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काशी की गलियों के 100 से ज्यादा होटल व लॉज असुरक्षित,प्रशासनिक अधिकारी मौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 21 Jun 2018 05:39 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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वाराणसी में गंगा घाटों के किनारे की गलियों और संकरे इलाकों में स्थित सवा सौ से ज्यादा ऐसे होटल, धर्मशालाएं, गेस्ट हाउस और लॉज हैं, जहां आग से सुरक्षा के मुकम्मल उपाय नहीं हैं। इसके साथ ही यदि यहां आग लग जाए तो दमकल की गाड़ियों का पहुंच पाना असंभव ही नहीं नामुमकिन है।
इसके बावजूद इनके खिलाफ कार्रवाई में दमकल विभाग नोटिस देने तक ही सीमित रहता है तो पुलिस और प्रशासन के अधिकारी इस संबंध में पूरी तरह से चुप्पी साधे रहते हैं और हादसों के होने पर कागजी कवायदों में जुट जाते हैं।
लखनऊ के चारबाग स्थित दो होटलों में मंगलवार की भोर आग लगने केे कारण छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग झुलस गए। शहर में इससे पहले कैंटोनमेंट स्थित जेएचवी मॉल, सिगरा स्थित आईपी मॉल और गोदौलिया-बांसफाटक मार्ग स्थित स्पाइस केसीएम सहित भीड़भाड़ वाली कई अन्य व्यावसायिक और आवासीय इमारतों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
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इसके बावजूद इनके खिलाफ कार्रवाई में दमकल विभाग नोटिस देने तक ही सीमित रहता है तो पुलिस और प्रशासन के अधिकारी इस संबंध में पूरी तरह से चुप्पी साधे रहते हैं और हादसों के होने पर कागजी कवायदों में जुट जाते हैं।
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लखनऊ के चारबाग स्थित दो होटलों में मंगलवार की भोर आग लगने केे कारण छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग झुलस गए। शहर में इससे पहले कैंटोनमेंट स्थित जेएचवी मॉल, सिगरा स्थित आईपी मॉल और गोदौलिया-बांसफाटक मार्ग स्थित स्पाइस केसीएम सहित भीड़भाड़ वाली कई अन्य व्यावसायिक और आवासीय इमारतों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
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बीते माह ही मचा था हड़कंप
आग पर काबू पाने का प्रयास करते कर्मी
बीते अप्रैल महीने के दूसरे हफ्ते में गोदौलिया स्थित होटल देवा इन में आग लगने पर हड़कंप मच गया था। वहीं, बीते मई महीने में भीड़भाड़ वाली संकरी सेवई मंडी में गिरधर साव के सेवई कारखाने में लगी आग को बुझाने में तो 26 घंटे से ज्यादा का समय लगा था।
इसके बावजूद इस संबंध में अग्निशमन विभाग, पुलिस और प्रशासन के स्तर से गंभीरता नहीं बरती जा रही है। इस संबंध में मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश राय ने बताया कि हमारी ओर से लगातार नोटिस जारी कर आगाह किया जाता रहता है। इसके बावजूद हमारी नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। आग से सुरक्षा के उपाय के प्रति खुद जागरूकता दिखानी होगी।
इसके बावजूद इस संबंध में अग्निशमन विभाग, पुलिस और प्रशासन के स्तर से गंभीरता नहीं बरती जा रही है। इस संबंध में मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश राय ने बताया कि हमारी ओर से लगातार नोटिस जारी कर आगाह किया जाता रहता है। इसके बावजूद हमारी नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। आग से सुरक्षा के उपाय के प्रति खुद जागरूकता दिखानी होगी।
न प्रशिक्षण और न कभी होती है मॉक ड्रिल
अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने बताया कि प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाउस और लॉज का पंजीयन सराय एक्ट के तहत करा लेते हैं। मगर आग से सुरक्षा के लिए हमारी एनओसी नहीं लेते हैं।
गंगा घाट के किनारे की गलियों और घनी आबादी वाले संकरे इलाकों में स्थित होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाउस और लॉजों के कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र की मदद से आग बुझाने का प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता है। इसके साथ ही इन स्थानोें पर आग से बचाव के लिए कभी मॉक ड्रिल भी नहीं की जाती है।
गंगा घाट के किनारे की गलियों और घनी आबादी वाले संकरे इलाकों में स्थित होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाउस और लॉजों के कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र की मदद से आग बुझाने का प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता है। इसके साथ ही इन स्थानोें पर आग से बचाव के लिए कभी मॉक ड्रिल भी नहीं की जाती है।