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...तो मौत मुन्ना बजरंगी को वाराणसी से खींच ले गई बागपत, जानिए क्या है मामला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 10 Jul 2018 10:18 AM IST
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प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी
- फोटो : file photo
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मुन्ना बजरंगी की मौत ही उसे वाराणसी से बागपत ले गई। दरअसल, सोमवार को बनारस में एडीजे चतुर्थ मोहम्मद गुलाम उल मदार की अदालत में 1995 के कैंट क्षेत्र के चर्चित छोटे सिंह-बड़े सिंह हत्याकांड के मामले में बजरंगी को पेश होना था।
मगर, बजरंगी को यहां पेश न कराकर उसे बागपत में न्यायालय में विचाराधीन मामले में पेश कराने के लिए ले जाया गया। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 17 जुलाई की तिथि नियत कर दी है।
लगभग 23 साल पुराने मामले के प्रति उपेक्षा और नए मामले के प्रति पुलिस की गंभीरता पर कचहरी में अधिवक्ताओं के बीच तरह-तरह की चर्चा होती रही। एडीजे चतुर्थ की अदालत में मई में बजरंगी के अधिवक्ताओं ने उसकी ओर से आवेदन देकर जान की सुरक्षा की गुहार लगाई थी।
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कहा गया था कि वह झांसी जेल में निरुद्ध है और उसकी हत्या की साजिश रची गई है। नौ मार्च को एसटीएफ के दो लोग झांसी जेल में आए। इस दौरान जेल में अन्य कैदियों के साथ साजिश रच कर बजरंगी के खाने में जहर मिलाने या फिर अन्य तरीके से हत्या करने की बात तय की गई।
एसटीएफ के दोनों लोगों ने बंदी कमलेश से बजरंगी की हत्या की बात तय की। इसके बाद एक मई को एएसपी झांसी जेल में एक डॉक्टर को लेकर आए और जबरन बजरंगी के स्वस्थ होने का सर्टिफिकेट बनवाए।
बजरंगी के अधिवक्ताओं का कहना था कि एसटीएफ के लोगों और एएसपी झांसी का आना-जाना जेल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद है। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए कारागार प्रशासन के महानिरीक्षक को पत्र लिखा था। पत्र पर कार्रवाई से पहले ही बजरंगी की हत्या कर दी गई।
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मगर, बजरंगी को यहां पेश न कराकर उसे बागपत में न्यायालय में विचाराधीन मामले में पेश कराने के लिए ले जाया गया। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 17 जुलाई की तिथि नियत कर दी है।
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लगभग 23 साल पुराने मामले के प्रति उपेक्षा और नए मामले के प्रति पुलिस की गंभीरता पर कचहरी में अधिवक्ताओं के बीच तरह-तरह की चर्चा होती रही। एडीजे चतुर्थ की अदालत में मई में बजरंगी के अधिवक्ताओं ने उसकी ओर से आवेदन देकर जान की सुरक्षा की गुहार लगाई थी।
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कहा गया था कि वह झांसी जेल में निरुद्ध है और उसकी हत्या की साजिश रची गई है। नौ मार्च को एसटीएफ के दो लोग झांसी जेल में आए। इस दौरान जेल में अन्य कैदियों के साथ साजिश रच कर बजरंगी के खाने में जहर मिलाने या फिर अन्य तरीके से हत्या करने की बात तय की गई।
एसटीएफ के दोनों लोगों ने बंदी कमलेश से बजरंगी की हत्या की बात तय की। इसके बाद एक मई को एएसपी झांसी जेल में एक डॉक्टर को लेकर आए और जबरन बजरंगी के स्वस्थ होने का सर्टिफिकेट बनवाए।
बजरंगी के अधिवक्ताओं का कहना था कि एसटीएफ के लोगों और एएसपी झांसी का आना-जाना जेल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद है। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए कारागार प्रशासन के महानिरीक्षक को पत्र लिखा था। पत्र पर कार्रवाई से पहले ही बजरंगी की हत्या कर दी गई।
डिप्टी जेलर की डांट से नाराज होकर कराई थी हत्या
मुन्ना बजरंगी
- फोटो : File Photo
वाराणसी जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी ने बजरंगी को अन्य बंदियों के सामने सार्वजनिक तौर पर डांट दिया था तो 2013 में उसने उनकी हत्या करा दी थी। यह खुलासा धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड के आरोपी चंदन सिंह ने 2017 में एसटीएफ के सामने किया था।
23 नवंबर, 2013 को डिप्टी जेलर भोजूबीर स्थित जिम रोजाना की तरह गए तो बजरंगी के गुर्गों ने उनकी हत्या कर दी। डिप्टी जेलर की हत्या में पुलिस ने मऊ निवासी बदमाश रमेश सिंह काका की भी अहम भूमिका बताई गई थी।
उधर, मुन्ना बजरंगी की हत्या की सूचना मिलने पर सोमवार को बनारस के अनिल राय के परिवार के लोगों को सुकून मिला। 1997 में नरिया में सुनील राय और 2002 में उनके बड़े भाई अनिल राय की मलदहिया चौराहा के पास बजरंगी और उसके गुर्गों ने हत्या कर दी थी।
अनिल राय के बेटे धूपचंडी मुहल्ला निवासी प्रशांत राय ने पत्रकारों से कहा कि जिस तरह से मेरे पापा और चाचा की हत्या के बाद हम लोग रोए और पूरा परिवार बिखर सा गया।
हमारे जैसे ही आज बजरंगी का परिवार बिलख रहा है। पाप का घड़ा भरता है और आज भर गया। प्रशांत ने कहा कि वह हत्या जैसी आपराधिक घटनाओं के समर्थक नहीं हैं लेकिन बजरंगी जैसे पापियों का अंत ऐसे ही होता है।
23 नवंबर, 2013 को डिप्टी जेलर भोजूबीर स्थित जिम रोजाना की तरह गए तो बजरंगी के गुर्गों ने उनकी हत्या कर दी। डिप्टी जेलर की हत्या में पुलिस ने मऊ निवासी बदमाश रमेश सिंह काका की भी अहम भूमिका बताई गई थी।
उधर, मुन्ना बजरंगी की हत्या की सूचना मिलने पर सोमवार को बनारस के अनिल राय के परिवार के लोगों को सुकून मिला। 1997 में नरिया में सुनील राय और 2002 में उनके बड़े भाई अनिल राय की मलदहिया चौराहा के पास बजरंगी और उसके गुर्गों ने हत्या कर दी थी।
अनिल राय के बेटे धूपचंडी मुहल्ला निवासी प्रशांत राय ने पत्रकारों से कहा कि जिस तरह से मेरे पापा और चाचा की हत्या के बाद हम लोग रोए और पूरा परिवार बिखर सा गया।
हमारे जैसे ही आज बजरंगी का परिवार बिलख रहा है। पाप का घड़ा भरता है और आज भर गया। प्रशांत ने कहा कि वह हत्या जैसी आपराधिक घटनाओं के समर्थक नहीं हैं लेकिन बजरंगी जैसे पापियों का अंत ऐसे ही होता है।