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काशी में भी आपके लाडले की जान से खेल रहे कोचिंग संस्थान, ना हो जाए सूरत जैसा हाल

Sun, 26 May 2019 02:02 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 26 May 2019 02:02 PM IST
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More than 100 coaching institutes running without Fire department NOC in varanasi
बनारस में 100 से ज्यादा कोचिंग सेंटर ने नहीं ली एनओसी - फोटो : अमर उजाला

सुखद भविष्य के सपने बेचने वाले आपके लाडले की जान संकट में डाल रहे हैं। सर्व विद्या की राजधानी काशी में 100 से ज्यादा ऐसे कोचिंग संस्थान हैं जो अग्निशमन विभाग की एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के बिना डिब्बेनुमा भवनों में चल रहे हैं। यहां आपात स्थिति से निपटने के कोई इंतजाम नहीं हैं।

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क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी का दावा है कि उन्हें इनकी जानकारी नहीं है। वह बिना अग्निशमन विभाग की एनओसी के कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण नहीं करते, जबकि अग्निशमन विभाग का दावा है कि शहर के किसी भी कोचिंग संस्थान ने एनओसी नहीं ली है। इन हालात में यह जरूरी है कि अपने बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें।
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स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ने वालों के साथ ही कई तरह के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों छात्र शहर के कोचिंग संस्थानों में प्रवेश लेते हैं। पूर्वांचल के साथ ही देश के कई हिस्सों से छात्र यहां पहुंचते हैं और मोटी फीस भी भरते हैं। मोटी कमाई के लिए शहर भर में कोचिंग संस्थानों की बाढ़ सी आ गई है।
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दुर्गाकुंड, लंका, अर्दली बाजार, भेलूपुर, मलदहिया, मैदागिन आदि क्षेत्रों में जगह-जगह बोर्ड लगाकर छात्रों को लुभाया जाता है। कुछ को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर संस्थान आवासीय मकानों में चल रहे हैं। पहले यह मकान दो-तीन कमरों के थे और बाद में यह कई तल के भवन में बदल गए, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने
के लिए इनमें कोई इंतजाम नहीं है।

यह हैं नियम :
अग्निशमन विभाग के अनुसार, शहर के कई कोचिंग संस्थानों में मानकों का पालन नहीं हो रहा है। एनओसी नहीं लिए जाने के कारण विभाग के पास इनका कोई डाटा भी नहीं है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पास भी ऐसे कोचिंग संस्थानों की संख्या को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है। बिना एनओसी कोचिंग संस्थानों के संचालन पर कोई भी
अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

नियमानुसार, कोचिंग संस्थान खोलने से पहले अग्निशमन कार्यालय से एनओसी लेनी होती है। इसी आधार पर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पंजीकरण किया जाता है। 

अब जागा प्रशासन, सर्वे शुरू :
सूरत की घटना के बाद प्रशासन की तंद्रा टूटी और अग्निशमन विभाग ने शनिवार से विभिन्न क्षेत्रों में कोचिंग संस्थानों का सर्वे शुरू किया। मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने मातहतों को कोचिंग संस्थानों में आग से बचाव के इंतजाम, जागरूकता और स्थिति आदि का डाटा एकत्र करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद सर्वे के लिए टीमें गठित की गई हैं।

पर्यटक भी सुरक्षित नहीं :
हर साल देश ही नहीं, विदेशों से भी हजारों पर्यटक काशी पहुंचते हैं। लिहाजा कमाई के चक्कर में जगह-जगह होटल खोल दिए गए, लेकिन इनमें भी अग्नि सुरक्षा के मानकों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। कैंट रेलवे स्टेशन के सामने का इलाका, गोदौलिया, कैंटोनमेंट में कई ऐसे होटल हैं जहां आपात स्थिति से निपटने के इंतजाम नहीं हैं। बहुमंजिला
भवनों में निकास के नाम पर केवल एक ही द्वार और एक ही सीढ़ी है। यदि सीढ़ी की ओर से आग लग जाए तो होटल से निकलने का कोई विकल्प नहीं है।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनिमेष सिंह ने बताया कि शहर के किसी भी कोचिंग संस्थान ने एनओसी नहीं ली है। शिक्षा विभाग की ओर से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए किसी को भी हमारे पास नहीं भेजा जाता है। कोचिंग संस्थान स्वेच्छा से एनओसी ले सकते हैं या रुचि जाहिर करने पर उन्हें अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में हम मदद कर सकते हैं।

क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी वाराणसी ज्ञान प्रकाश वर्मा ने बताया कि बिना अग्निशमन एनओसी के कोचिंग संस्थान चलाने अनुमति नहीं दी जाती है। अक्टूबर में सभी संस्थानों से अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा गया था। एक बार फिर सभी संस्थानों को नोटिस जारी कर अग्निशमन सुरक्षा से जुड़े प्रमाण पत्र मांगे जाएंगे।

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