियों को को जिम्मेदार ठहराता है तो कोई पुलिस, पीएसी जवानों को। महिला महाविद्यालय की छात्राएं ही नहीं कुछ शिक्षकों को भी इस घटना में चोट आई थी।

इसमें से एक डॉ. प्रतिमा गौड़ का कहना है कि उस रात को भूल पाना मुश्किल है। जिस तरह से गेट के अंदर घुस कर छात्राओं पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें बचाने गई शिक्षकों पर भी लाठियां बरसाई गई। उससे चोट लगी वह तो ठीक हो गया लेकिन दर्द अभी भी है। प्रशासन अभी तक यह नहीं पता लगा पाया कि आखिर ऐसा किसने किया। 

ये था पूरा मामला 

One year passed did not know who had lathicharge on BHU girl students
छात्राओं का धरना-प्रदर्शन - फोटो : file photo
विश्वविद्यालय परिसर में 21 सितंबर की शाम छह बजे भारत कला भवन चौराहे पर एक छात्रा के साथ छेड़खानी हुई थी। इसके अगले दिन सुबह छह बजे से छात्राओं ने घटना के विरोध में मुख्य द्वार पर धरना देकर न्याय की गुहार लगाई।

छात्राएं कुलपति को धरना स्थल पर बुलाने की मांग कर रही थी, जिससे कि उन्हें कोई ठोस जवाब मिल सके लेकिन दो दिन तक चले धरने में कुलपति नहीं आए। 23 सितंबर की शाम विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों ने कुलपति को महिला महाविद्यालय गेट तक बुलाने की तैयारी कर ली थी, पुलिस, पीएसी, सीआरपीएफ के जवानों को भी बुलाया गया लेकिन तब भी कुलपति नहीं आए।

इसके बाद रात में करीब दस बजे कुछ छात्राएं कुलपति से मिलने उनके आवास पर पहुंची, जहां पहले उन्हें विश्वविद्यालय सुरक्षा कर्मियों की ओर से लाठी पटक कर भगाया गया। इसके बाद छात्राएं विरोध करने महाविद्यालय गेट पर पहुंची तो वहां उन पर लाठीचार्ज किया गया, जिसमें छह छात्राएं घायल हुई थी।
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