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Monkeypox Virus: मंकीपॉक्स में शरीर पर दिखते हैं चेचक जैसे निशान, जानिए क्या हैं लक्षण-बचाव

Sun, 29 May 2022 10:16 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 29 May 2022 10:16 AM IST
सार

कोरोना संक्रमण का कहर अभी दुनिया से खत्म भी नहीं हुआ कि मंकीपॉक्स नाम की एक नई बीमारी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आईएमएस बीएचयू के मॉलीक्यूलर बायोलॉजी विभाग के प्रो.सुनीत कुमार सिंह ने मंकीपॉक्स के बारे में जानकारी दी।

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Monkeypox Virus body looks like smallpox know what are the symptoms and prevention
12 देशों में मंकीपॉक्स मामलों की पुष्टि हुई है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोरोना के संक्रमण को लेकर अभी लोगों सतर्कता बरतने की अपील की ही जा रही है। इस बीच नई बीमारी मंकीपॉक्स ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राहत की बात यह है कि अभी भारत में कोई केस नहीं मिला है लेकिन शासन, प्रशासन और चिकित्सकों की ओर से इसको लेकर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है।

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आईएमएस बीएचयू के मॉलीक्यूलर बायोलॉजी विभाग के प्रो.सुनीत कुमार सिंह ने बताया कि मंकीपॉक्स में शरीर पर चेचक में दिखने वाले निशान (शरीर में जगह-जगह लाल-लाल दाने, फफोले पड़ने जैसा दिखना) ही दिख रहा है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका असर दो से चार सप्ताह तक रह सकता है। 
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इस कारण पड़ा मंकीपॉक्स नाम
मंकीपॉक्स के बारे में प्रो.सुनीत का कहना है कि यह एक डीएनए वायरस है, जिसका जुड़ाव वायरस के पॉक्सविरिडे फेमिली से है। यह स्मॉलपॉक्स वायरस से मिलता जुलता है। यह वायरस 1958 में खोजा गया। पहली बार इस वायरस के कारण अनुसंधान के उद्देश्य से रखी गई बंदरों की कॉलोनियों में चेचक जैसी बीमारी का प्रकोप हुआ, इसलिए इसे मंकीपॉक्स कहा जाता है।

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मनुष्य में पहली बार इसके संक्रमण की रिपोर्ट 1970 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में की गई थी। प्रो. सुनीत ने बताया कि यह भी जानना जरूरी है कि मंकीपॉक्स वायरस का बंदरों से कोई लेना देना नहीं हैं, बंदर इस रोग के वाहक नहीं होते हैं। 


भारत में नहीं है मंकीपॉक्स की पुष्टि 
प्रो. सुनीत कुमार सिंह ने बताया कि लंदन, लिस्बन, मैड्रिड, क्यूबेक, बोस्टन, स्टॉकहोम और रोम में मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले सामने आए हैं। अब तक भारत में कोई पुष्टि नहीं हुई है। जिन जगहों पर यह संक्रमण मिला भी है वहां भी संख्या अधिक नहीं है लेकिन सभी को सतर्क रहना होगा। एक रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी और मध्य अफ्रीका का दौरा करने वाले कुछ लोगों में यह  संक्रमण देखा गया है लेकिन लक्षण उनके अपने देशों में लौटने के बाद ही दिखे। ऐसे में संबंधित व्यक्ति को अलग रखना चाहिए ताकि इसका असर कम हो सके। 

ये हैं लक्षण

मंकीपॉक्स के लक्षण चेचक के संक्रमण से मिलते जुलते हैं। अधिकांश मामलों में लक्षण बुखार, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और थकावट आदि लक्षण हैं। शरीर पर दाने दिखाई देते हैं। प्रो. सुनीत के अनुसार मनुष्यों में मंकीपॉक्स वायरस का संचरण मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित जानवरों, मनुष्यों या वायरस से दूषित सामग्री के संपर्क से होता है। यह वायरस घावों, शरीर के तरल पदार्थ, सांस की बूंदों और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी फैलता है।

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