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खुशखबरः पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में दौड़ेगी मिनी मेट्रो
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 20 Dec 2017 01:19 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में मिनी मेट्रो चलाने की तैयारी हो रही है। मिनी मेट्रो ट्रेन में मेट्रो की तुलना में कोच छोटे होंगे। इनकी गति भी कम रहती है। इनकी लागत भी कम आएगी। छोटे शहरों के लिए यह मेट्रो उपयुक्त रहती है। मेट्रोमैन डॉ. ई श्रीधरन ने इस बात की जानकारी दी।
मेट्रो प्रोजेक्ट के मुख्य सलाहकार व मेट्रोमैन डॉ. ई श्रीधरन ने बताया कि वाराणसी, मेरठ और इलाहाबाद में डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने का काम तेज किया गया है। वाराणसी की डीपीआर में प्रदेश सरकार ने कुछ सुझाव शामिल कराए हैं। इसे केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
श्रीधरन लखनऊ मेट्रो की समीक्षा करने के लिए राजधानी में थे। मेट्रो भवन में श्रीधरन ने बताया कि यूपी के 20 लाख से कम आबादी वाले गोरखपुर और आगरा जैसे शहरों में लखनऊ की तर्ज पर मेट्रो नहीं चलाई जा सकती।
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मेट्रो प्रोजेक्ट के मुख्य सलाहकार व मेट्रोमैन डॉ. ई श्रीधरन ने बताया कि वाराणसी, मेरठ और इलाहाबाद में डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने का काम तेज किया गया है। वाराणसी की डीपीआर में प्रदेश सरकार ने कुछ सुझाव शामिल कराए हैं। इसे केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
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श्रीधरन लखनऊ मेट्रो की समीक्षा करने के लिए राजधानी में थे। मेट्रो भवन में श्रीधरन ने बताया कि यूपी के 20 लाख से कम आबादी वाले गोरखपुर और आगरा जैसे शहरों में लखनऊ की तर्ज पर मेट्रो नहीं चलाई जा सकती।
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मोनो रेल भारत के शहरों की जरूरत पूरी नहीं कर सकती
ई श्रीधरन
प्रदेश सरकार को इन शहरों की जरूरत को देखते हुए लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम (मिनी मेट्रो) का प्रस्ताव दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में लखनऊ या दिल्ली के बजाय लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को दिया जाएगा।
मेट्रोमैन ने बताया कि कई बार छोटे शहरों की जरूरत पूरा करने के लिए मोनो रेल प्रोजेक्ट का सुझाव दिया जाता है। लेकिन मेरे विचार से मोनो रेल भारत के शहरों की जरूरत पूरी नहीं कर सकती।
मुंबई में यह प्रयोग सफल नहीं रही। वजह यह है कि मोनो रेल का प्रोजेक्ट मेट्रो की तुलना में महंगा होता है। इसकी यात्री क्षमता कम और संचालन महंगा है। ऐसे में मोनो रेल प्रोजेक्ट पर अब केंद्र सरकार खुद आगे नहीं बढ़ रही है।
मेट्रोमैन ने बताया कि कई बार छोटे शहरों की जरूरत पूरा करने के लिए मोनो रेल प्रोजेक्ट का सुझाव दिया जाता है। लेकिन मेरे विचार से मोनो रेल भारत के शहरों की जरूरत पूरी नहीं कर सकती।
मुंबई में यह प्रयोग सफल नहीं रही। वजह यह है कि मोनो रेल का प्रोजेक्ट मेट्रो की तुलना में महंगा होता है। इसकी यात्री क्षमता कम और संचालन महंगा है। ऐसे में मोनो रेल प्रोजेक्ट पर अब केंद्र सरकार खुद आगे नहीं बढ़ रही है।