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पूर्वाग्रह से दूर रहने वाले कवि है केदारनाथ सिंह
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वाराणसी। बीएचयू कला संकाय में केदारनाथ सिंह की स्मृति में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कवियों, साहित्यकारों ने केदारनाथ सिंह के कविता को लेकर किए गए संघर्षों की चर्चा की। समापन समारोह में वरिष्ठ आलोचक हरीश त्रिवेदी ने कहा कि केदारनाथ सिंह विचारधारा के पूर्वाग्रह से दूर रहने वाले कवि है। उनके लोक को शहर और गांव में नहीं बल्कि परलोक के विपरीत लोक में देखने की जरूरत है।
राधाकृष्णन सभागार में कवि ज्ञानेंद्रपति ने कहा कि जनपद से केदार का रिश्ता प्राणात्मक यानी आत्मिक है। प्रो. अवधेश प्रधान और मुख्य वक्ता जेएन यूं में हिंदी के अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि केदार जी की कविता में बड़बोलापन और शोर नहीं बल्कि धीमेपन की मद्धिम लय है। इस दौरान युवा कवि पंकज चतुर्वेदी,अनुज, बसंत त्रिपाठी के साथ ही मनोज कुमार सिंह ने केदारनाथ की कविताओं की चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रद्धा सिंह और धन्यवाद ज्ञापन संयोजक प्रो. सदानंद शाहीने किया। इस दौरान डॉ. राम सुधार सिंह ,प्रकाश उदय, सुरेंद्र प्रताप, अनिल त्रिपाठी, डॉ. चंपा सिंह, भानुप्रताप आदि मौजूद रहे।
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राधाकृष्णन सभागार में कवि ज्ञानेंद्रपति ने कहा कि जनपद से केदार का रिश्ता प्राणात्मक यानी आत्मिक है। प्रो. अवधेश प्रधान और मुख्य वक्ता जेएन यूं में हिंदी के अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि केदार जी की कविता में बड़बोलापन और शोर नहीं बल्कि धीमेपन की मद्धिम लय है। इस दौरान युवा कवि पंकज चतुर्वेदी,अनुज, बसंत त्रिपाठी के साथ ही मनोज कुमार सिंह ने केदारनाथ की कविताओं की चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रद्धा सिंह और धन्यवाद ज्ञापन संयोजक प्रो. सदानंद शाहीने किया। इस दौरान डॉ. राम सुधार सिंह ,प्रकाश उदय, सुरेंद्र प्रताप, अनिल त्रिपाठी, डॉ. चंपा सिंह, भानुप्रताप आदि मौजूद रहे।
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