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पुराण बताता है असि नदी, नगर निगम नाला

Wed, 27 Apr 2016 02:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 27 Apr 2016 02:11 AM IST
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Mythology tells sword river, municipal sewer
अस्सी का वह क्षेत्र जहां पहले कभी असि नदी बहती थी। वर्तमान में इसे कूड़े से पाट दिया गया है तो कुछ पर लोगों का अवैध कब्जा है।
वाराणसीति विख्यातां तन्मान निगदामि व:, दक्षिणोत्तरयोर्नघोरवरणासिश्च पूर्वतजाऋवि, पश्चिमेअत्रापि पाशपाणिर्गणेश्वर:।।  (पद्म पुराण)
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प्राचीन काल से विख्यात वाराणसी नगरी के नाम को महिमामंडित करने वाली असि नदी के बारे में यह श्लोक पद्मपुराण में वर्णित है। पद्मपुराण के काशी महात्म्य में 175वें श्लोक में इसकी व्याख्या की गई है। इसका अर्थ है कि वाराणसी के उत्तर में वरुणा और दक्षिण में असि नदी बहती है। पूरब में जाह्नवी (गंगा) और पश्चिम में पाशपाणि गणेश स्थित हैं। पुराणों में तो असि बहती है लेकिन नगर निगम के राजस्व रिकार्ड में नाला के रूप में दर्ज करा दी गई है। जल निगम, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, वीडीए समेत कई सरकारी विभागों ने मिलकर उसका अस्तित्व दांव पर लगा दिया है। कहा जा रहा है कि जब तक असि की पावन धारा का समाधान नहीं निकलेगा, तब तक काशी की पेयजल, सीवर जैसी गंभीर समस्याओं का हल नहीं निकल सकेगा।


असि नदी को 35 वर्षों से लगातार पाटा जा रहा है। उसकी तलहटी कब्जा की जा रही है। नगर निगम ने तो असि-गंगा संगम को कभी शहर का डंपिंग ग्राउंड बना दिया था। पूरे शहर का कूड़ा डंपरों, ट्रालियों में भरकर असि संगम में ही पाटा गया। अस्सी मुहल्ले के लोग बताते हैं कि पहले नगवा जाने का रास्ता नहीं था। अस्सी मुहल्ले से नदी बहकर गंगा में मिलती थी। उसे कूड़ा-करकट से पाट दिया गया। नदी की धारा रोक दी गई। जहां अस्सी घाट तिराहे के पास नदी के चैनल को बंद किया गया, वहां अब भी तलहटी में कूड़ा गिराया जा रहा है। गुपचुप तरीके से असि नदी की बची हुई तलहटी अस्सी मुहल्ले में रोज पाटी जा रही है। इतना ही नहीं नदी पाटने वाले सरकारी विभागों ने हद कर दी है। जहां से नदी बहती हुई गंगा में मिलती थी, वहां कूड़ा भरने, सड़क, पार्किंग, घाट, सीढ़ियां बनाने के बाद उल्टा नाला बहा दिया गया है। नदी दक्षिण से बहकर उत्तर दिशा में संगम में आती थी लेकिन गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने अब नाला उत्तर से दक्षिण की ओर असि नदी की उसी धारा में बहा दिया है।
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तीर्थपुरोहित बलराम मिश्र कहते हैं कि असि वाराणसी की आत्मा है, इसके साथ बड़ा धोखा हो रहा है। इसे रोका नहीं गया तो काशी का अस्तित्व बचाना मुश्किल हो जाएगा। प्रोजेक्टीस संस्था के निदेशक इं. जगन्नाथ ओझा कहते हैं कि बचपन में वह अपने दोस्तों के साथ जब अस्सी मुहल्ले के स्कूल में पढ़ने जाते थे, तब गहरे संगम की ओर झांकने में डर लगता था लेकिन उसे नगर निगम ने कूड़े, कचरे से पटवा कर मिटा दिया। असि संगम के इतिहास को मिटाने वाली इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए और संगम के साथ ही नदी के बंद चैनलों को खोला जाना चाहिए।
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