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बनारसी पंडे की भूमिका निभाना चाहते थे ओम पुरी
टीम डिजिटल, वाराणसी
Updated Sat, 07 Jan 2017 02:34 PM IST
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om puri salaman khan
- फोटो : अमर उजाला
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फिल्म अभिनेता ओम पुरी की बनारस के पंडा की भूमिका करने की हसरत पूरी नहीं हो सकी। वह इस पुरातन शहर के घाटों, गलियों की मस्ती के बीच बनारस के असल किरदार को निभाना चाहते थे। तीन महीने पहले बनारस ब्लास्ट पर आधारित फिल्म ‘2006’ की शूटिंग के दौरान उन्होंने अपनी यह इच्छा जाहिर की थी।
ओम पुरी का बनारस से पुराना रिश्ता रहा है। उनकी बहन हीरा चड्ढा एक समय आकाशवाणी वाराणसी में कार्यरत थीं। तब उनका यहां अक्सर आना-जाना होता था। उन्हीं दिनों काशी की तंग गलियों और घाटों से ओम पुरी का लगाव हो गया था।
यह बातें ओमपुरी ने फिल्म -2006 की शूुटिंग के दौरान नवंबर, 2016 में भेलूपुर के एक होटल में साझा की थीं। तब वह चार दिन तक इस शहर में थे। उनका कहना था कि बनारस के पंडे का किरदार अक्सर उनके जेहन में दस्तक देता रहता है।
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इसीलिए एक ऐसी फिल्म वह करना चाहते हैं, जिसमें बनारसी पंडे की भूमिका में काम करने का मौका मिले। वह धर्म भीरु, उदार और मददगार पंडे की भूमिका करना चाहते थे लेकिन यह इच्छा अधूरी रह गई और वह इस दुनिया को अलविदा कह गए।
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ओम पुरी का बनारस से पुराना रिश्ता रहा है। उनकी बहन हीरा चड्ढा एक समय आकाशवाणी वाराणसी में कार्यरत थीं। तब उनका यहां अक्सर आना-जाना होता था। उन्हीं दिनों काशी की तंग गलियों और घाटों से ओम पुरी का लगाव हो गया था।
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यह बातें ओमपुरी ने फिल्म -2006 की शूुटिंग के दौरान नवंबर, 2016 में भेलूपुर के एक होटल में साझा की थीं। तब वह चार दिन तक इस शहर में थे। उनका कहना था कि बनारस के पंडे का किरदार अक्सर उनके जेहन में दस्तक देता रहता है।
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इसीलिए एक ऐसी फिल्म वह करना चाहते हैं, जिसमें बनारसी पंडे की भूमिका में काम करने का मौका मिले। वह धर्म भीरु, उदार और मददगार पंडे की भूमिका करना चाहते थे लेकिन यह इच्छा अधूरी रह गई और वह इस दुनिया को अलविदा कह गए।
ओमपुरी ने प्रेमचंद के ऊर्दू उपन्यास पर बनी फिल्म में किया था अभिनय
Om Puri
- फोटो : Getty Images
बनारस में ओमपुरी में मुंशी प्रेमचंद के पहले ऊर्दू उपन्यास ‘बाजार-ए-हुस्न पर बनी फिल्म में अभिनय किया था। फिल्म की नायिका रेशमी घोष के कोठे पर पहुंचने से समाज की मुख्य धारा में जुड़ने तक की कहानी में ओमपुरी ने अहम किरदार निभाया था।
इस फिल्म की शूटिंग बनारस के चेतसिंह किला, रामेश्वर घाट, अन्नपूर्णा मिल, रामनगर किले में हुई थी। तब ओमपुरी ने इस फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में महीनों बनारस में गुजारे थे।
रंगमंच से जुड़े डॉ. रतिशंकर त्रिपाठी कहते हैं कि वह हर चरित्र को बखूबी जीने वाले वास्तविक कलाकार थे। अभिनय की उनमें जो गहराई और जो भाव था, वह कम देखने को मिलता है।
इस फिल्म की शूटिंग बनारस के चेतसिंह किला, रामेश्वर घाट, अन्नपूर्णा मिल, रामनगर किले में हुई थी। तब ओमपुरी ने इस फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में महीनों बनारस में गुजारे थे।
रंगमंच से जुड़े डॉ. रतिशंकर त्रिपाठी कहते हैं कि वह हर चरित्र को बखूबी जीने वाले वास्तविक कलाकार थे। अभिनय की उनमें जो गहराई और जो भाव था, वह कम देखने को मिलता है।
Few days bck at my place for dinner "today his no more ..sad very sad pic.twitter.com/TTczVyEseI
— Ravi Kishan (@ravikishann) January 6, 2017