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काशी में नौ मातृशक्ति पीठ: शारदीय नवरात्र में जानिए नौ देवियों के दर्शन की महिमा
amarujala.com, written by अनूप ओझा
Updated Thu, 21 Sep 2017 02:13 PM IST
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काशी में नौ मातृशक्ति पीठ में सुख-समृद्धि-आरोग्य की वर्षा
- फोटो : file
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आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 21 सितंबर से आरंभ हो रहे शारदीय नवरात्र में नौ मातृ शक्ति पीठों के दर्शन कर श्रद्धालु सकल मनोरथ सिद्ध कर सकते हैं। पौराणिक कालीन नौ मातृ शक्ति पीठों के स्थान आज भी सुरक्षित हैं।
दशाश्वमेध तीर्थ से लेकर राजघाट के बीच इन देवियों के दरबारों में भक्त हाजिरी लगा सकते हैं, जहां सविधि पूजन से मनसा, वाचा ,कर्मणा से जाने अनजाने में हुए पापों के शमन के साथ ही आरोग्य, सुख, समृद्धि के साथ ही कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इस मातृशक्ति पीठों की महिमा लिंग पुराण और काशी खंड में बी बताई गई है। तो आइए जानिए काशी के नौ मातृशक्ति पीठों के बारे में।
नौ मातृशक्ति पीठों में प्रतम देवी ब्राह्मी हैं। बालमुकुंद चौहट्टा में मकान नंबर डी 33/63 में ब्रह्म विद्या की प्रदाता इस देवी का धाम है। इसके बाद नम आता है मां माहेश्वरी का। ज्ञानवापी के नैऋत्य कोण में पीपल के वृक्ष से होकर बाबा विश्वनाथ की कचहरी की ओर जाने वाले गलियारे में मां माहेश्वरी विराजित हैं।
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तीसरी मातृ शक्ति का नाम है ऐंद्री। मां ऐंद्री देवी का स्थान मणिकर्णिका घाट पर तारकेश्वर मंदिर के पश्चिम और इंद्रेश्वर के दक्षिण स्थित है। इसी तरह मीरघाट के पास दाल्भ्येश्वर महादेव के समीप उत्तर भाग वाले भवन संख्या डी 16/84 में वाराही देवी का मातृशक्ति पीठ है।
इनके दर्शन से विपत्तियों का नाश हो जाता है। इसी तरह वैष्णवी देवी को नारायणी के नाम से पुराणों में उल्लिखित किया गया है। गायघाट के निकट राजमंदिर के उत्तर स्थित शीतला माता को ही नारायणी मातृ शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है। नवरात्र में इनके दर्शन-पूजन से किसी भी तरह के पातकों का शमन हो जाता है।
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दशाश्वमेध तीर्थ से लेकर राजघाट के बीच इन देवियों के दरबारों में भक्त हाजिरी लगा सकते हैं, जहां सविधि पूजन से मनसा, वाचा ,कर्मणा से जाने अनजाने में हुए पापों के शमन के साथ ही आरोग्य, सुख, समृद्धि के साथ ही कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इस मातृशक्ति पीठों की महिमा लिंग पुराण और काशी खंड में बी बताई गई है। तो आइए जानिए काशी के नौ मातृशक्ति पीठों के बारे में।
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नौ मातृशक्ति पीठों में प्रतम देवी ब्राह्मी हैं। बालमुकुंद चौहट्टा में मकान नंबर डी 33/63 में ब्रह्म विद्या की प्रदाता इस देवी का धाम है। इसके बाद नम आता है मां माहेश्वरी का। ज्ञानवापी के नैऋत्य कोण में पीपल के वृक्ष से होकर बाबा विश्वनाथ की कचहरी की ओर जाने वाले गलियारे में मां माहेश्वरी विराजित हैं।
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तीसरी मातृ शक्ति का नाम है ऐंद्री। मां ऐंद्री देवी का स्थान मणिकर्णिका घाट पर तारकेश्वर मंदिर के पश्चिम और इंद्रेश्वर के दक्षिण स्थित है। इसी तरह मीरघाट के पास दाल्भ्येश्वर महादेव के समीप उत्तर भाग वाले भवन संख्या डी 16/84 में वाराही देवी का मातृशक्ति पीठ है।
इनके दर्शन से विपत्तियों का नाश हो जाता है। इसी तरह वैष्णवी देवी को नारायणी के नाम से पुराणों में उल्लिखित किया गया है। गायघाट के निकट राजमंदिर के उत्तर स्थित शीतला माता को ही नारायणी मातृ शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है। नवरात्र में इनके दर्शन-पूजन से किसी भी तरह के पातकों का शमन हो जाता है।
पद्मपुराण और ब्रह्मपुराण में भी इनका उल्लेख
इसी क्रम में मां कौमारी देवी का नाम है। कौमारी देवी महादेव(बाबा विश्वनाथ) पश्चिम स्कंदेश्वर के समीप लिंग पुराण में दर्शाया गया है। अब वहां न तो स्कंदेश्वर का स्थान स्पष्ट है न तो मां कौमारी का। इसी तरह चामुंडा माता का स्थान भदैनी में महामुंडा के नाम से जाना जाता है।
लोलार्क मंदिर के समीप आर्क विनायक मंदिर में महामुंडा विराजित हैं। इनके बाद आठवीं मातृ शक्ति का नाम चचिका के रूप में वर्णित है। मां चचिका का स्थान बालाजी घाट के पास मंगलागौरी के उत्तर ब्रह्मचारिणी मंदिर जाने वाले रास्ते में मकान नंबर 23/72 में स्थित है।
इसी तरह नौवीं मातृशक्ति का नाम है विकटा। पंचमुद्रा मातृका के रूप में इनका वर्णन मिलता है। पद्मपुराण में इन्हें संकटा देवी के नाम से विभूषित किया गया है। ब्रह्मपुराण में भी इनका उल्लेख है।
पंचमुंडे महापीठे वीरेश्वर समीपत:/विकटा व्यामहादेवि पूजनीयाहितेषभि:। मां संकटा के आठ नामों का भी वर्णन किया गया है। इसमें संकटा, विजया, कामदा, दुखहरिणी, शर्वाणी, कात्यायिनी,भीमायना, सर्वरोगहरा नाम शामिल है।
लोलार्क मंदिर के समीप आर्क विनायक मंदिर में महामुंडा विराजित हैं। इनके बाद आठवीं मातृ शक्ति का नाम चचिका के रूप में वर्णित है। मां चचिका का स्थान बालाजी घाट के पास मंगलागौरी के उत्तर ब्रह्मचारिणी मंदिर जाने वाले रास्ते में मकान नंबर 23/72 में स्थित है।
इसी तरह नौवीं मातृशक्ति का नाम है विकटा। पंचमुद्रा मातृका के रूप में इनका वर्णन मिलता है। पद्मपुराण में इन्हें संकटा देवी के नाम से विभूषित किया गया है। ब्रह्मपुराण में भी इनका उल्लेख है।
पंचमुंडे महापीठे वीरेश्वर समीपत:/विकटा व्यामहादेवि पूजनीयाहितेषभि:। मां संकटा के आठ नामों का भी वर्णन किया गया है। इसमें संकटा, विजया, कामदा, दुखहरिणी, शर्वाणी, कात्यायिनी,भीमायना, सर्वरोगहरा नाम शामिल है।