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नीचे गाड़ियां ऊपर मेट्रो भरेगी फर्राटा
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Fri, 27 Feb 2015 02:16 AM IST
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काशी में मेट्रो रेल के संचालन का रोड मैप तैयार होने लगा है। जहां चौड़ी
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और खुली सड़कें मिलेंगी वहां ओवरहेड मेट्रो (उपरिगामी) चलाई जाएगी जबकि तंग
रास्तों वाले क्षेत्रों में भूमिगत लाइनें बिछाने की योजना है। मेट्रो संचालन के लिए सर्वे करने आई रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनामिक सर्विस (राइट्स) की टीम ने गुरुवार को चार मार्गों का सर्वे किया।
टीम ने लंका से डीरेका और लंका से पड़ाव के बीच दो नए मार्ग भी चिह्नित किए हैं। सर्वे का काम शुक्रवार तक चलेगा। टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि उपरिगामी मेट्रो के संचालन के लिए कम से कम 18 मीटर चौड़ी सड़क की जरूरत होगी।
इस लिहाज से कैंट से सिगरा, लंका से डीरेका, कैंट से सारनाथ, कचहरी से बाबतपुर और डीरेका से राजघाट इलाके में पुल पर ट्रेन संचालित करना संभव हो पाएगा। कम चौड़ी सड़क वाले स्थान पर भूमिगत रेल लाइन बिछाई जाएगी। उन्होंने बताया कि जिस मार्ग पर रोजाना 40 हजार से अधिक लोगों की आवाजाही हो, वहीं मेट्रो चलाना मुफीद होता है।
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इस लिहाजा से टीम प्रस्तावित मार्गों पर ट्रैफिक दबाव का भी अध्ययन कर रही है। राइट्स के अधिकारियों ने यह भी बताया कि उपरिगामी मेट्रो की अपेक्षा भूमिगत में तीन गुना ज्यादा खर्च आता है। ऐसे में कोशिश होगी कि ज्यादा से ज्यादा से ऐसे मार्गों को चुना जाए जो चौड़े हों और भूमिगत ट्रेन के संचालन की जरूरत कम हो।
टीम ने लंका से डीरेका और लंका से पड़ाव के बीच दो नए मार्ग भी चिह्नित किए हैं। सर्वे का काम शुक्रवार तक चलेगा। टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि उपरिगामी मेट्रो के संचालन के लिए कम से कम 18 मीटर चौड़ी सड़क की जरूरत होगी।
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इस लिहाज से कैंट से सिगरा, लंका से डीरेका, कैंट से सारनाथ, कचहरी से बाबतपुर और डीरेका से राजघाट इलाके में पुल पर ट्रेन संचालित करना संभव हो पाएगा। कम चौड़ी सड़क वाले स्थान पर भूमिगत रेल लाइन बिछाई जाएगी। उन्होंने बताया कि जिस मार्ग पर रोजाना 40 हजार से अधिक लोगों की आवाजाही हो, वहीं मेट्रो चलाना मुफीद होता है।
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इस लिहाजा से टीम प्रस्तावित मार्गों पर ट्रैफिक दबाव का भी अध्ययन कर रही है। राइट्स के अधिकारियों ने यह भी बताया कि उपरिगामी मेट्रो की अपेक्षा भूमिगत में तीन गुना ज्यादा खर्च आता है। ऐसे में कोशिश होगी कि ज्यादा से ज्यादा से ऐसे मार्गों को चुना जाए जो चौड़े हों और भूमिगत ट्रेन के संचालन की जरूरत कम हो।