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सप्तऋषि आरती विवादः केंद्रीय ब्राह्मण महासभा ने महंत परिवार को वापस आरती का अधिकार देने की मांग की
Fri, 15 May 2020 10:56 PM IST
विचित्र सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: विचित्र सिंह
Updated Fri, 15 May 2020 10:56 PM IST
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काशी विश्वनाथ की सप्तऋषी आरती ।
- फोटो : अमर उजाला।
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सप्तऋषि आरती के विवाद ने तूल पकड़ना शुरू कर दिया है। काशी विद्वत परिषद और काशी के विद्वानों का कहना है मंदिर की परंपराओं से खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र और तीन-तीन मंत्रियों का क्षेत्र होने के बावजूद मंदिर की परंपराओं के प्रति लापरवाही उचित नहीं है।
इसके साथ ही आम जनता में भी महंत परिवार को सप्तऋषि आरती की परंपरा के अधिकार को वापस दिलाने की आवाज तेज होने लगी है। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ल का कहना है कि धर्मार्थ मंत्री को संपूर्ण प्रकरण को संज्ञान में लेकर विवाद का पटाक्षेप करना चाहिए।
काशी विश्व की सांस्कृतिक राजधानी है और काशी विश्वनाथ का मंदिर द्वादश ज्योर्तिलिंगों में प्रतिष्ठित शिवलिंग है। यहां के अर्चन, पूजन और भोग राग की शास्त्रसम्मत एक व्यवस्था है। उस व्यवस्था का संरक्षण सरकार का दायित्व बनता है।
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यहां की परंपरा और काशी के मंदिरों के जो संस्कार हैं, जो संस्कृति है, उसको ध्यान में रखकर प्रशासन को भी अपने रवैये में बदलाव करना चाहिए, जिससे विश्वनाथ मंदिर की मर्यादा बनी रहे। यहां की छोटी सी भी घटना को पूरे विश्व में देखा जाता है।
महंत परिवार को भी यहां की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। कोई ऐसा प्रलाप ना हो, जिससे कि मंदिर की प्रतिष्ठा पर कोई आंच आए। केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्र का कहना है कि बाबा विश्वनाथ सभी को सद्बुद्धि दें। इसका राजनीतिकरण ना करें। सत्ता में जो बैठे हैं, वह गुण दोषों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लें।
पूरे मामले को जातिगत रूप दिया जा रहा है, जो गलत है। यह सनातन परंपरा पर प्रहार है। इसके तमाम प्रमाण है कि 1983 से सप्तऋषि आरती की परंपरा महंत परिवार द्वारा निभाई जा रही है और उसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। यह राजतंत्र थोड़े है, जो माफी मांगने की बात की जा रही है।
लोकतंत्र है और संविधान के हिसाब से निर्णय होना चाहिए। जिद पर अड़ जाना ठीक नहीं है। निष्पक्ष विवेचना होनी चाहिए। आवेश में जो भी निर्णय लिया जाता है, वह हितकारी नहीं होता है। जनभावना का हमेशा ध्यान रखा जाना चाहिए। मंदिर में पूर्ववत व्यवस्था लागू करके हाईकोर्ट के जज से पूरे मामले की जांच कराई जानी चाहिए।
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इसके साथ ही आम जनता में भी महंत परिवार को सप्तऋषि आरती की परंपरा के अधिकार को वापस दिलाने की आवाज तेज होने लगी है। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ल का कहना है कि धर्मार्थ मंत्री को संपूर्ण प्रकरण को संज्ञान में लेकर विवाद का पटाक्षेप करना चाहिए।
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काशी विश्व की सांस्कृतिक राजधानी है और काशी विश्वनाथ का मंदिर द्वादश ज्योर्तिलिंगों में प्रतिष्ठित शिवलिंग है। यहां के अर्चन, पूजन और भोग राग की शास्त्रसम्मत एक व्यवस्था है। उस व्यवस्था का संरक्षण सरकार का दायित्व बनता है।
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यहां की परंपरा और काशी के मंदिरों के जो संस्कार हैं, जो संस्कृति है, उसको ध्यान में रखकर प्रशासन को भी अपने रवैये में बदलाव करना चाहिए, जिससे विश्वनाथ मंदिर की मर्यादा बनी रहे। यहां की छोटी सी भी घटना को पूरे विश्व में देखा जाता है।
महंत परिवार को भी यहां की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। कोई ऐसा प्रलाप ना हो, जिससे कि मंदिर की प्रतिष्ठा पर कोई आंच आए। केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्र का कहना है कि बाबा विश्वनाथ सभी को सद्बुद्धि दें। इसका राजनीतिकरण ना करें। सत्ता में जो बैठे हैं, वह गुण दोषों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लें।
पूरे मामले को जातिगत रूप दिया जा रहा है, जो गलत है। यह सनातन परंपरा पर प्रहार है। इसके तमाम प्रमाण है कि 1983 से सप्तऋषि आरती की परंपरा महंत परिवार द्वारा निभाई जा रही है और उसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। यह राजतंत्र थोड़े है, जो माफी मांगने की बात की जा रही है।
लोकतंत्र है और संविधान के हिसाब से निर्णय होना चाहिए। जिद पर अड़ जाना ठीक नहीं है। निष्पक्ष विवेचना होनी चाहिए। आवेश में जो भी निर्णय लिया जाता है, वह हितकारी नहीं होता है। जनभावना का हमेशा ध्यान रखा जाना चाहिए। मंदिर में पूर्ववत व्यवस्था लागू करके हाईकोर्ट के जज से पूरे मामले की जांच कराई जानी चाहिए।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के सप्तऋषि आरती विवाद का मामला अब प्रधानमंत्री तक पहुंच गया है। महंत परिवार ने इस मामले में काशी के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। महंत परिवार का कहना है कि उन्हें तो पता ही नहीं है कि आखिर किस गलती के कारण तीन सौ सालों की परंपरा को अचानक रोक दिया गया। महंत परिवार के मुखिया डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर न्याय के लिए गुहार लगाई है।
संघ भी ले रहा है पल-पल की खबर
वाराणसी। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र और भाजपा का गढ़ होने के कारण आरएएसएस भी लगातार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। प्रथम दिन से लेकर रोजाना मंदिर की गतिविधियों की रिपोर्ट भेजी जा रही है।
संघ भी ले रहा है पल-पल की खबर
वाराणसी। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र और भाजपा का गढ़ होने के कारण आरएएसएस भी लगातार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। प्रथम दिन से लेकर रोजाना मंदिर की गतिविधियों की रिपोर्ट भेजी जा रही है।
बाबा की सप्तऋषि आरती में फिर लौटे छह स्टेट के अर्चक
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सप्तऋषि आरती से रोके गए छह स्टेट के आठ अर्चकों की वापसी शुक्रवार को हो गई। परंपरा के अनुसार इन अर्चकों ने बाबा की सप्तऋषि आरती की परंपरा का निर्वहन किया। एडीएम सिटी और एसपी सुरक्षा ज्ञानवापी की जांच रिपोर्ट में स्टेट के पुजारियों को क्लीन चिट दी गई है।
वहीं महंत परिवार के सदस्यों को दोषी पाया गया है और उनको अभी तक अनुमति नहीं दी गई है। शुक्रवार की शाम को सप्ताह भर के बाद पारंपरिक अर्चकों द्वारा बाबा विश्वनाथ की आरती को संपन्न कराया गया। इसमें छह स्टेट के पुजारियों को ही प्रवेश दिया गया। स्टेट के पुजारियों ने पिछले सप्ताह हुए सप्तऋषि विवाद के बाद मंदिर प्रशासन से लिखित रूप से माफी भी मांगी थी।
इसमें राजीव प्रकाश मिश्र, रामानंद दुबे, सुनील दुबे, अभिषेक कुमार चौबे, संतोष कुमार दुबे, लक्ष्मीकांत भट्टï, अनिल चौबे, शिव नारायण मिश्र को मंदिर के पुजारियों के पर्यवेक्षण में सप्तऋषि आरती में हिस्सा लेने की अनुमति प्रदान की गई है।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह की ओर से जारी आदेश के अनुसार स्टेट के पुजारियों ने माफी मांगी थी और कहा था कि इसकेअतिरिक्त उनके परिवार केभरण-पोषण का कोई माध्यम नहीं है। उन्होंने सप्तऋषि आरती में शामिल कराने का अनुरोध किया था। जांच रिपोर्ट और माफीनामे को ध्यान में रखते हुए छह स्टेट के आठ अर्चकों को सप्तऋषि आरती में शामिल करने का आदेश दिया गया है।
वहीं महंत परिवार के सदस्यों को दोषी पाया गया है और उनको अभी तक अनुमति नहीं दी गई है। शुक्रवार की शाम को सप्ताह भर के बाद पारंपरिक अर्चकों द्वारा बाबा विश्वनाथ की आरती को संपन्न कराया गया। इसमें छह स्टेट के पुजारियों को ही प्रवेश दिया गया। स्टेट के पुजारियों ने पिछले सप्ताह हुए सप्तऋषि विवाद के बाद मंदिर प्रशासन से लिखित रूप से माफी भी मांगी थी।
इसमें राजीव प्रकाश मिश्र, रामानंद दुबे, सुनील दुबे, अभिषेक कुमार चौबे, संतोष कुमार दुबे, लक्ष्मीकांत भट्टï, अनिल चौबे, शिव नारायण मिश्र को मंदिर के पुजारियों के पर्यवेक्षण में सप्तऋषि आरती में हिस्सा लेने की अनुमति प्रदान की गई है।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह की ओर से जारी आदेश के अनुसार स्टेट के पुजारियों ने माफी मांगी थी और कहा था कि इसकेअतिरिक्त उनके परिवार केभरण-पोषण का कोई माध्यम नहीं है। उन्होंने सप्तऋषि आरती में शामिल कराने का अनुरोध किया था। जांच रिपोर्ट और माफीनामे को ध्यान में रखते हुए छह स्टेट के आठ अर्चकों को सप्तऋषि आरती में शामिल करने का आदेश दिया गया है।