Guru Purnima: गुरु पूर्णिमा पर कथक साधकों ने गुरु परंपरा को किया नमन, शिष्यों ने चरण स्पर्श कर लिया आशीर्वाद
Varanasi News: गुरु पूर्णिमा पर वाराणसी के कथक कलाकारों और उनके शिष्यों ने गुरु-शिष्य परंपरा का भावपूर्ण निर्वहन किया। सरला नारायण सिंह, डॉ. अमृता मोहन, संगीता सिन्हा, वसुंधरा शर्मा, आशीष सिंह और नम्रता श्रीमाली ने अपने गुरुओं को नमन किया। शिष्यों ने चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और कथक परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
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गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर काशी में कथक कलाकारों और उनके शिष्यों ने गुरु-शिष्य परंपरा का भावपूर्ण निर्वहन किया। विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में शिष्यों ने अपने गुरुओं का पूजन कर चरण स्पर्श किया और कथक की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस दौरान कथक कलाकारों ने अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु केवल कला नहीं सिखाते, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी देते हैं।
प्रख्यात कथक नृत्यांगना सरला नारायण सिंह ने अपने गुरु चंद्रशेखर मिश्रा को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि वे महान कथक गुरु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के जीवंत प्रतीक हैं। उनसे मिली सीख आज भी हर प्रस्तुति में हमारा मार्गदर्शन करती है। गुरु का स्थान जीवन में सर्वोच्च होता है और उनकी दी हुई शिक्षा कभी समाप्त नहीं होगी।
कथक नृत्यांगना डॉ. अमृता मोहन ने भी अपने गुरु को याद करते हुए कहा कि गुरु की शिक्षा केवल मंच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि व्यक्तित्व का निर्माण करती है। गुरु का आशीर्वाद ही कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी है और उसी के सहारे साधना आगे बढ़ती है।
कथक नृत्यांगना वसुंधरा शर्मा के शिष्यों ने गुरु पूर्णिमा पर उनका पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर वसुंधरा शर्मा ने कहा कि जब शिष्य पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ गुरु का सम्मान करते हैं, तभी कला की परंपरा जीवित रहती है। गुरु-शिष्य का रिश्ता विश्वास, अनुशासन और निरंतर अभ्यास पर आधारित होता है।
वरिष्ठ कथक कलाकार संगीता सिन्हा ने अपने गुरु स्वर्गीय पंडित बिरजू महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गुरु ने हमें केवल नृत्य नहीं सिखाया, बल्कि भारतीय संस्कृति, विनम्रता और अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया। आज उनकी शिक्षाएं हजारों कलाकारों के माध्यम से आगे बढ़ रही हैं।
इस अवसर पर उनकी पुत्री एवं शिष्या उर्वशी श्रीवास्तव ने मां संगीता सिन्हा के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। उर्वशी ने कहा कि मेरे लिए मां ही मेरी पहली गुरु हैं। उनसे मिली शिक्षा और संस्कार ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं। गुरु का आशीर्वाद हर कलाकार को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास देता है।
युवा कथक कलाकार आशीष सिंह उर्फ नृत्य मंजरी दास के शिष्यों ने भी गुरु पूजा कर उनका सम्मान किया। आशीष सिंह ने कहा कि कथक केवल नृत्य नहीं, बल्कि साधना है। गुरु से मिली परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। जब शिष्य समर्पण के साथ सीखते हैं तो गुरु का जीवन सफल हो जाता है।
युवा कथक नृत्यांगना नम्रता श्रीमाली ने कहा कि गुरु के बिना जीवन अंधकारमय हो जाता है। गुरु ही ज्ञान का प्रकाश हैं, जो हमें सही दिशा दिखाते हैं। कला में सफलता तभी मिलती है, जब गुरु के प्रति श्रद्धा, अनुशासन और निरंतर अभ्यास बना रहे।
गुरु पूर्णिमा पर आयोजित इन कार्यक्रमों में कलाकारों और शिष्यों ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत बनाए रखने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों की अनूठी छटा देखने को मिली। कलाकारों ने कहा कि बदलते समय में भी कथक जैसी शास्त्रीय विधाओं की आत्मा गुरु-शिष्य परंपरा में ही बसती है और यही परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय संस्कृति की विरासत को सुरक्षित पहुंचाएगी।