संस्कृत विविः छात्रसंघ पर एनएसयूआई का कब्जा, प्रिया बनी अध्यक्ष
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शुक्रवार को छात्रसंघ चुनाव संपन्न हुआ। अध्यक्ष समेत चार प्रमुख पदों पर एनएसयूआई समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज किया। अध्यक्ष पर प्रिया चौबे की जीत हुई है।
विश्वविद्यालय इतिहास में पहली बार कोई छात्रा अध्यक्ष बनी है। पिछले कई दिनों की घमासान के बाद आज संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव के लिए वोट डाले गए। चार पदों के लिए 10 प्रत्याशी मैदान में थे। कुल 2202 वोटरों में 1638 ने अपने वोट का इस्तेमाल किया।
सुबह 09 बजे से दोपहर 2: 20 बजे तक वोटिंग चली। शाम को वोटों की गिनती शुरू हुई और देर शाम नतीजे आने शुरू हो गए। इसमें अध्यक्ष पद पर प्रिया चौबे, उपाध्यक्ष पद पर रंजीत कुमार तिवारी , महामंत्री पद पर नरेंद्र कुमार मिश्रा और पुस्तकालय मंत्री पद पर ललित कुमार को विजयी घोषित किया गया।
अध्यक्ष पद पर प्रिया चौबे ने निकटतम प्रतिद्दंदी संजय कुमार को 538 मत से हराया। उपाध्यक्ष पर रंजीत तिवारी को 723, महामंत्री पर नरेंद्र मिश्र 1092, पुस्तकालय मंत्री ललित कुमार को 645 मत मिले।
छह संकाय प्रतिनिधि निर्विरोध निर्वाचित
विश्वविद्यालय चुनाव में छह संकाय प्रतिनिधि निर्विरोध निर्वाचित हुए। चुनाव अधिकारी ने बताया कि वेद वेदांग संकाय से आशुतोष द्विवेदी, अवनीश मिश्र, साहित्य संस्कृति संकाय से ओमप्रकाश राय, राहुल उपाध्याय, तारक द्विवेदी और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान संकाय से नितिन कुमार यादव प्रतिनिधि चुने गए।
फर्जी मतदाता पकड़े गए
इससे पहले मतदान के दौरान दो छात्रा समेत दस वोटर फर्जी मिले, जिन्हें पुलिस के हवाले किया गया। मतदान स्थल पर मतदान के दौरान कई बार प्रत्याशियों के पोलिंग एजेंटों के बीच आपस में नोंकझोंक हुई। बात हाथापाई तक पहुंच गयी।
पहली बार महिला अध्यक्ष
पहली बार महिला अध्यक्ष
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के बाद अध्यक्ष चुनी गयी प्रिया यादव ने रिकॉर्ड बनाया है। विश्वविद्यालय के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई छात्रा अध्यक्ष चुनी गयी हो। गौरतलब है कि प्रिया के पिता गिरजानंद चौबे भी इसी विश्वविद्यालय में छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं।
परिसर के अंदर-बाहर रही गहमा गहमी
छात्र चुनाव को लेकर सुबह से परिसर के अंदर और बाहर का माहौल अलग दिखा। प्रवेश द्वार के बाहर समर्थकों में जमकर गहमागहमी देखने को मिली। पर्चे हवा में उड़ाए जा रहे थे। साथ ही प्रत्याशी के समर्थन में जमकर नारेबाजी कर रहे थे। मतदान से पहले चुनाव स्थल से लेकर मेन गेट तक सुरक्षा के लिहाज से बैरीकेडिंग करा दी गई थी। चुनाव के दौरान प्रत्याशी मतदाताओं से अपने लिए वोट मांगते नजर आए।
एबीवीपी का नहीं खुला खाता
बनारस में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की तुलना में संस्कृत विश्वविद्यालय में भी विद्यार्थी परिषद की बुरी हार हुई है। विद्यापीठ में तो किसी तरह महामंत्री पद पर एक पदाधिकारी जीत गया लेकिन संस्कृत विश्वविद्यालय में तो किसी पद पर खाता नहीं खुल सका। इसके पीछे संगनात्मक एकजुटता की कमी मुख्य वजह बताई जा रही है।