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जानलेवा ‘अंजान’ बीमारी की दस्तक
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 14 Jun 2016 01:54 AM IST
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काशी में जानलेवा ‘अंजान’ बीमारी ने दस्तक दे दी है। बीते 14 महीने में इस बीमारी की चपेट में आकर चार लोगों की मौतें हो चुकी हैं। आईएमएस बीएचयू के पैथोलॉजी विभाग के प्रो. विजय तिलक का दावा है कि विश्व में पहली बार इस जानलेवा बीमारी का पता चला है। उन्होंने इस बीमारी को ‘इडियोपैथिक फैटल पैनसाइटोपोनिया’ नाम दिया है।
प्रो. तिलक का कहना है कि इस बीमारी के कारणों का अभी कुछ पता नहीं चल सका है। इसमें मरीज को थकावट, इंफेक्शन की शिकायत होने के साथ लगातार उसका प्लेटलेट्स काउंट गिरता चला जाता है। शरीर में तीन रक्त कोशिकाएं होती हैं, लाल रक्त कोशिका, सफेद रक्त कोशिका और तीसरा प्लेटलेट्स। लाल रक्त कोशिकाओं में जब ऑक्सीजन की कमी होने लगती है जब थकावट, एनीमिया जैसी शिकायत होती है। सफेद रक्त कोशिकाएं खास तौर से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। जब इसमें कोई दिक्कत आती है तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। जबकि, प्लेटलेट्स काउंट गिरने पर ब्लीडिंग होने लगती है। इस बीमारी में ये तीनों ही शिकायतें देखने को मिलीं।
प्रो. तिलक ने बताया कि 14 महीने में 140 पैनसाइटोपीनिया के मरीजों में से चार मरीज इस अवस्था से ग्रस्त थे और चारों मरीजों की मौत 24 से तीस दिन के अंदर हो गई। प्रो. तिलक के निर्देशन में डॉ. हेमा गोयल ने इस पर शोध किया और जून 2016 के जनरल ऑफ क्लीनिकल एंड डायग्नोस्टिक रिसर्च में ये रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। प्रो. तिलक का कहना है कि इस बीमारी के बारे में और शोध की जरूरत है ताकि उन कारणों का पता चल सके जिसकी वजह से यह बीमारी हो रही है और उसका समुचित निदान तलाशा जा सके।
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प्रो. तिलक का कहना है कि इस बीमारी के कारणों का अभी कुछ पता नहीं चल सका है। इसमें मरीज को थकावट, इंफेक्शन की शिकायत होने के साथ लगातार उसका प्लेटलेट्स काउंट गिरता चला जाता है। शरीर में तीन रक्त कोशिकाएं होती हैं, लाल रक्त कोशिका, सफेद रक्त कोशिका और तीसरा प्लेटलेट्स। लाल रक्त कोशिकाओं में जब ऑक्सीजन की कमी होने लगती है जब थकावट, एनीमिया जैसी शिकायत होती है। सफेद रक्त कोशिकाएं खास तौर से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। जब इसमें कोई दिक्कत आती है तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। जबकि, प्लेटलेट्स काउंट गिरने पर ब्लीडिंग होने लगती है। इस बीमारी में ये तीनों ही शिकायतें देखने को मिलीं।
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प्रो. तिलक ने बताया कि 14 महीने में 140 पैनसाइटोपीनिया के मरीजों में से चार मरीज इस अवस्था से ग्रस्त थे और चारों मरीजों की मौत 24 से तीस दिन के अंदर हो गई। प्रो. तिलक के निर्देशन में डॉ. हेमा गोयल ने इस पर शोध किया और जून 2016 के जनरल ऑफ क्लीनिकल एंड डायग्नोस्टिक रिसर्च में ये रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। प्रो. तिलक का कहना है कि इस बीमारी के बारे में और शोध की जरूरत है ताकि उन कारणों का पता चल सके जिसकी वजह से यह बीमारी हो रही है और उसका समुचित निदान तलाशा जा सके।
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