{"_id":"59a9b81a4f1c1b41738b4c18","slug":"mahendra-nath-pandey-will-lead-municipal-elections","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने कई चुनौतियां, अभी नजर इस पर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने कई चुनौतियां, अभी नजर इस पर
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sat, 02 Sep 2017 02:26 PM IST
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महेंद्र नाथ पांडे
- फोटो : SELF
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राजनीति के नए केंद्र बिंदु पूर्वांचल में भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के सामने कई चुनौतियां हैं। निकाय चुनाव इसमें सबसे अहम हैं। इस चुनाव के नतीजे आने वाले लोकसभा चुनाव की नींव रखेंगे।
2012 में प्रदेश के 13 नगर निगमों में से 12 पर निकाय चुनाव हुआ था। इनमें से 11 स्थानों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। परिसीमन नहीं होने के कारण सहारनपुर में चुनाव नहीं हो सका था।
बरेली को छोड़कर मुरादाबाद, झांसी, अलीगढ़, इलाहाबाद, कानपुर, आगरा, बनारस और लखनऊ में भाजपा के मेयर हैं। इसके अलावा कोऑपरेटिव सोसाइटी के भी चुनाव होने हैं। सहकारिता में समाजवादी पार्टी ने गहरे तक जड़े जमा रखी हैं। ऐसे में दोनों ही चुनाव जीतने की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी डॉ. पांडेय की होगी।
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पूर्वांचल की नब्ज समझने वाले डॉ. पांडेय छात्र जीवन से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं। संगठन ने जो भी जिम्मेदारी दी, उसे निभाया। काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में 15 जिलों के 75 विधानसभाओं के बारे में भी वह बखूबी जानते हैं। पूर्वांचल के 23 लोकसभा और 126 विधानसभा सीटों के बारे में भी उनके अनुभव हैं।
भाजपा में अब तक पूर्वांचल में ब्राह्मणों के नेता के रूप में कलराज मिश्र, केशरी नाथ त्रिपाठी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी को ही जाना जाता था। ऊर्जावान नेताओं को आगे करने की नीयत से ही डॉ. पांडेय को प्रदेश की कमान सौंपी गई है। शुक्रवार को दिल्ली में डॉ. पांडेय से मुलाकात करने के लिए उनके संसदीय क्षेत्र चंदौली से कई लोग गए हैं।
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2012 में प्रदेश के 13 नगर निगमों में से 12 पर निकाय चुनाव हुआ था। इनमें से 11 स्थानों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। परिसीमन नहीं होने के कारण सहारनपुर में चुनाव नहीं हो सका था।
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बरेली को छोड़कर मुरादाबाद, झांसी, अलीगढ़, इलाहाबाद, कानपुर, आगरा, बनारस और लखनऊ में भाजपा के मेयर हैं। इसके अलावा कोऑपरेटिव सोसाइटी के भी चुनाव होने हैं। सहकारिता में समाजवादी पार्टी ने गहरे तक जड़े जमा रखी हैं। ऐसे में दोनों ही चुनाव जीतने की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी डॉ. पांडेय की होगी।
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पूर्वांचल की नब्ज समझने वाले डॉ. पांडेय छात्र जीवन से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं। संगठन ने जो भी जिम्मेदारी दी, उसे निभाया। काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में 15 जिलों के 75 विधानसभाओं के बारे में भी वह बखूबी जानते हैं। पूर्वांचल के 23 लोकसभा और 126 विधानसभा सीटों के बारे में भी उनके अनुभव हैं।
भाजपा में अब तक पूर्वांचल में ब्राह्मणों के नेता के रूप में कलराज मिश्र, केशरी नाथ त्रिपाठी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी को ही जाना जाता था। ऊर्जावान नेताओं को आगे करने की नीयत से ही डॉ. पांडेय को प्रदेश की कमान सौंपी गई है। शुक्रवार को दिल्ली में डॉ. पांडेय से मुलाकात करने के लिए उनके संसदीय क्षेत्र चंदौली से कई लोग गए हैं।
भाजपा में अब नए सिरे से होगी बूथ संरचना
bjp
नए प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय की नियुक्ति के बाद बूथों की संरचना का संयोजन नए सिरे से किया जाएगा। दरअसल, विधानसभा चुनाव में बूथों की जो संरचना रही है, निकाय चुनाव में इससे इतर किया जाना है। बूथों की नई संरचना मोहल्लों की मूलभूत जरूरतों पर केंद्रित होगी।
विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत और प्रदेश में सरकार बनने के बाद पहला निकाय चुनाव होगा। संगठन की दृष्टि से काशी क्षेत्र के 15 जिले के 25713 बूथ मजबूत करने में जुटी है। बूथ संरचना के आधार पर सदस्यों को मोहल्लों की जिम्मेदारी दी जाएगी।
इसी आधार पर टिकट भी दिया जाएगा। वार्ड के बूथों की निगरानी करने के लिए अलग टीम होगी। यह मंडल के अलावा विधानसभावार भी होगी। इसकी निगरानी करने के लिए आईटी सेल को एक्टिवेट किया जा रहा है। तय किया गया है कि बूथ स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों को सोशल नेटवर्किंग साइट पर नियमित रूप से डाला जाएगा।
इसकी निगरानी प्रदेश स्तर से भी की जाएगी। अगले लोकसभा की रणनीति का आधार इसके बाद ही बनाया जाएगा। इसके पीछे मकसद यह भी है कि निकाय चुनाव की कमियों को लोकसभा चुनाव के पहले दुरुस्त कर लिया जाए।
इन्हीं बूथों को मजबूत करने का जोर नए प्रदेश अध्यक्ष का भी होगा। तीन सितंबर को डॉ. पांडेय वाराणसी आएंगे पार्टी पदाधिकारियों संग बैठक में इन्हीं बिंदुओं पर चर्चा करेंगे।
माना जा रहा है कि बूथ संरचना पर इस दौरान कुछ अहम फैसले लिए जा सकते हैं। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा है कि संगठन की दृष्टि से पार्टी बूथ को मजबूत कर रही है। इसे और तेज किया जाएगा। नए-पुराने साथियों के बीच सामंजस्य बैठाकर पार्टी को नई ऊंचाई देनी है।
विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत और प्रदेश में सरकार बनने के बाद पहला निकाय चुनाव होगा। संगठन की दृष्टि से काशी क्षेत्र के 15 जिले के 25713 बूथ मजबूत करने में जुटी है। बूथ संरचना के आधार पर सदस्यों को मोहल्लों की जिम्मेदारी दी जाएगी।
इसी आधार पर टिकट भी दिया जाएगा। वार्ड के बूथों की निगरानी करने के लिए अलग टीम होगी। यह मंडल के अलावा विधानसभावार भी होगी। इसकी निगरानी करने के लिए आईटी सेल को एक्टिवेट किया जा रहा है। तय किया गया है कि बूथ स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों को सोशल नेटवर्किंग साइट पर नियमित रूप से डाला जाएगा।
इसकी निगरानी प्रदेश स्तर से भी की जाएगी। अगले लोकसभा की रणनीति का आधार इसके बाद ही बनाया जाएगा। इसके पीछे मकसद यह भी है कि निकाय चुनाव की कमियों को लोकसभा चुनाव के पहले दुरुस्त कर लिया जाए।
इन्हीं बूथों को मजबूत करने का जोर नए प्रदेश अध्यक्ष का भी होगा। तीन सितंबर को डॉ. पांडेय वाराणसी आएंगे पार्टी पदाधिकारियों संग बैठक में इन्हीं बिंदुओं पर चर्चा करेंगे।
माना जा रहा है कि बूथ संरचना पर इस दौरान कुछ अहम फैसले लिए जा सकते हैं। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा है कि संगठन की दृष्टि से पार्टी बूथ को मजबूत कर रही है। इसे और तेज किया जाएगा। नए-पुराने साथियों के बीच सामंजस्य बैठाकर पार्टी को नई ऊंचाई देनी है।