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Varanasi News: वजूखाने की ही नहीं वहां मौजूद फव्वारे की भी जांच हो
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अजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने बुधवार को कहा कि ज्ञानवापी में जो पुराना फव्वारा है, उसकी भी जांच हो जाए। इसी बहाने सच्चाई तो सामने आ जाएगी। दरअसल, मां शृंगार गौरी केस की वादिनी राखी सिंह ने जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर ज्ञानवापी स्थित सील वजूखाने की एएसआई से जांच कराने की मांग की है। इस पर मसाजिद कमेटी के सचिव प्रतिक्रिया दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि शृंगार गौरी मुकदमे का वादी पक्ष ज्ञानवापी के वजूखाने में जिस संरचना के बारे में शिवलिंग होने का दावा करता है, उसके संबंध में हमारे पास भी प्रमाण है। वह वर्ष 1937 के बाद बना फव्वारा है। हमने उससे पानी निकलते हुए देखा है। अभी भी उसे दुरुस्त कर दिया जाए तो उससे फव्वारे की तरह ही पानी निकलेगा। यदि वजूखाने की जांच हो तो वहां मौजूद फव्वारे की भी असलियत वैज्ञानिक तरीके से सामने लाई जाए।
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उन्होंने कहा कि शृंगार गौरी मुकदमे का वादी पक्ष ज्ञानवापी के वजूखाने में जिस संरचना के बारे में शिवलिंग होने का दावा करता है, उसके संबंध में हमारे पास भी प्रमाण है। वह वर्ष 1937 के बाद बना फव्वारा है। हमने उससे पानी निकलते हुए देखा है। अभी भी उसे दुरुस्त कर दिया जाए तो उससे फव्वारे की तरह ही पानी निकलेगा। यदि वजूखाने की जांच हो तो वहां मौजूद फव्वारे की भी असलियत वैज्ञानिक तरीके से सामने लाई जाए।
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