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जल संकटः पीना तो छोड़िये नहाने लायक भी नहीं डीरेका के आसपास का पानी
अमर उजाला ब्यूरो/वाराणसी
Updated Thu, 18 May 2017 05:43 PM IST
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प्रो. बिरेंद्र नाथ राय
- फोटो : अमर उजाला
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डीरेका के आसपास के क्षेत्र का पानी जहरीला हो गया है। तकरीबन 60 फीट गहराई पर पाए जाने वाले जल में क्रोमियम की मात्रा मानक से करीब 140 गुना ज्यादा है। ये पानी पीने लायक तो दूर, इससे नहाना धोना भी खतरनाक साबित हो सकता है। इस पानी से खेती में सिंचाई भी बेहद खतरनाक है।
क्रोमियम युक्त इस जल के उपयोग से कैंसर, आंत का कैंसर समेत किडनी फेल होने जैसी बीमारियां होने का खतरा बेहद ज्यादा है। आईआईटी बीएचयू की टीम ने इस इलाके के जल का परीक्षण करने के बाद ये निष्कर्ष निकाला है।
आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. बिरेंद्र नाथ राय ने बताया कि पानी में प्रति लीटर 0.05 मिलीग्राम क्रोमियम मात्रा स्वीकार्य है लेकिन इन नमूनों में सात मिलीग्राम क्रोमियम की मात्रा पाई गई है।
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डीरेका के पीछे डिहवा गांव, हेडगेवार नगर कॉलोनी समेत आसपास के इलाके इसकी जद में हैं। इस क्षेत्र में सब्जियों की खेती होती है। सिंचाई में इसी पानी का उपयोग किया जा रहा है। सिंचाई के कारण क्रोमियम सब्जी के जरिए लोगों के शरीर में जा रहा है।
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क्रोमियम युक्त इस जल के उपयोग से कैंसर, आंत का कैंसर समेत किडनी फेल होने जैसी बीमारियां होने का खतरा बेहद ज्यादा है। आईआईटी बीएचयू की टीम ने इस इलाके के जल का परीक्षण करने के बाद ये निष्कर्ष निकाला है।
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आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. बिरेंद्र नाथ राय ने बताया कि पानी में प्रति लीटर 0.05 मिलीग्राम क्रोमियम मात्रा स्वीकार्य है लेकिन इन नमूनों में सात मिलीग्राम क्रोमियम की मात्रा पाई गई है।
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डीरेका के पीछे डिहवा गांव, हेडगेवार नगर कॉलोनी समेत आसपास के इलाके इसकी जद में हैं। इस क्षेत्र में सब्जियों की खेती होती है। सिंचाई में इसी पानी का उपयोग किया जा रहा है। सिंचाई के कारण क्रोमियम सब्जी के जरिए लोगों के शरीर में जा रहा है।