{"_id":"5e91f4598ebc3e77b10751d3","slug":"old-man-injured-only-son-could-not-come-due-to-lockdown","type":"story","status":"publish","title_hn":"घायल वृद्ध की गई जान, Lock down के कारण नहीं आ सका इकलौता बेटा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घायल वृद्ध की गई जान, Lock down के कारण नहीं आ सका इकलौता बेटा
Sat, 11 Apr 2020 10:16 PM IST
स्वाधीन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Sat, 11 Apr 2020 10:16 PM IST
विज्ञापन
लॉक डाउन।
- फोटो : अमर उजाला।
सड़क हादसे में घायल वृद्ध की धनाभाव में समुचित उपचार न होने से शनिवार को मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। लॉक डाउन के कारण इकलौता बेटा मुंबई से नहीं आ सका तो नाबालिग पौत्र ने मुखाग्नि दी। मामला जौनपुर जिले के सिकरारा क्षेत्र के टेकरी गांव का है।
विज्ञापन
गांव निवासी श्रीराम यादव (70) दूध बेचते थे। गत गुरुवार को रोज की तरह सुबह करीब साढ़े छह बजे दूध बेचने गुलजारगंज बाजार जा रहे थे। जौनपुर-रायबरेली मार्ग पर तेज रफ्तार बोलेरो की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद बोलेरो चालक वाहन समेत फरार हो गया। गंभीर रुप से जख्मी वृद्ध को परिजन एंबुलेंस से जिला अस्पताल गए।
विज्ञापन
वहां एक दिन तक उपचार के बाद चिकित्सकों ने सिर में गंभीर चोट के कारण हालत गंभीर बताते हुए रेफर कर दिया। परिजन मरीज को लेकर निजी अस्पतालों में पहुंचे, मगर वहां उपचार नहीं हो सका। तंगी और गरीबी की मार झेल रहे परिजन धनाभाव में मरीज को अन्यत्र न ले जाकर घर ले आए। शनिवार की दोपहर में वृद्ध की मौत हो गई।
विज्ञापन
मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वृद्ध को चार बेटियां और एक बेटा विनय है। सभी की शादी हो चुकी है। बेटा मुंबई में प्राइवेट नौकरी करता है। लॉक डाउन के चलते घर न आ पाने पर देर शाम पौत्र प्रिंस यादव ने शव को मुखाग्नि दी। ग्रामीणों के मुताबिक परिवार आर्थिक रुप से सक्षम नहीं है।
एक बेटा लॉक डाउन के चलते प्राइवेट नौकरी करने वाला मृतक का बेटा विनय कुमार भी मुंबई से घर नहीं आ सका। लोगों में चर्चा है कि गरीबी के बावजूद भी मृतक का परिवार आयुष्मान भारत कार्ड धारक नहीं था ,जिससे कि पांच लाख तक का इलाज उन्हें मुफ्त में मिलता।अगर जिम्मेदार लोगों द्वारा इस परिवार का स्वास्थ्य कार्ड बनाया गया होता,और समय से जरूरी इलाज किया गया होता तो शायद परिवार को यह दंश न झेलना पड़ता।