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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Morari Bapu People got angry for Baba Vishwanath darshan during Sutak in varanasi

Morari Bapu: सूतक में बाबा विश्वनाथ का स्पर्श दर्शन, भड़के लोग; मोरारी बापू बोले- उन पर नहीं लागू होता यह नियम

Sun, 15 Jun 2025 05:46 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 15 Jun 2025 05:46 AM IST
सार

कथावाचक मोरारी बापू का शनिवार को काशी में विरोध किया गया। अखिल भारतीय सन्त समिति सहित सनातन धर्म से जुड़े लोगों ने कहा कि सूतक के परिस्थिति में रामकथा कहना घोर निंदनीय है।

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Morari Bapu People got angry for Baba Vishwanath darshan during Sutak in varanasi
काशी में मोरारी बापू का फूंका गया पुतला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय कथावाचक मोरारी बापू की मानस सिंदूर कथा से पहले ही काशी में विवाद शुरू हो गया है। पत्नी के निधन के तीन दिन बाद रामकथा के लिए काशी पहुंचे मोरारी बापू का विरोध शुरू हो गया है। सूतक में बाबा विश्वनाथ का स्पर्श दर्शन करने और व्यासपीठ से रामकथा का काशी का शंकराचार्य, संत समाज, काशीतीर्थ पुरोहित और वैष्णव संतों में आक्रोश है। वहीं मोरारी बापू का कहना है कि वह वैष्णव साधु हैं और उन पर यह नियम लागू नहीं होता है।

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शनिवार की दोपहर में कथावाचक मोरारी बापू बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। दर्शन और पूजन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विरोध शुरू हो गया। सभी ने एकस्वर में यह प्रश्न उठाया कि सूतक में होने के बाद मोरारी बापू ने बाबा विश्वनाथ का स्पर्श दर्शन कैसे किया? 
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इसके साथ ही वह व्यासपीठ से कथा कैसे सुना रहे हैं। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सवाल उठाते हुए कहा कि मोरारी बापू बताएं कि वह किस शास्त्रीय वचन के आधार पर सूतक में बाबा विश्वनाथ का स्पर्श दर्शन कर रहे हैं और व्यासपीठ पर बैठकर कथा कह रहे हैं? 

वह खुद को वैष्णव साधु बता रहे हैं तो वैष्णव संपद्राय के संत बताएं कि क्या गृहस्थ जीवन में रहने वाले भी संत होते हैं। पत्नी और बच्चों के साथ रहते हुए भी खुद को संत कहते हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि कौन से वैष्णव ग्रंथ में लिखा है कि पत्नी के निधन के बाद उन पर सूतक का नियम लागू नहीं होता है?

Morari Bapu People got angry for Baba Vishwanath darshan during Sutak in varanasi
स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला

धर्म विरुद्ध आचरण करने वाले कथावाचकों का विरोध करे काशी की जनता
अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि मोरारी बापू कथा के नाम पर कितना पाखंड फैलाएंगे। वह जिन भगवान राम की कथा सुना रहे हैं, जब उनको अपने पिता के स्वर्गवास की सूचना मिली तो उन्होंने श्राद्ध किया और सूतक का पालन भी। 

धर्मशास्त्रों के अनुसार राजा, योगी, यति और ब्रह्मचारी को सूतक नहीं लगता है। मोरारी बापू बताएं कि वह इन चारों में से किस श्रेणी में आते हैं? रामकथा के यजमान भी ऐसे कथावाचक से रामकथा कराकर काशी में अपने नाश को आमंत्रण दे रहे हैं। मोरारी बापू कहते हैं कि रामकथा से सुकून आता है, लेकिन कथा से पहले तन व मन की शुचिता बहुत जरूरी है। 

मैं काशी की जनता से आग्रह करता हूं कि ऐसे धर्मविरुद्ध आचरण करने वाले कथावाचकों का विरोध करें जिनको विवाह और चिता की अग्नि में अंतर नहीं पता है। ऐसे कथावाचक हमें ज्ञान देंगे जिनको जीवन की मंगल यात्रा और अंतिम यात्रा का अंतर ज्ञात नहीं है। अपने मंच से अल्लाह हो अकबर की धुनी रमाने वाले सनातन धर्म पर ज्ञान न दें।

सनातन धर्म में हैं तो सूतक का पालन जरूरी
काशी की वैष्णव पीठ गोपाल मंदिर के शास्त्री विश्वंभर पाठक ने बताया कि जनना और मरणा का शौच सभी को लगता है। अगर हम सनातन धर्म में है तो सूतक का पालन करना जरूरी है। चाहे वह संत हो, शैव हो या वैष्णव। सूतक के दौरान तो मंदिर में प्रवेश वर्जित होता है। 16 दिनों तक सूतक की विधियों का पालन करना जरूरी है।

सात पीढ़ी तक लगता है सूतक
विशेश्वर शास्त्री द्राविड़ ने कहा कि धर्मसिंधु के अनुसार कोई भी हो सात पीढ़ी तक सूतक लगता ही है। वैष्णव, शैव और शाक्त से कोई मतलब नहीं होता है। निर्णय सिंधु और धर्मशास्त्र के अनुसार सभी के लिए सूतक के नियमों का पालन जरूरी है। मसान पर जाने मात्र से ही सूतक लग जाता है।

हम पर नहीं लागू होता है नियम
कथा वाचक मोरारी बाबू ने रामकथा और विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन पर छिड़ी बहस पर कहा कि हम वैष्णव परंपरा से हैं हम वैष्णव साधु हैं। हम पर यह नियम लागू नहीं होता। हम न क्रिया करते हैं और ना उत्तर क्रिया करते हैं। भगवान का भजन करना और कथा करना इसमें सुकून है ना कि सूतक में। विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के जवाब में कहा कि हम तो देखो दर्शन करके आए हैं।

सनातन धर्म के संत के अनुसार नहीं है आचरण
काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री प्रो. विनय पांडेय ने कहा कि मोरारी बापू ने जो कृत्य किया है उसकी जितनी भर्त्सना की जाए कम है। बाबा विश्वनाथ के मंदिर में सूतक काल में स्पर्श दर्शन करना धर्मशास्त्र की मर्यादा के विरुद्ध है। यह सनातन धर्म के संत के अनुसार कृत्य नहीं है। धर्मशास्त्र में सूतक की जो विधियां बताई गई हैं, उसका पालन जरूरी है। धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि अगर कोई अशुचिता अवस्था में मंदिर में प्रवेश करता है तो मंदिर का देवतत्व उस विग्रह से क्षीण हो जाता है।

इनकी भी सुनें
मोरारी बापू बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने आए थे और उसके अनुसार ही उनको पूजन कराया गया। - शंभू शरण, एसडीएम, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

2021 में सूतक में अर्चक ने कराई थी मंदिर में पूजा
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सूतक में पूजन कराने का मामला 2021 में भी हो चुका है। मंदिर के अर्चक श्रीकांत मिश्र ने विश्वनाथ धाम के लोकार्पण में 13 दिसंबर 2021 को पूजन करा दिया था। इस मामले में जांच भी हुई थी। उनको एक साल के लिए चंदौली भेज दिया गया था।

भयानक अनर्थ और शास्त्र विरुद्ध है

श्री काशी सुमेरुपीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि मोरारी बापू की पत्नी को मरे तीन दिन भी नहीं हुआ और वह काशी में रामकथा कह रहे हैं। यह भयानक अनर्थ और शास्त्र विरुद्ध है। वह सूतक में हैं, गृहस्थ हैं उनकी पत्नी मरी है। इनको मंदिर में नहीं जाना चाहिए ना दर्शन करना चाहिए, ना देव विग्रहों और धर्मग्रंथों का स्पर्श करना चाहिए।

उन्होंने विश्वनाथ मंदिर में जाकर उनकी शुचिता और पवित्रता को भंग करके भयानक पाप किया है। इनको प्रायश्चित करना चाहिए और 13 दिन तक मंदिरों में नहीं जाना चाहिए। हम काशी की जनता से आग्रह करना चाहते हैं कि ऐसे लोगों की कथा का बहिष्कार करना चाहिए। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए।

कहो मोरारी ! ई का कइला सूतक में बाबा के धइला...

मोरारी बापू के बाबा विश्वनाथ मंदिर में स्पर्श दर्शन के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने विरोध जताया। काशी के हास्य कवि दमदार बनारस ने लिखा कि कहो मोरारी ! ई का कइला सूतक में बाबा के धइला...। ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने लिखा कि 11 जून को पत्नी का निधन, 14 जून से काशी में मानस सिंदूर के रूप में रामकथा करेंगे। सूतक में रहने के बावजूद काशी विश्वनाथ का दर्शन। क्या ऐसे ही होते हैं सनातन धर्म के आचार्य? काशी के विद्वान व धर्माचार्य मौन क्यों हैं? काशी की पांडित्य परम्परा क्या इसे स्वीकार करेगी?

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