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Varanasi News: बारिश के बीच सजा नक्कटैया मेला, दिखे राफेल, सुखोई और तेजस
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चेतगंज की रामलीला में शूर्पणखा के नक्कटैया प्रसंग का मंचन करते पात्र। अमर उजाला
वाराणसी। काशी के लक्खा मेलों में शुमार चेतगंज की ऐतिहासिक नक्कटैया लीला की परंपरा बृहस्पतिवार को निभाई गई। इंद्रदेव ने मेले में खलल डालने की कोशिश की, लेकिन रिमझिम बारिश के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। कोई रेनकोट पहनकर तो कोई छाता लगाकर मेले का आनंद लेता नजर आया, जबकि कई लोग बारिश में भीगते हुए लीला देखने पहुंचे। आसपास के जिलों से आए 80 से अधिक लॉग विमानों का आकर्षण देखते ही बना। इनके जरिए काशी में हुए एयर शो की झलक एक बार फिर देखने को मिली। राफेल, सुखोई और तेजस जैसे लड़ाकू विमानों के मॉडल लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।
मोबाइल फोन के दुष्प्रभावों पर आधारित मॉडल भी लॉग विमानों का हिस्सा रहे। वहीं, करतब दिखाते मां काली के स्वरूप ने भी लोगों को चकित किया। हालांकि, बारिश के चलते दूसरे शहरों से आने वाले लोगों की संख्या प्रभावित रही। अर्नब तूफान के प्रभाव के चलते बृहस्पतिवार सुबह से ही बूंदाबांदी का सिलसिला जारी रहा। इसके बावजूद श्री चेतगंज रामलीला समिति की ओर से 140वें नक्कटैया मेले की तैयारियां दिनभर चलती रहीं। समिति को उम्मीद थी कि रात तक मौसम साफ हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बावजूद परंपरा का निर्वहन करते हुए रात नौ बजे के बाद चेतगंज चौराहे के पास स्थित हनुमान मंदिर के समीप नक्कटैया लीला का आयोजन किया गया। हल्की बारिश के बीच देर रात जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मेले का शुभारंभ किया। इसके बाद मलदहिया चौराहे से लॉग विमानों के निकलने का सिलसिला शुरू हो गया।
मेले में जगह-जगह ठेले-खोमचे, खिलौनों और चटपटे व्यंजनों की दुकानें सजी थीं। हर साल की तरह मेले के पूरे क्षेत्र को रंग-बिरंगी विद्युत झालरों से सजाया गया था। हालांकि, बारिश के कारण रौनक कुछ फीकी रही। रात ढलने के साथ ही आकर्षक लॉग विमानों के निकलने का सिलसिला तेज हुआ तो मेले की चहल-पहल भी बढ़ने लगी। लोग छाता लगाकर और रेनकोट पहनकर मेले का लुत्फ उठाते नजर आए। डीजे पर धार्मिक गीत बज रहे थे। एयर शो में दिखे लड़ाकू विमानों के मॉडल सामने आते ही लोगों की निगाहें उन पर टिक गईं।
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कई जिलों से आए लोग
प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही समेत आसपास के जिलों से आए लॉग विमानों का काफिला लाव-लश्कर के साथ लहराबीर चौराहे पर पहुंचा तो चहल-पहल और बढ़ गई। लॉग विमान कबीरचौरा, सेनपुरा, चौसट्ठी और पानदरीबा होते हुए चेतगंज स्थित लीला स्थल पर पहुंचे, जहां देर रात कार्यक्रम का समापन हुआ। समिति के अध्यक्ष अजय गुप्ता (बच्चू) और वरिष्ठ उपाध्यक्ष महंत महेंद्र गिरि महाराज ने बताया कि मेले के क्षेत्र की सड़कों और गलियों की मरम्मत प्रशासन की ओर से पूरी तरह नहीं कराई गई थी। इसके चलते लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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मोबाइल फोन के दुष्प्रभावों पर आधारित मॉडल भी लॉग विमानों का हिस्सा रहे। वहीं, करतब दिखाते मां काली के स्वरूप ने भी लोगों को चकित किया। हालांकि, बारिश के चलते दूसरे शहरों से आने वाले लोगों की संख्या प्रभावित रही। अर्नब तूफान के प्रभाव के चलते बृहस्पतिवार सुबह से ही बूंदाबांदी का सिलसिला जारी रहा। इसके बावजूद श्री चेतगंज रामलीला समिति की ओर से 140वें नक्कटैया मेले की तैयारियां दिनभर चलती रहीं। समिति को उम्मीद थी कि रात तक मौसम साफ हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बावजूद परंपरा का निर्वहन करते हुए रात नौ बजे के बाद चेतगंज चौराहे के पास स्थित हनुमान मंदिर के समीप नक्कटैया लीला का आयोजन किया गया। हल्की बारिश के बीच देर रात जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मेले का शुभारंभ किया। इसके बाद मलदहिया चौराहे से लॉग विमानों के निकलने का सिलसिला शुरू हो गया।
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मेले में जगह-जगह ठेले-खोमचे, खिलौनों और चटपटे व्यंजनों की दुकानें सजी थीं। हर साल की तरह मेले के पूरे क्षेत्र को रंग-बिरंगी विद्युत झालरों से सजाया गया था। हालांकि, बारिश के कारण रौनक कुछ फीकी रही। रात ढलने के साथ ही आकर्षक लॉग विमानों के निकलने का सिलसिला तेज हुआ तो मेले की चहल-पहल भी बढ़ने लगी। लोग छाता लगाकर और रेनकोट पहनकर मेले का लुत्फ उठाते नजर आए। डीजे पर धार्मिक गीत बज रहे थे। एयर शो में दिखे लड़ाकू विमानों के मॉडल सामने आते ही लोगों की निगाहें उन पर टिक गईं।
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कई जिलों से आए लोग
प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही समेत आसपास के जिलों से आए लॉग विमानों का काफिला लाव-लश्कर के साथ लहराबीर चौराहे पर पहुंचा तो चहल-पहल और बढ़ गई। लॉग विमान कबीरचौरा, सेनपुरा, चौसट्ठी और पानदरीबा होते हुए चेतगंज स्थित लीला स्थल पर पहुंचे, जहां देर रात कार्यक्रम का समापन हुआ। समिति के अध्यक्ष अजय गुप्ता (बच्चू) और वरिष्ठ उपाध्यक्ष महंत महेंद्र गिरि महाराज ने बताया कि मेले के क्षेत्र की सड़कों और गलियों की मरम्मत प्रशासन की ओर से पूरी तरह नहीं कराई गई थी। इसके चलते लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।