नौ को कुख्यात मुन्ना का हुआ था अंत, दस को विकास का कर दिया विनाश
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आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी विकास दुबे की शुक्रवार की सुबह एनकाउंटर में मौत हो गई। वह पांच लाख का इनामी अपराधी था। पुलिसकर्मियों की नृशंस हत्या के बाद पूरे प्रदेश में कुख्यात हो गया था।
संयोग ही है कि विकास की मौत से ठीक दो साल पहले नौ जुलाई की ही तारीख को पूर्वांचल के माफिया मुन्ना बजरंगी का भी अंत हुआ था। साढ़े सात लाख के इनामी मुन्ना की बागपत जेल में हत्या कर दी गई थी।
जिले के सुरेरी थाना क्षेत्र के पुरेदयाल गांव निवासी प्रेमप्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी लंबे समय तक दहशत का पर्याय रहा। हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, रंगदारी मांगने जैसे गंभीर आरोपों में उसके विरुद्ध दर्जनों मामले दर्ज थे।
वर्षों तक फरार रहे मुन्ना बजरंगी को मोस्ट वांटेड की श्रेणी में शामिल करते हुए सरकार ने साढ़े सात लाख का इनाम घोषित किया था। मुंबई के मलाड में दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़े मुन्ना बजरंगी को एक मामले में पेशी के लिए बागपत जेल लाया गया था।
नौ जुलाई 2018 को मुन्ना की जेल में आपसी गुटबाजी के चलतेे पश्चिम यूपी के बदमाश सुनील राठी ने हत्या कर दी थी। कुख्यात बजरंगी के अंत के ठीक दो साल बाद 10 जुलाई की सुबह ही पुलिस ने पांच लाख के इनामी विकास दुबे को भी मार गिराया।