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Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या के दिन बन रहे कई दुर्लभ योग, जरूर करें इन चीजों का दान; मिलेगा पुण्य फल

Sun, 26 Jan 2025 10:01 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sun, 26 Jan 2025 10:01 AM IST
सार

Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या पर खास योग बन रहे हैं। इस दिन बन रहे योग को ज्योतिष में बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसे में मौनी अमावस्या पर काशी में स्नान-दान के लिए पांच से 10 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ होगी।

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Mauni Amavasya 2025 Trigrahi and four shubh yoga formed on day of Mauni Amavasya
मौनी अमावस्या 2025 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान यानी मौनी अमावस्या का स्नान 29 जनवरी को है। इस बार मौनी अमावस्या पर त्रिग्रही योग के साथ चार योग बन रहा है और श्रवण नक्षत्र रहेगा। मकर राशि में सूर्य, चंद्रमा और बुध के एक साथ होने से त्रिग्रही योग बनेगा। ज्योतिष में इस योग को बहुत ही शुभ माना जाता है। शिववास, सिद्धि, वृषभ गुरु व वज्र योग बन रहा है। काशी में भी स्नान-दान के लिए पांच से 10 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ होगी।

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आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री व आचार्य शुभम मिश्रा के अनुसार माघ मास की अमावस्या तिथि 28 जनवरी की शाम 07:11 बजे से शुरू होकर 29 की शाम 6:28 बजे तक रहेगी। जबकि 29 को अमावस्या तिथि का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:30 बजे से 6:22 बजे तक रहेगा। इस दिन लाभ चौघड़िया सुबह 7:10 बजे से होगा। अमृत चौघड़िया सुबह 8:31 से 9:52 बजे तक रहेगी। शुभ चौघड़िया सुबह 11:13 बजे से 12:34 बजे तक है।
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मौनी अमावस्या पर मान्यतानुसार पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। गंगा तट पर इसी कारण भक्तजन एक मास तक कुटी बनाकर गंगा स्नान व ध्यान करते हैं। 

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ये करें दान

इस मास में संगम स्नान अन्य युगों से अन्नंत पुण्यदायी होगा। इस तिथि को पवित्र नदियों में स्नान के पश्चात् अपने सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, धन, गौ, भूमि, तथा स्वर्ण अपनी इच्छानुसार दान करना चाहिए। मौनी अमावस्या को तिल का दान भी उत्तम माना जाता है। चूंकि इस व्रत में व्रत करने वाले को पूरे दिन मौन व्रत का पालन करना होता इसलिए यह योग पर आधारित व्रत कहलाता है।

मौनी अमावस्या पर मौन रखकर स्नान-दान करना चाहिए। ज्येातिषविद् विमल जैन के अनुसार चावल, दूध, मिश्री, चीनी, खोवे से बने सफेद मिष्ठान, सफेद वस्त्र, चांदी एवं अन्य सफेद रंग की वस्तुएं दक्षिणा के रूप में देना चाहिए। यदि ब्राह्मण को भोजन न करवा सकें तो उन्हें भोजन सामग्री के साथ नकद द्रव्य देकर पुण्यलाभ प्राप्त करना चाहिए।

चार हैं अमृत स्नान
मकर संक्रांति के बाद अभी चार अमृत स्नान बचे हें। मौनी अमावस्या, तीन फरवरी को बसंत पंचमी, 12 फरवरी माघी पूर्णिमा एवं 26 फरवरी को महाशिवरात्रि का अमृत स्नान होगा।

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