बनारस में चांद की तस्दीक पर ऊहापोह, 14 को मई को मनेगी ईद, शहर ए काजी का एलान
चांद और ईद को लेकर बनारस में देर रात तक बैठक व उहापोह का दौर चलता रहा। बुधवार की देर रात शहर काजी गुलाम यासिन द्वारा चांद की तस्दीक के बाद ईद 14 मई को मनाने का ऐलान किया गया।
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चांद की तस्दीक पर उहापोह के कारण मुस्लिम समुदाय कहीं ईद मनाएगा तो कहीं रोजा रखा जाएगा। चांद और ईद को लेकर बनारस में देर रात तक बैठक व उहापोह का दौर चलता रहा। मुस्लिम समुदाय में कुछ लोग 13 को ईद मनाएंगे और कुछ 14 मई को। बुधवार की देर रात शहर काजी गुलाम यासिन द्वारा चांद की तस्दीक के बाद ईद कल मनाने का ऐलान किया गया। शहर ए काजी के ऐलान के बाद कई इलाकों में मस्जिदों से कल के ईद की घोषणा भी कर दी गई।
शहर ए काजी गुलाम यासीन ने बताया कि कुछ जगहों पर चांद की तस्दीक हुई। इसके बाद ही ईद का ऐलान किया गया है। इज्जतीमाई रुयत हलाल कमेटी की नई सड़क स्थित लंगड़े हाफिज मस्जिद से ऐलान किया गया कि शव्वाल के चांद की कोई शहादत नहीं हुई है। इसलिए 30वां रोजा 13 मई को होगा और जुमे के दिन ईद उल फितर मनाई जाएगी।
कमेटी के हजरत मौलाना जकीउल्लाह ने बताया कि चांद की तस्दीक नहीं होने के कारण 14 मई को ईद मनाने का फैसला किया गया है। इसका ऐलान भी कर दिया गया है। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि देश भर में कहीं भी चांद की तस्दीक नहीं हुई है। ऐसे में 30वां रोजा 13 मई को और ईद 14 मई को मनाई जाएगी।
नमाज के लिए कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन
बुधवार को रोजा इफ्तार के बाद चांद देखने की गहमागहमी शुरू हो गई लेकिन आसमान में बादलों के कारण कहीं से भी कोई तस्दीक नहीं हो सकी। शहर के मौलाना व उलेमा ने देश के कई शहरों में चांद की दरियाफ्त की लेकिन कहीं से भी चांद के दीदार की शहादत की सूचना नहीं मिली। इस दौरान ईद की नमाज के लिए कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाएगा। ईद की नमाज में पेश ए इमाम के अलावा सिर्फ पांच लोग ही मौजूद रहेंगे।
चांद पर आधारित है इस्लामिक कैलेंडर
इस्लामिक कैलेंडर चांद पर आधारित है। चांद के दिखाई देने पर ही ईद या प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। रमजान के मुकद्दस माह की शुरूआत चांद के देखने से होता है और इसका समापन भी चांद के निकलने से होता है। रमजान के 29 या 30 दिनों के बाद ईद का चांद दिखता है।
कैसे हुई थी ईद की शुरूआत
ईद-उल-फितर के दिन लोग अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं। उनका मानना है कि उनकी ही रहमत से वे पूरे एक माह तक रमजान का उपवास रख पाते हैं। आज के दिन लोग अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गरीबों में बांट देते हैं। उनको उपहार में कपड़े, मिठाई और भोजन आदि देते हैं।