तेज बहादुर ने नामांकन रद्द करने को बताया तानाशाही, बोले- इस ज्यादती के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से सपा प्रत्याशी के तौर पर नामांकन करने वाले बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव के लोकसभा चुनाव लड़ने के सपने पर पानी फिर गया है। निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर का नामांकन पत्र रद्द कर दिया है।
कलेक्ट्रेट ऑफिस से बाहर आए तेज बहादुर ने पत्रकारों से बातचीत की। तेज बहादुर ने कहा कि मेरा नामांकन गलत तरीके से खारिज किया गया है। वो अपने साथ हुई इस ज्यादती के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
उन्होंने कहा कि नामांकन रद्द करने के लिए सरकार के तरफ से डीएम पर दबाव बनाया गया है। 11 बजे तक मैं अपना स्पष्टीकरण जमा करने गया और मेरा नामांकन यह कह कर रद्द कर दिया कि मैंने 11 बजे तक अपने साक्ष्य जमा नहीं किए। ये बिल्कुल तानाशाही रवैया है।
बता दें कि तेज बहादुर को प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में उन्हें जवाब देने का समय 1 मई 2109 दिया गया है। जो कि आज से 90 साल बाद की तारीख है। इस बात पर तेज बहादुर ने कहा कि तारीख लिखने में हुई गड़बड़ी से समझा जा सकता है कि सत्ताधारी सरकार की तरफ से डीएम पर मेरा नामांकन रद्द करने के लिए कितना दबाव बनाया गया है।
तेज बहादुर के वकील राजेश गुप्ता ने कहा कि हमने प्रशासन द्वारा मांगे गए सभी साक्ष्यों को जमा कर दिया। बावजूद इसके तेज बहादुर का नामांकन खारिज कर दिया गया। अपने हक के लिए हम सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
समर्थकों ने किया धरना प्रदर्शन
समर्थकों ने इस दौरान डीएम पोर्टिको को घेर लिया। तेज बहादुर के समर्थकों की मांग थी कि तेज बहादुर का नामांकन रद्द न किया जाए। इस दौरान तेज बहादुर के समर्थकों ने सेना की वर्दी और तिरंगा लेकर जमकर नारेबाजी की।
समर्थकों ने आरोप लगाया कि साजिश के तहत तेज बहादुर का पर्चा रद्द किया जा रहा है। ये षड्यंत्र भाजपा सरकार और निर्वाचन अधिकारियों ने रचा है। इस मौके पर रिटायर्ड फौजी पंकज मिश्रा ने चेतवानी दी कि तेज बहादुर का पर्चा रद्द होने पर वे अनवरत धरना देंगे और उनके साथ देश भर से सेना के जवान वाराणसी आएंगे।
इस नोकझोंक के दौरान एक भी सपा नेता और कार्यकर्ता नहीं दिखा। मौके पर पहुंचे एडीएम सिटी और एसपी सिटी ने धरना खत्म कराया और नामांकन स्थल से प्रदर्शनकारियों को 100 मीटर दूर कर दिया। इस दौरान कुछ समर्थक जमीन पर लेट कर प्रदर्शन करने लगे।