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आम बजट पर वाराणसी में प्रतिक्रिया, कोई बरसा तो किसी ने थपथपाई पीठ

Wed, 01 Feb 2017 09:44 PM IST
टीम डिजिटल,वाराणसी
टीम डिजिटल,वाराणसी Updated Wed, 01 Feb 2017 09:44 PM IST
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mix reaction for general budget in varanasi
Budget 2017 - फोटो : Budget 2017
पांच और एक हजार के नोटबंदी जैसे अहम फैसलों के बाद संसद में पेश आम बजट  ने लोगों को राहत दी है। हालांकि जितना लोगों ने सोचा था, उतना नहीं मिला।  बावजूद इसके बहुत हद तक लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की कोशिश की गई। 
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पहली  बार रेल और आम बजट एक साथ पेश किया गया। इसको लेकर वाराणसी के लोगों में उत्सुकता  रही। सुबह एक मंत्री की मौत के बाद लोगों को बजट पेश किए जाने को लेकर संशय  बन गया लेकिन समाचार चैनलों पर सुबह साढ़े नौ बजे बताया गया कि राष्ट्रपति  से मुलाकात के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली संसद के लिए चल दिए तो लोगों  ने राहत की सांस ली।
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11 बजते बजते लोग टीवी सेट, रेडियो सेट से चिपक गए।  मोबाइल सेट पर भी लोगों ने बजट का भाषण सुना और देखा। यही नहीं  सोशल साइटों पर भी इसके खूब चर्चे रहे। बजट को लोगों ने सराहना तो की लेकिन कई चीजे छिपी रही, उसे लेकर संदेह जताते रहे।  
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वाराणसी के उद्यमियों ने कहा कि इस बजट को किसान, मजदूर, युवा और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों को समर्पित किया गया है। सूक्ष्म, मध्यम और लघु उद्योग के लिए इस बजट में कुछ खास प्रावधान नहीं किया गया। आयकर के स्लैब में सिर्फ एक बिंदु पर बदलाव किया गया है।
 कृषि विज्ञानियों  एवं अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आम बजट किसानों के हित में है। योजनाओं और बाजार उपलब्ध कराना चुनौती है लेकिन इससे दोनों अवसर मिलने की उम्मीद जगी है। आर्थिक विशेषज्ञों की राय में इस बार का बजट बेहतर दूरगामी परिणाम देने वाला है।
अर्थशास्त्र के इन जानकारों का कहना है कि ज्यादा लोगों को कर के दायरे में लाना एक बेहतर पहल है।  भाजपा नेताओं ने बजट को अभूतपूर्व बताया। बुधवार को पार्टी कार्यालय में हुई बैठक में काशी क्षेत्र के अध्यक्ष लक्ष्मण आचार्य ने कहा कि वोट की राजनीति नहीं देश की तरक्की का बजट है।  

बसपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह बजट पूरी तरह से पूंजीपतियों और धन्नासेठों के हित में है। इससे गरीबों, किसानों का भला होने वाला नहीं है।
 जन कल्याण परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ने आम बजट पर कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार ने इसे चुनावी बजट बताया।
इस आम बजट से प्रदेशों में होने वाले विधानसभा के चुनाव में भाजपा को लाभ पहुंचाने की कोशिश की है।  चुनाव आयोग को भी इसे संज्ञान में लेना चाहिए। 
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