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Gyanvapi Case: मसाजिद कमेटी बोली, ज्ञानवापी से बेदखल करना चाहता है हिंदू पक्ष; अब 19 मार्च होगी सुनवाई

Thu, 29 Feb 2024 05:12 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 29 Feb 2024 05:12 PM IST
सार

Gyanvapi Case: मसाजिद कमेटी ने प्रभारी जिला जज अनिल कुमार पंचम की अदालत में आपत्ति दाखिल की है। कमेटी ने आपत्ति में कहा कि राखी सिंह के प्रार्थना पत्र को स्वीकार किया गया तो हमारे धार्मिक क्रियाकलाप प्रभावित होंगे। नमाज पर रोक अथवा अवरोध उत्पन्न होगा। 

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Masajid Committee said Hindu side wants evict from Gyanvapi
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी परिसर के बंद तहखानों (तलगृह) के एएसआई से वैज्ञानिक सर्वे की मांग के मामले में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने आपत्ति दाखिल की है। मसाजिद कमेटी ने अदालत में कहा कि हिंदू पक्ष हमें बेदखल करना चाहता है । यही कारण है कि एक के बाद एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया जा रहा है। दावे झूठे और कपोल कल्पित हैं। इस मामले की सुनवाई 19 मार्च को होगी।

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शृंगार गौरी के नियमित दर्शन मामले का वाद राखी सिंह ने दाखिल किया है। उन्होंने जिला जज की अदालत में आवेदन देकर कहा है कि ज्ञानवापी परिसर से बैरिकेडिंग हटाई जाए। उन्होंने सिविल प्रक्रिया संहिता के आर्डर 39, नियम-1 व 2 का हवाला देकर मांग की है कि प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी व पुलिस आयुक्त को बैरिकेडिंग हटाकर पूजा की व्यवस्था का तत्काल आदेश दिया जाए। 
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उनका कहना है कि वर्ष 1993 में जिला प्रशासन द्वारा बिना न्यायिक व प्रशासनिक आदेश के बैरिकेडिंग लगाकर पूजा से रोक दिया गया था। हालांकि वासंतिक नवरात्र के चौथे दिन हर वर्ष पूजा की अनुमति दी जाती रही है। मगर, इससे मां शृंगार गौरी, गणेश जी, नंदी जी और हनुमानजी के नियमित दर्शन नहीं हो पा रहे हैं।
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दृश्य अदृश्य देवी-देवताओं के दर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए। सभी बंद तहखानों के दरवाजों के अवरोध हटाए जाएं। मलबा साफ कराकर जीपीआर व अन्य आधुनिक तकनीक से एएसआई से सर्वे कराया जाए।

मसाजिद कमेटी ने दाखिल की है आपत्ति

इसी मामले में मसाजिद कमेटी ने प्रभारी जिला जज अनिल कुमार पंचम की अदालत में आपत्ति दाखिल की है। कमेटी ने आपत्ति में कहा कि राखी सिंह के प्रार्थना पत्र को स्वीकार किया गया तो हमारे धार्मिक क्रियाकलाप प्रभावित होंगे। नमाज पर रोक अथवा अवरोध उत्पन्न होगा। यह सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले की अवहेलना होगी, जिसके तहत हमें नमाज पढ़ने के लिए सुरक्षा प्रदान की गई है। 

जिला जज की अदालत ने एक तहखाने में पूजा की अनुमति दी है। जिला प्रशासन ने रात में ही पूजा की व्यवस्था कर दी, ताकि मस्जिद पक्ष को अपील से रोका जा सके। हाल ही में एएसआई सर्वे में सारी बातों का जिक्र है। लिहाजा, जीपीआर तकनीक से बंद तहखानों के सर्वे की मांग जायज नहीं है। आवेदन खारिज किए जाने योग्य है।

ज्ञानवापी परिसर के कोर्ट अमीन से सर्वे की मांग
ज्ञानवापी से जुड़े भगवान अविमुक्तेश्वर विराजमान बनाम अंजुमन इंतजमिया मसाजिद के मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में सुनवाई हुई। यह वाद हिन्दू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता और खजुरी निवासी अजीत कुमार सिंह की तरफ से दाखिल कर दर्शन पूजन की मांग की गई हैं। 

अधिवक्ता मंगला प्रसाद पाठक व अभिषेक पाठक ने इस मामले में विपक्षियों का अवसर समाप्त किए जाने हेतु तथ्य प्रस्तुत किया। साथ ही परिसर का कोर्ट अमीन से सर्वें कराने की मांग की। अंजुमन इंतेजामिया की तरफ से स्थगन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर बुधवार की कार्यवाही स्थगित करने की याचना की गई। जिस पर न्यायालय ने सुनवाई की अगली तारीख 11 मार्च नियत कर दी।
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