{"_id":"5b87f60942c79246435d7e89","slug":"methanol-will-be-prepare-from-waste-of-varanasi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बनारस के कूड़े-कचरे से बनाया जाएगा मेथेनॉल, आईआईटी बीएचयू को सौंपी जिम्मेदारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बनारस के कूड़े-कचरे से बनाया जाएगा मेथेनॉल, आईआईटी बीएचयू को सौंपी जिम्मेदारी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 30 Aug 2018 07:20 PM IST
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घरों-दुकानों से निकलने वाले कूड़े-कचरे से अब बनारस में मेथेनॉल तैयार कराया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी आईआईटी बीएचयू को दी गई है। पहले चरण में गोरखपुर-बनारस में मेथेनॉल बनवाया जाएगा। आईआईटी बीएचयू में प्रो. पीके मिश्रा के निर्देशन में इसका प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है। इसका मॉडल बनाकर प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा।
मेथेनॉल एक कार्बनिक यौगिक है। इसे मेथिक अल्कोल भी कहा जाता है। अमूमन इसका प्रयोग बायोडीजल उत्पादन में किया जाता है। पहले खेतों में फसल की कटाई के बाद पहले एथेनॉल बनाया जाता था। अब सरकार ने सालिड वेस्ट मैटेरियल (कूड़ा-कचरा) से मेथेनॉल बनाने का निर्णय लिया है।
करीब 50 करोड़ की लागत से इसके लिए प्लांट लगाया जाएगा। बायो एनर्जी डेवपलमेंट बोर्ड के सहयोग से इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। प्रो. मिश्रा ने बताया कि प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद प्लांट का मॉडल तैयार करने सहित अन्य औपचारिकताएं चल रही हैं।
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पहले कोयले के पत्थर से गैस बनाई जाएगी। इसके बाद इसे प्यूरीफाई किया जाएगा। इसके बाद मेथेनॉल बनेगा। इस काम में एनसीएल (नेशनल केमिकल लैब) पुणे की टीम भी सहयोग करेगी।
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मेथेनॉल एक कार्बनिक यौगिक है। इसे मेथिक अल्कोल भी कहा जाता है। अमूमन इसका प्रयोग बायोडीजल उत्पादन में किया जाता है। पहले खेतों में फसल की कटाई के बाद पहले एथेनॉल बनाया जाता था। अब सरकार ने सालिड वेस्ट मैटेरियल (कूड़ा-कचरा) से मेथेनॉल बनाने का निर्णय लिया है।
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करीब 50 करोड़ की लागत से इसके लिए प्लांट लगाया जाएगा। बायो एनर्जी डेवपलमेंट बोर्ड के सहयोग से इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। प्रो. मिश्रा ने बताया कि प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद प्लांट का मॉडल तैयार करने सहित अन्य औपचारिकताएं चल रही हैं।
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पहले कोयले के पत्थर से गैस बनाई जाएगी। इसके बाद इसे प्यूरीफाई किया जाएगा। इसके बाद मेथेनॉल बनेगा। इस काम में एनसीएल (नेशनल केमिकल लैब) पुणे की टीम भी सहयोग करेगी।
वाराणसी नगर निगम नहीं उठाएगा औद्योगिक क्षेत्र का कूड़ा
वाराणसी डीएम के निर्देश के बावजूद चांदपुर औद्योगिक क्षेत्र से कूड़ा हटाना तो दूर नगर निगम के अधिकारियों ने ऐसी जानकारी से ही इनकार कर दिया। नगर निगम के अधिकारियों ने औद्योगिक क्षेत्र को अपनी सीमा से बाहर का बताते हुए सफाई कराने से पल्ला झाड़ लिया है।
जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को उद्योग बंधु की बैठक हुई थी। बैठक में औद्योगिक क्षेत्र चांदपुर में जगह-जगह वर्षों से डंप पड़े लगभग 50 ट्रक कूड़े को करसड़ा प्लांट ले जाने का निर्देश नगर निगम को दिया गया था। बुधवार को जब इंडस्ट्रियल इस्टेट से कूड़े का उठान शुरू नहीं हुई तो उद्यमियों ने नगर निगम के अधिकारियों को फोन लगाया। वहां से बताया गया कि औद्योगिक क्षेत्र से कूड़ा हटाने का निर्देश नगर निगम को नहीं दिया गया है।
इस बीच नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एके दुबे ने बताया कि निगम की सीमा से सटे 13 गांवों के साफ-सफाई का जिम्मा मुख्य विकास अधिकारी की ओर से कियाना कंपनी को दिया गया है। इसलिए उन क्षेत्रों में सफाई का कार्य नगर निगम को नहीं कराना है।
जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को उद्योग बंधु की बैठक हुई थी। बैठक में औद्योगिक क्षेत्र चांदपुर में जगह-जगह वर्षों से डंप पड़े लगभग 50 ट्रक कूड़े को करसड़ा प्लांट ले जाने का निर्देश नगर निगम को दिया गया था। बुधवार को जब इंडस्ट्रियल इस्टेट से कूड़े का उठान शुरू नहीं हुई तो उद्यमियों ने नगर निगम के अधिकारियों को फोन लगाया। वहां से बताया गया कि औद्योगिक क्षेत्र से कूड़ा हटाने का निर्देश नगर निगम को नहीं दिया गया है।
इस बीच नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एके दुबे ने बताया कि निगम की सीमा से सटे 13 गांवों के साफ-सफाई का जिम्मा मुख्य विकास अधिकारी की ओर से कियाना कंपनी को दिया गया है। इसलिए उन क्षेत्रों में सफाई का कार्य नगर निगम को नहीं कराना है।