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बंद होगा खिड़किया नाला, गंगा में नहीं गिरेगा मलजल
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शाही नाले पर से सीवर के दबाव को कम करने के लिए सीवर लाइन बिछाने का कार्य पूरा कर लिया गया है। इससे शहरवासियों को सीवर समस्या से निजात मिलेगी और खिड़किया घाट पर नाले से मलजल का गिरना बंद हो जाएगा।
कबीरचौरा स्थित शाही नाले की सफाई का काम पूरो होने के कारण कबीर मठ तिराहे से लेकर मंडलीय अस्पताल तक जाने वाली सड़क के एक तरफ के बंद मार्ग को भी रविवार को खोल दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, अब शाही नाले पर सीवर के अतिरिक्त दबाव को कम करने के लिए चौका घाट पंपिंग स्टेशन के जरिए ट्रीटमेंट के लिए एसटीपी दीनापुर भेजा जाएगा। दीनापुर में 80 एमएलडी और 120 एमएलडी के दो एसटीपी काम कर रहे हैं। शाही नाले पर आबादी बढ़ने से सीवर ओवरलोड है। इसकी क्षमता 80 एमएलडी मलजल फ्लो की है, लेकिन वर्तमान में करीब 120 एमएलडी मलजल फ्लो हो रहा है। इसलिए 40 एमएलडी मलजल फ्लो को कबीरचौरा से डायवर्ट कर चौकाघाट भेजने की तैयारी है। यहां पंपिंग स्टेशन से मलजल को दीनापुर में बने 140 एमएलडी शोधन क्षमता की नई एसटीपी तक भेजा जाएगा।
तीन भाग में बांटकर कराया गया काम
शाही नाले का काम तीन भागों में बांटकर कराया गया। पहले भाग में लहुराबीर चौराहे से कबीर मठ तिराहे की ओर करीब 125 मीटर लंबाई में काम हुआ। इसके बाद दूसरे भाग में कबीर मठ तिराहे तक करीब 600 मीटर और तीसरे भाग में कबीर मठ तिराहे से शाही नाले (कबीरचौरा अस्पताल) तक करीब 220 मीटर सीवर पाइप डालने का काम कराया गया है। शाही नाले पर जहां एक ओर जल निगम नाले की सफाई का काम करा रहा है, वहीं दूसरी ओर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई शाही नाले को नई सीवर लाइन से जोड़ने का काम कराया है।
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छित्तनपुरा में मिला एक और मैनहोल
शाही नाले के जीर्णोद्धार का कार्य जल निगम ग्रामीण की ओर से कराया जा रहा है। परियोजना प्रबंधक संजय बर्मन ने बताया कि शाही नाला जीर्णोद्धार के दौरान छित्तनपुरा में एक घर के अंदर शाही नाले का मैनहोल मिल गया है। जिसकी सफाई करने की तैयारी है।
शाही नाले से जोड़ने का काम पूरा हो चुका है, इससे शाही नाले पर सीवर का अतिरिक्त दबाव कम होगा और गंगा में सीवर नहीं जाएगा। - एसके रंजन, परियोजना प्रबंधक, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इर्काई।
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कबीरचौरा स्थित शाही नाले की सफाई का काम पूरो होने के कारण कबीर मठ तिराहे से लेकर मंडलीय अस्पताल तक जाने वाली सड़क के एक तरफ के बंद मार्ग को भी रविवार को खोल दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, अब शाही नाले पर सीवर के अतिरिक्त दबाव को कम करने के लिए चौका घाट पंपिंग स्टेशन के जरिए ट्रीटमेंट के लिए एसटीपी दीनापुर भेजा जाएगा। दीनापुर में 80 एमएलडी और 120 एमएलडी के दो एसटीपी काम कर रहे हैं। शाही नाले पर आबादी बढ़ने से सीवर ओवरलोड है। इसकी क्षमता 80 एमएलडी मलजल फ्लो की है, लेकिन वर्तमान में करीब 120 एमएलडी मलजल फ्लो हो रहा है। इसलिए 40 एमएलडी मलजल फ्लो को कबीरचौरा से डायवर्ट कर चौकाघाट भेजने की तैयारी है। यहां पंपिंग स्टेशन से मलजल को दीनापुर में बने 140 एमएलडी शोधन क्षमता की नई एसटीपी तक भेजा जाएगा।
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तीन भाग में बांटकर कराया गया काम
शाही नाले का काम तीन भागों में बांटकर कराया गया। पहले भाग में लहुराबीर चौराहे से कबीर मठ तिराहे की ओर करीब 125 मीटर लंबाई में काम हुआ। इसके बाद दूसरे भाग में कबीर मठ तिराहे तक करीब 600 मीटर और तीसरे भाग में कबीर मठ तिराहे से शाही नाले (कबीरचौरा अस्पताल) तक करीब 220 मीटर सीवर पाइप डालने का काम कराया गया है। शाही नाले पर जहां एक ओर जल निगम नाले की सफाई का काम करा रहा है, वहीं दूसरी ओर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई शाही नाले को नई सीवर लाइन से जोड़ने का काम कराया है।
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छित्तनपुरा में मिला एक और मैनहोल
शाही नाले के जीर्णोद्धार का कार्य जल निगम ग्रामीण की ओर से कराया जा रहा है। परियोजना प्रबंधक संजय बर्मन ने बताया कि शाही नाला जीर्णोद्धार के दौरान छित्तनपुरा में एक घर के अंदर शाही नाले का मैनहोल मिल गया है। जिसकी सफाई करने की तैयारी है।
शाही नाले से जोड़ने का काम पूरा हो चुका है, इससे शाही नाले पर सीवर का अतिरिक्त दबाव कम होगा और गंगा में सीवर नहीं जाएगा। - एसके रंजन, परियोजना प्रबंधक, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इर्काई।