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एनओसी न देने पर अड़े राज्य के अफसर

Tue, 19 Jul 2016 01:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 19 Jul 2016 01:58 AM IST
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 केंद्र सरकार की बहुप्रतीक्षित जल परिवहन परियोजना विभागीय पेच में उलझ गई है। भारतीय अंतरर्देशीय परिवहन प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की अब तक तमाम कोशिशाें के बाद भी वन विभाग से दोनों मालवाहक जहाजों को राजघाट से आगे रामनगर जाने की अनुमति नहीं मिल सकी है। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो वन विभाग ने कछुआ सेंक्चुअरी से जहाजों को जाने देने की अनुमति देने से साफ मना कर दिया है। इससे 4200 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर संकट के बादल छा गए हैं।
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कोलकाता से चलकर पटना में माल उतारने के बाद वीवी गिरी मालवाहक जलपोत 11 जुलाई को राजघाट स्थित खिड़किया घाट पहुंचा था। इसके पांच दिन बाद दूसरा जहाज जॉय वासुदेव भी पहुंच गया। अनुमति के फेर में दोनो जहाज राजघाट के खिड़किया घाट पर लंगर डाले हुए हैं। अनुमति न मिलने से आईडब्ल्यूएआई को रोजाना एक लाख रुपये से अधिक की क्षति सिर्फ दोनों जहाजों के ईंधन और उन पर तैनात कर्मचारियों के खर्च के तौर पर हो रही है। वहीं वीवी गिरी जलपोत के कर्मचारी गौतम अधिकारी, थरीक्षण महतो, शक्तिपदोदास, धनुर्धर सिंह ने बताया कि नाले से सटकर ही जहाज खड़ा है। यहां इतनी दुर्गंध आ रही है कि सांस लेना मुश्किल हो जा रहा है।
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