सुर, लय, ताल के संगम के बीच गंगा महोत्सव की आखिरी निशा ने लिया विराम
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मौका था गंगा महोत्सव की आखिरी निशा में देश के जाने माने संतूर वादक पं. भजन सोपोरी और उनके पुत्र अभय रुस्तम सोपोरी की संतूर पर जुगलबंदी का। पिता-पुत्र की जोड़ी ने घरानेदारी के साथ छोटे-छोटे छंद बजाकर स्वरों के समन्वय का अनूठा प्रयोग भी किया।
तालियों की बौछार गूंजी और हर हर महादेव के जयघोष भी। इनसे पहले संजीव अभयंकर ने रागों-बंदिशों से वातावरण में मिठास घोली तो कथक क्वीन सितारा देवी के पौत्र विशाल कृष्ण ने बनारस घराने की बंदिशों पर कथक नृत्य की थिरकन से संगीत महोत्सव को ऊंचाई प्रदान की।
इसी के साथ सुर, लय, ताल के संगम तट पर गंगा महोत्सव की आखिरी निशा ने विराम ले लिया। राजेंद्र प्रसाद घाट पर बने मुक्ताकाशीय मंच पर दीप प्रज्ज्वलन के बाद पं. संजीव अभयंकर ने राग शंकरा की अवतारणा की। विलंबित एक ताल की रचना के बाद तीन ताल में द्रुत लय की बंदिश पर उन्होंने आलापचारी की।
बंदिश के बोल थे- शंकर भंडार खोले/मस्तक चंद्र सोहे...। इसके बाद उन्होंने एक भजन की प्रस्तुति से विदा ली। तबले पर पं. विनोद लेले, हारमोनियम पर विजय मिश्र ने संगत की। इनके बाद बारी आई पं. भजन सोपोरी और उनके पुत्र अभय रुस्तम सोपोरी की।
इस जोड़ी ने संतूर पर राग कौशिक निरंजनी की अवतारणा की। जुगलबंदी में आलाप, जोड़, झाला के बाद इन्होंने छोटे-छोटे छंद बजाए। पुरानी बंदिशों पर गतकारी से संगीत निशा को चरमोत्कर्ष पर पहुंचाया।
इनके साथ तबले पर पं. मिथिलेश झा, पखावज पर ऋषि शेखर, घटम पर वरुण राज शेखर ने बेजोड़ संगत की। अंत में विशाल कृष्ण ने मंच संभाला। शुरुआत इन्होंने गंगा अवतरण से की। बंदिश के बोल थे- मातु सुरेश्वरि भगवति गंगे...।
इसक पर पारंपरिक शैली में तीन ताल में उठान से उन्होंने नृत्य आरंभ किया। आमद, तोड़ी, परन, टुकड़े के बाद चक्करदार की प्रस्तुति से उन्होंने जमकर तालियां बटोरीं। सितारा देवी के मयूर नृत्य और थाली नृत्य की भी प्रस्तुति कर उन्होंने संगीत प्रेमियों का दिल जीता।
फिर ठुमरी साम्राज्ञी पद्मविभूषण गिरिजा देवी को उन्होंने दादरा की बंदिश- दीवाना किए श्याम... पर थिरकन से नमन किया। नृत्य में इनका साथ दिया श्रेयाना कृष्ण और संस्कृति शर्मा ने। तबले पर कुशाल कृष्ण, सरोद पर अंशुमान महाराज, बांसुरी पर शनिश ज्ञावली ने संगत की। गायन में साथ दिया दिव्यांशु श्रीवास्तव ने।
गंगा भारतीय संस्कृति की प्रतीक
कहा कि गंगा जितनी निर्मल और स्वच्छ रहेगी उतना ही हमारा समाज निर्मल और साफ होगा। गंगा देश की प्रधान नाड़ी है। इसे निर्मल रखने के लिए हर किसी को योगदान देना चाहिए।
सोपोरी ने यह बातें गंगा महोत्सव में प्रस्तुति के बाद पत्रकारों से बातचीत में कही। गंगा महोत्सव की आखिरी निशा में संतूर वादक पं. भजन सोपोरी ने गिरिजा देवी को देश की अमर ठुमरी गायिका बताया।
कहा कि उन्हें ख्याल और तराना, टप्पा में भी महारत हासिल था। लोक और शास्त्र दोनों में रचे संगीत के साहित्य और शैली दोनों को सुरों से अमर कर दिया। इसी वजह से वह देश के संगीत जगत में अमर हो गईं। उनको बनारस की शैली का गहरा ज्ञान तो था ही, साधना भी बहुत बड़ी थी।