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काबा के मॉडल का तवाफ कर सीखेेंगे अरकान
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 26 Jun 2016 01:30 AM IST
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मुकद्दस हज यात्रा पर जाने वाले जाइरीन के लिए खुशखबरी है। अभी तक उन्हें प्रोजेक्टर के माध्यम से हज के अरकानों की जानकारी दी जाती थी। लेकिन अब उन्हें इसका प्रैक्टिकल भी कराया जाएगा। इसके लिए खाना-ए-काबा का मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिसका तवाफ (परिक्रमा) कर लोग हज के अरकान सीख सकेंगे।
सामाजिक संस्था इस्लामिक फाउंडेशन ऑफ इंडिया ईद बाद लगाए जाने वाले हज प्रशिक्षण शिविर में इसकी शुरुआत करेगी। पूर्वांचल में इस तरह की ट्रेनिंग पहली बार दी जाएगी। अगले साल से इसे आसपास के जिलों में भी शुरू किया जाएगा।
हज यात्रा के अरकानों में खाना-ए-काबा का तवाफ एक अहम अरकान है। इसे किस तरह किया जाएगा इसे काबा के मॉडल के जरिए कर के दिखाया जाएगा। संस्था द्वारा तैयार कराए जा रहे खाना-ए-काबा के मॉडल से प्रशिक्षण केदौरान जाइरीन को इसकी परिक्रमा कराई जाएगी। ताकि वह हज के दौरान इस प्रक्रिया को सही तरीके से कर सके।
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इसके अलावा शैतान को कंकरी मारना, सफा-मरवा की दौड़ लगाना और वहां पर इबादत के तौर तरीकों को दर्शाती एक सीडी भी यात्रियों को दिखाई जाएगी, जिसे प्रशिक्षण केबाद जाइरीन को ही दे दिया जाएगा। ताकि जाने से पहले वह इसे देखकर अच्छी तरह से तैयारी कर सकें।
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष और हज ट्रेनर शेख मुहम्मद खुर्शीद बताते हैं कि चूंकि वाराणसी इंबारकेशन (हवाई क्षेत्र) से पूर्वांचल के16 जिलों से हजारों जायरीन हर साल मुकद्दस हज यात्रा पर रवाना होते हैं। ऐसे में उन्हें भी इस प्रशिक्षण से जोड़ने की कवायद की जाएगी। फिलहाल अभी इसकी शुरुआत वाराणसी से की जा रही है। अगले साल इसे चंदौली, भदोही, जौनपुर, मिर्जापुर और गाजीपुर में भी शुरू कराने की योजना है। हर जिलों में मॉडल तैयार करा कर रखा जाएगा।
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सामाजिक संस्था इस्लामिक फाउंडेशन ऑफ इंडिया ईद बाद लगाए जाने वाले हज प्रशिक्षण शिविर में इसकी शुरुआत करेगी। पूर्वांचल में इस तरह की ट्रेनिंग पहली बार दी जाएगी। अगले साल से इसे आसपास के जिलों में भी शुरू किया जाएगा।
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हज यात्रा के अरकानों में खाना-ए-काबा का तवाफ एक अहम अरकान है। इसे किस तरह किया जाएगा इसे काबा के मॉडल के जरिए कर के दिखाया जाएगा। संस्था द्वारा तैयार कराए जा रहे खाना-ए-काबा के मॉडल से प्रशिक्षण केदौरान जाइरीन को इसकी परिक्रमा कराई जाएगी। ताकि वह हज के दौरान इस प्रक्रिया को सही तरीके से कर सके।
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इसके अलावा शैतान को कंकरी मारना, सफा-मरवा की दौड़ लगाना और वहां पर इबादत के तौर तरीकों को दर्शाती एक सीडी भी यात्रियों को दिखाई जाएगी, जिसे प्रशिक्षण केबाद जाइरीन को ही दे दिया जाएगा। ताकि जाने से पहले वह इसे देखकर अच्छी तरह से तैयारी कर सकें।
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष और हज ट्रेनर शेख मुहम्मद खुर्शीद बताते हैं कि चूंकि वाराणसी इंबारकेशन (हवाई क्षेत्र) से पूर्वांचल के16 जिलों से हजारों जायरीन हर साल मुकद्दस हज यात्रा पर रवाना होते हैं। ऐसे में उन्हें भी इस प्रशिक्षण से जोड़ने की कवायद की जाएगी। फिलहाल अभी इसकी शुरुआत वाराणसी से की जा रही है। अगले साल इसे चंदौली, भदोही, जौनपुर, मिर्जापुर और गाजीपुर में भी शुरू कराने की योजना है। हर जिलों में मॉडल तैयार करा कर रखा जाएगा।