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बजट 2018: पूर्वांचल के लिए विशेष पैकेज का एलान न होने से MSME सेक्टर मायूस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 02 Feb 2018 10:22 AM IST
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आईआईए के ‘बजट लाइव’ में शामिल हुए आयकर-बैंक अफसर, निर्यातक, उद्यमी, सीए
- फोटो : अमर उजाला
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उन्होंने बजट को विकासोन्मुखी तो बताया लेकिन पूर्वांचल में औद्योगिक विकास के लिए विशेष पैकेज का एलान न होने पर मायूसी जाहिर की। कहा कि एमएसएमई सेक्टर से कहीं अधिक यह बजट कारपोरेट सेक्टर को फायदा पहुंचाने वाला है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए सरकार ने कुछ प्रावधान तो किए हैं लेकिन पूर्वांचल जैसी पृष्ठभूमि में आधारभूत संसाधनों के साथ औद्योगिक विकास को गति देने के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की जरूरत थी, जो पूरी नहीं हुई।
ग्रामीण क्षेत्र और कृषि के विकास के साथ आम जन के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए बजट में किए गए प्रावधानों की उद्यमियों ने सराहना की।
मौका था, इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन (आईआईए) के ‘बजट लाइव’ का। वित्त मंत्री अरुणा जेटली द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे बजट का सीधा प्रसारण देखने के लिए छावनी क्षेत्र स्थित एक होटल में बड़ी स्क्रीन लगाई गई थी।
उद्यमियों, कारोबारियों के साथ ही आयकर और बैंक अफसर, निर्यातक और सीए आदि जुटे थे। बजट लाइव के दौरान कई बार ऐसे मौके आए जब तालियां गूंजीं तो कई बार उद्यमियों, कारोबारियों की माथे पर चिंता की लकीरें भी गहराईं।
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एमएसएमई सेक्टर के उद्यमियों ने देश के परिप्रेक्ष्य में बजट को संतुलित बताया लेकिन औद्योगिक विकास, खासकर पूर्वांचल के लिहाज से कुछ खास न होने की बात भी कही। आयकर के स्लैब में कोई बदलाव न होने की मायूसी भी साफ झलकी।
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ग्रामीण क्षेत्र और कृषि के विकास के साथ आम जन के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए बजट में किए गए प्रावधानों की उद्यमियों ने सराहना की।
मौका था, इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन (आईआईए) के ‘बजट लाइव’ का। वित्त मंत्री अरुणा जेटली द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे बजट का सीधा प्रसारण देखने के लिए छावनी क्षेत्र स्थित एक होटल में बड़ी स्क्रीन लगाई गई थी।
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उद्यमियों, कारोबारियों के साथ ही आयकर और बैंक अफसर, निर्यातक और सीए आदि जुटे थे। बजट लाइव के दौरान कई बार ऐसे मौके आए जब तालियां गूंजीं तो कई बार उद्यमियों, कारोबारियों की माथे पर चिंता की लकीरें भी गहराईं।
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एमएसएमई सेक्टर के उद्यमियों ने देश के परिप्रेक्ष्य में बजट को संतुलित बताया लेकिन औद्योगिक विकास, खासकर पूर्वांचल के लिहाज से कुछ खास न होने की बात भी कही। आयकर के स्लैब में कोई बदलाव न होने की मायूसी भी साफ झलकी।
बजट निराशाजनक, कारपोरेट घरानों का रखा गया ध्यान
कैंटोमेंट स्थित होटल व बनारस क्लब में जुटे उद्यमी और सीए
- फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार के बजट आने से उत्साहित उद्यमी, व्यापारी और सीए ने सुबह से ही टकटकी लगाई थी। इसके लिए रामनगर औद्योगिक एसोसिएशन की ओर से कैंटोमेट स्थित एक होटल और बनारस क्लब में वाराणसी ब्रांच ऑफ सेंट्रल इंडिया रीजनल कौंसिल (सीआईआरसी) और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंटस ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की ओर से बजट पर मंथन आयोजित हुआ।
बजट में अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े योजनाओं और घोषणाओं पर उद्यमी और सीए ध्यान लगाए थे। लेकिन जब बजट की घोषणा के बाद के बाद व्यापारियों और उद्यमियों ने निराशा जताई है।
उद्यमियों ने कहा कि मध्यम और छोटे उद्यमियों के लिए काफी निराशाजनक बजट करार दिया। बड़े पूंजीपतियों और कारपोरेट जगत को इससे लाभ होगा मगर छोटे उद्यमी बर्बाद हो जाएंगे। किसानों पर फोकस किया गया। स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई गई, यह अच्छी पहल है लेकिन सरकार ने बजट में उद्यमियों का ध्यान नहीं रखा।
बजट में अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े योजनाओं और घोषणाओं पर उद्यमी और सीए ध्यान लगाए थे। लेकिन जब बजट की घोषणा के बाद के बाद व्यापारियों और उद्यमियों ने निराशा जताई है।
उद्यमियों ने कहा कि मध्यम और छोटे उद्यमियों के लिए काफी निराशाजनक बजट करार दिया। बड़े पूंजीपतियों और कारपोरेट जगत को इससे लाभ होगा मगर छोटे उद्यमी बर्बाद हो जाएंगे। किसानों पर फोकस किया गया। स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई गई, यह अच्छी पहल है लेकिन सरकार ने बजट में उद्यमियों का ध्यान नहीं रखा।
बजट पर महिलाओं की प्रतिक्रिया
बजट लाइव
- फोटो : अमर उजाला
आम बजट में घोषणाएं तो बहुत हुई लेकिन जानकारों की मानें तो एक बार फिर से गृहणियों की रसोई का बजट बिगड़ेगा। पेट्रोल व डीजल पर टैक्स के चलते उनके दाम बढ़ने तय है, ऐसे में किचन की सभी वस्तुओं के दाम बढ़ना तय है।
कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना का इजाफा भी अनाज के दामों में वृद्धि करेगा। उधर कामकाजी महिलाओं को कहीं राहत मिली है तो कहीं टैक्स स्लैब में छूट न मिलने उनमें मायूसी भी है। ग्रामीण महिलाओं पर ध्यान रखते हुए स्वयं सहायता समूहों को ऋण देने की व्यवस्था की गई है तो उज्ज्वला योजना का दायरा भी बढ़ाया गया है लेकिन महिला सुरक्षा के मुद्दे को नकारा गया है।
बीएचयू की अर्थशास्त्री प्रो. किरण बर्मन की मानें तो बजट में घोषणाएं तो खूब की गई हैं लेकिन उसके लिए संसाधन कहां से आएंगे, इसका पता नहीं। एक तरह से देखा जाए तो महिलाओं को कहीं से भी कोई राहत नहीं मिली है बल्कि उन पर महंगाई की मार और पड़ी ही है।
कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना का इजाफा भी अनाज के दामों में वृद्धि करेगा। उधर कामकाजी महिलाओं को कहीं राहत मिली है तो कहीं टैक्स स्लैब में छूट न मिलने उनमें मायूसी भी है। ग्रामीण महिलाओं पर ध्यान रखते हुए स्वयं सहायता समूहों को ऋण देने की व्यवस्था की गई है तो उज्ज्वला योजना का दायरा भी बढ़ाया गया है लेकिन महिला सुरक्षा के मुद्दे को नकारा गया है।
बीएचयू की अर्थशास्त्री प्रो. किरण बर्मन की मानें तो बजट में घोषणाएं तो खूब की गई हैं लेकिन उसके लिए संसाधन कहां से आएंगे, इसका पता नहीं। एक तरह से देखा जाए तो महिलाओं को कहीं से भी कोई राहत नहीं मिली है बल्कि उन पर महंगाई की मार और पड़ी ही है।