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नक्सल प्रभावित क्षेत्र को किस तरह से बदल रहे युवा, जानें

Fri, 10 Feb 2017 05:56 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला, सोनभद्र
ब्यूरो,अमर उजाला, सोनभद्र Updated Fri, 10 Feb 2017 05:56 PM IST
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Naxal-affected Sonbhadra area are changing due to youth
school - फोटो : अमर उजाला

नगवां ब्लॉक क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था बेपटरी है। प्राथमिक से लेकर इंटर तक की शिक्षा के लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को परेशान होना पड़ता है। ऐसे में सूअरसोत के युवा क्षेत्र में शिक्षा की अलख जला रहे हैं। वे ग्रामीणों के सहयोग से पंचायत भवन में कक्षा एक से 12 तक की कक्षाएं चलाकर बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं।

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45 ग्राम पंचायतों वाले नगवां ब्लॉक के पहाड़ी और जंगली इलाके बिहार की सीमा से सटे हुए हैं। अति नक्सल प्रभावित सूअरसोत, बांकी, दरेंव, देवहार, बरवारी, चरगड़ा, मड़पा, निचला मड़पा, कजियारी समेत तमाम ऐसे गांव हैं, जहां प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था बेपटरी है और उच्च शिक्षा का कोई इंतजाम नहीं है।

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गरीबी चरम पर है। दो वक्त की रोटी के लिए यहां के लोगों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में इन इलाकों के गरीब बच्चे शिक्ष्ज्ञा नहीं ग्रहण कर पाते। इन गांवों में सिर्फ सूअरसोत में एक राजकीय हाईस्कूल है। लेकिन इस पर ताला जड़ा रहता है। क्षेत्र के लोगों की मानें तो यह विद्यालय महज राष्ट्रीय पर्वों पर झंडोत्तलन के लिए ही खुलता है।
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इसमें तैनात महज एक शिक्षक कभी-कभार ही आते हैं। ऐसे में यहां के बच्चे शिक्षा के वंचित रह गए। इस अभाव को देखते हुए सूअरसोत के युवा कमलेश, श्रवण, बसंतू शर्मा, गोविंद सेवरी ने यहां शिक्षा की अलग जाने का संकल्प लिया और इसके लिए मैदान में आ गए।

उन्होंने बच्चों को इकट्ठा कर गांव में ही पेड़ के नीचे पढ़ाना शुरू किया। यह देख ग्राम प्रधान ने भी इसमें सहयोग दिया। उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के लिए पंचायत भवन देने की अनुमति दे दी। अब इसी पंचायत भवन में ये युवा शहीद भगत सिंह के नाम पर विद्यालय का संचालन कर रहे।


इतना ही नहीं यहां पढ़ाने के साथ ही इन बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार कर रहे। ग्राम प्रधान का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के पिछड़ेपन और युवाओं के उत्साह को देखते हुए पंचायत भवन में पढ़ाने की अनुमति दी है। इससे क्षेत्र में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठेगा।

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