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पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगा रहे आला अधिकारी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 31 Mar 2017 05:50 PM IST
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स्वच्छ भारत अभियान
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को आला अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक स्वच्छ भारत अभियान कागजों पर ही चल रहा है। कहने को तो ग्रामीण इलाकों में 1329 सफाईकर्मियों की तैनाती है पर डेढ़ सौ से ज्यादा सफाई कर्मी अधिकारियों की सेवा में हैं।
सफाई के काम से बचने के लिए तमाम कर्मचारियों ने पहले से ही खुद को कहीं न कहीं अटैच करा लिया है। इस बीच विधानसभा चुनाव में भी उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। चुनाव खत्म होने के बाद भी सफाई कर्मी अपनी तैनाती वाले गांवों में नहीं पहुंचे हैं।
वाराणसी जिले में सफाई कर्मचारियों को हर महीने एक करोड़ 99 लाख 35 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। अफसर नहीं चाहते हैं कि गांवों की सफाई हो। इसके लिए अफसरों ने सफाई कर्मियों को किसी न किसी रूप में दूसरी जगह से संबद्ध कर रखा है।
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कई अफसरों के यहां सफाई कर्मियों की ड्यूटी बागवानी जैसे काम के लिए लगी है तो कुछ बाजार से सामान खरीद कर घर पहुंचा रहे हैं। बच्चों से जुड़े काम भी इन्हीं कर्मचारियों से कराए जाते हैं। चोलापुर ब्लॉक के पंचायत कार्यालयों में उनसे कंप्यूटर ऑपरेटर का काम लिया जा रहा है। सेवापुरी ब्लाक के कई ग्राम पंचायत अधिकारी इन्हें अपने साथ रख कर बाबूगीरी कराते हैं।
पूर्व डीएम विजय किरन आनंद ने ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई अभियान पर गंभीरता से काम शुरू किया था। जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए थे। उनके तबादले के बाद ग्रामीण क्षेत्र स्वच्छता मिशन से लगभग कट गया है।
काशी विद्यापीठ ब्लाक के सर्वाधिक 25 सफाईकर्मी घोषित रूप से किसी न किसी रूप में जिला स्तरीय अधिकारी की घरेलू चाकरी कर रहे हैं। चिरईगांव ब्लाक के 11 सफाईकर्मी जिले में तैनात सबसे बड़े अफसर के आवास पर लगे हैं। दो विकास भवन और आठ ब्लाक कार्यालय पर अटैच हैं।
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सफाई के काम से बचने के लिए तमाम कर्मचारियों ने पहले से ही खुद को कहीं न कहीं अटैच करा लिया है। इस बीच विधानसभा चुनाव में भी उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। चुनाव खत्म होने के बाद भी सफाई कर्मी अपनी तैनाती वाले गांवों में नहीं पहुंचे हैं।
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वाराणसी जिले में सफाई कर्मचारियों को हर महीने एक करोड़ 99 लाख 35 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। अफसर नहीं चाहते हैं कि गांवों की सफाई हो। इसके लिए अफसरों ने सफाई कर्मियों को किसी न किसी रूप में दूसरी जगह से संबद्ध कर रखा है।
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कई अफसरों के यहां सफाई कर्मियों की ड्यूटी बागवानी जैसे काम के लिए लगी है तो कुछ बाजार से सामान खरीद कर घर पहुंचा रहे हैं। बच्चों से जुड़े काम भी इन्हीं कर्मचारियों से कराए जाते हैं। चोलापुर ब्लॉक के पंचायत कार्यालयों में उनसे कंप्यूटर ऑपरेटर का काम लिया जा रहा है। सेवापुरी ब्लाक के कई ग्राम पंचायत अधिकारी इन्हें अपने साथ रख कर बाबूगीरी कराते हैं।
पूर्व डीएम विजय किरन आनंद ने ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई अभियान पर गंभीरता से काम शुरू किया था। जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए थे। उनके तबादले के बाद ग्रामीण क्षेत्र स्वच्छता मिशन से लगभग कट गया है।
काशी विद्यापीठ ब्लाक के सर्वाधिक 25 सफाईकर्मी घोषित रूप से किसी न किसी रूप में जिला स्तरीय अधिकारी की घरेलू चाकरी कर रहे हैं। चिरईगांव ब्लाक के 11 सफाईकर्मी जिले में तैनात सबसे बड़े अफसर के आवास पर लगे हैं। दो विकास भवन और आठ ब्लाक कार्यालय पर अटैच हैं।
पांच हजार रुपये में झूठी हाजिरी-सच्चा वेतन
स्वच्छ भारत मिशन
सफाई कर्मियों के वेतन से अधिकारियों और ग्राम प्रधानों की खासी कमाई होती है। दर्जनों सफाई कर्मी अन्य कार्यों में लगे होने के कारण झूठी हाजिरी के सहारे वेतन पाने के लिए ग्राम प्रधान, सचिव, एडीओ पंचायत से मिल कर मस्टररोल बनवाने के लिए पांच-पांच हजार रुपये देते हैं।
ज्यादातर सफाईकर्मी अपने तैनाती वाले स्थानों पर कभी-कभार ही जाते हैं। ग्राम प्रधान के यहां हाजिरी लगाने के साथ ही सफाई करने की झूठी रिपोर्ट भी रजिस्टर में अंकित कर गायब हो जाते हैं। बावजूद इसके जिम्मेदारों की संस्तुति पर डीपीआरओ कार्यालय से इनके खातों में वेतन पहुंच जाता है।
संबद्ध सफाईकर्मचारियों की तैनाती के बारे में जानकारी देने से बचने की डीपीआरओ एके सिंह की कोशिश इस गोलमाल की ओर इशारा करती है।
ज्यादातर सफाईकर्मी अपने तैनाती वाले स्थानों पर कभी-कभार ही जाते हैं। ग्राम प्रधान के यहां हाजिरी लगाने के साथ ही सफाई करने की झूठी रिपोर्ट भी रजिस्टर में अंकित कर गायब हो जाते हैं। बावजूद इसके जिम्मेदारों की संस्तुति पर डीपीआरओ कार्यालय से इनके खातों में वेतन पहुंच जाता है।
संबद्ध सफाईकर्मचारियों की तैनाती के बारे में जानकारी देने से बचने की डीपीआरओ एके सिंह की कोशिश इस गोलमाल की ओर इशारा करती है।