वाराणसी में एक करोड़ का गांजा बरामद: चार महिला समेत नौ गिरफ्तार, कंबल में छिपाकर ले जा रहे थे गाजियाबाद
चार क्विंटल गांजे की खेप कंबल में छिपाकर गाजियाबाद ले जा रहे थे। अंधरापुल के पास से चेतगंज और सिगरा पुलिस ने सभी को गिरफ्तार किया।
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वाराणसी के चेतगंज और सिगरा थाने की पुलिस ने मंगलवार सुबह अंधरापुल से चार क्विंटल गांजे की खेप के साथ नौ लोगों को गिरफ्तार किया। इसमें चार महिलाएं शामिल हैं। बरामद गांजा की अनुमानित कीमत एक करोड़ आंकी गई है। कैरियर के रूप में काम करने वाले आरोपी इस खेप को उड़ीसा से लेकर आए थे और गाजियाबाद में पहुंचाने वाले थे। तस्कर गिरोह के मास्टरमाइंड गाजियाबाद निवासी दलबीर की गिरफ्तारी के लिए कमिश्नरेट पुलिस ने गाजियाबाद पुलिस से संपर्क किया है।
चेतगंज इंस्पेक्टर परमहंस गुप्ता को सूचना मिली कि मादक पदार्थ की बड़ी खेप उड़ीसा से आई है और अंधरापुल स्थित एक प्राइवेट बस से गाजियाबाद भेजी जाएगी। इस पर सिगरा और चेतगंज थाने की टीम ने अंधरापुल स्थित एक शराब की दुकान के पास छापा मारकर 20 कंबल के गठ्ठर से गांजे की खेप बरामद की।
पूछताछ के दौरान चार महिला और पांच पुरुषों ने बताया कि उड़ीसा के रास्ते लाया गया और यह माल गाजियाबाद मैसूरी निवासी दलबीर को देना था। गिरफ्तार हरियाणा के पंचकूला सोढ़ी कालका निवासी बीरू, शोराम, माया, पानीपत के समालरवा भापरा निवासी भीरू और एमपी के रीवा सिरमौर निवासी शिवचरण, लुकेश कौल, सीता कौल, पूर्णिमा रावत और नीतू साकेत ने पूछताछ में बताया कि गांजे की खेप उड़ीसा के फुलवाड़ी से राजा नामक व्यक्ति ने दिया है, इस माल को गाजियाबाद के मसूरी निवासी दलबीर और पांच नंबर भट्ठा निवासी रोशन को देना था।
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि गिरोह का मास्टरमाइंड दलबीर है। एनसीआर में बैठा दलबीर उड़ीसा से गांजा गाजियाबाद मंगवाता है और फिर नोएडा व गाजियाबाद में सप्लाई कराता है। पकड़े गए सभी हरियाणा के घुमंतू जाति (कौल, बांगड़ी) के हैं, जो कैरियर के रूप में काम करते थे। यह दलवीर के संपर्क में रहते हैं, दलबीर उड़ीसा में राजा से बात कर इन्हें माल दिलवाकर चला जाता था, यह मोबाइल से दलबीर के संपर्क में बने रहते थे। इनके द्वारा यह कार्य दूसरी बार किया जा रहा था। लगभग दो माह पहले यह लोग लगभग 100 किलो माल गाजियाबाद दलबीर के यहां पहुंचाए थे।
उड़ीसा से सड़क मार्ग के जरिए पहुंचे बनारस
पकड़े गए कैरियर एजेंट के तौर पर काम करने वाले गिरोह ने पुलिस को बताया कि उड़ीसा से माल लेकर बनारस सड़क मार्ग से पहुंच थे। उड़ीसा से संभलपुर होते हुए रांची और फिर गया होते हुए बनारस पहुंचे थे। एक बार में माल पहुंचाने पर तीस हजार रुपये प्रति व्यक्ति को मिलते थे।
गर्मी के दिनों में ऊनी कपड़े से हुई पहचान
गर्मी के मौसम में ऊनी चादर और कंबल को देखते ही पुलिस को शंका हो गई थी। इसके बाद बातचीत में जब गिरोह हड़बड़ाया तो पूरा माजरा खुल गया। इंस्पेक्टर अनूप शुक्ला और चेतगंज इंस्पेक्टर परमहंस गुप्ता ने इसी आधार पर पकड़ा।