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मां अन्नपूर्णा का सजा दरबार
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 19 Nov 2016 02:03 AM IST
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मां अन्नपूर्णा
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अन्न-धन, सुख-समृद्धि की कामना से काशीपुरी में विराजमान माता अन्नपूर्णा का व्रत शनिवार से आरंभ होगा। इसके लिए घरों से लेकर मंदिर तक व्यापक तैयारियां की गई हैं। शुक्रवार को मां के दरबार को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया। कामनाओं की पूर्ति के लिए महिलाओं का यह व्रत 17 दिन तक चलेगा।
श्रद्धालुओं की धारणा है कि मां अन्नपूर्णा की नगरी काशी में कभी कोई भूखा नहीं सोता। अन्नपूर्णा माता की उपासना से सारे कष्ट-दुख नष्ट हो जाते हैं। मां अपने भक्तों को सभी विपत्तियों से छुटकारा दिलाती हैं। इनके प्रसन्न हो जाने पर अनेक जन्मों से चली आ रही दरिद्रता का भी निवारण हो जाता है।
महंत रामेश्वरपुरी महाराज शनिवार की सुबह व्रत का संकल्प लेने वाली महिलाओं को 17 गांठ के धागे का वितरण करेंगे। धागा प्राप्त करने वाली महिलाएं ही अन्नपूर्णा का व्रत रखेंगी। यह व्रत 17 दिन या 17 महीना या फिर 17 वर्ष तक के लिए किया जाता है। महंत ने बताया कि अन्नपूर्णा देवी के निमित्त व्रत रखते हुए उनकी उपासना करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। भविष्यपुराण में मार्गशीर्ष मास के अन्नपूर्णा व्रत की कथा का विस्तार से वर्णन मिलता है।
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श्रद्धालुओं की धारणा है कि मां अन्नपूर्णा की नगरी काशी में कभी कोई भूखा नहीं सोता। अन्नपूर्णा माता की उपासना से सारे कष्ट-दुख नष्ट हो जाते हैं। मां अपने भक्तों को सभी विपत्तियों से छुटकारा दिलाती हैं। इनके प्रसन्न हो जाने पर अनेक जन्मों से चली आ रही दरिद्रता का भी निवारण हो जाता है।
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महंत रामेश्वरपुरी महाराज शनिवार की सुबह व्रत का संकल्प लेने वाली महिलाओं को 17 गांठ के धागे का वितरण करेंगे। धागा प्राप्त करने वाली महिलाएं ही अन्नपूर्णा का व्रत रखेंगी। यह व्रत 17 दिन या 17 महीना या फिर 17 वर्ष तक के लिए किया जाता है। महंत ने बताया कि अन्नपूर्णा देवी के निमित्त व्रत रखते हुए उनकी उपासना करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। भविष्यपुराण में मार्गशीर्ष मास के अन्नपूर्णा व्रत की कथा का विस्तार से वर्णन मिलता है।
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