अतीक अहमद की एंट्री से बिगड़ा समीकरण, विपक्षी पार्टियों के माथे पर खिंची चिंता की लकीरें
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बाहुबली नेता अतीक अहमद के वाराणसी से मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने से विपक्षी पार्टियों का समीकरण बिगड़ गया है। जानकारों की मानें तो अतीक के चलते मुस्लिम मतों का बिखराव होगा। यदि ऐसा हुआ तो इसका फायदा भाजपा और नुकसान विपक्षी पार्टियों को उठाना पड़ेगा।
2014 के चुनाव में आप को 2लाख 9 हजार 238 मत मिले थे। इनमें मुस्लिम मतदाता भी शामिल हैं। इसी वोट को पाने के लिए सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस प्रयास कर रही है। अब अतीक भी इन वोटों में सेंधमारी करेंगे। यदि ऐसा होता है तो इसका फायदा भाजपा को होना तय है। ऐसी स्थिति में सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस प्रत्याशियों को इन वोटों को बचाने की जुगत लगानी पड़ेगी।
दरअसल, 2009 के लोकसभा चुनाव में मुरली मनोहर जोशी भाजपा प्रत्याशी थे। उस दौरान मुख्तार अंसारी बसपा के प्रत्याशी थे। वह चुनाव हिंदू बनाम मुस्लिम हो गया था। उस दौरान भाजपा प्रत्याशी करीब 17 हजार वोटों से जीते थे।
2014 में मुस्लिम मतों के बिखराव को रोकने के लिए मुख्तार अंसारी चुनाव नहीं लड़े थे। इस बार अतीक के चुनाव लड़ने से मुस्लिम मतों का बिखराव होना तय है। जो मुस्लिम वोट गठबंधन और कांग्रेस को जाता, वह अब अतीक की ओर शिफ्ट हो सकता है।