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काशी विद्यापीठ की नैक में ग्रेडिंग गिरी, साख पर उठा सवाल, विश्वविद्यालय को होगा भारी नुकसान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 09 Nov 2018 06:57 PM IST
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ
- फोटो : अमर उजाला
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी को नैक मूल्यांकन में सी ग्रेड मिलने से विश्वविद्यालय प्रशासन मायूस है। उम्मीद से उलट ग्रेडिंग गिरने की वजह से विश्वविद्यालय की साख पर तो सवाल उठा ही है, अब विश्वविद्यालय को सुविधाएं मिलने में भी दिक्कत होगी।
ग्रेडिंग गिरने की वजह से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से बजट मिलने में समस्या होगी। यूजीसी अब सुविधाओं में भी कटौती करेगा और इसका सीधा असर विश्वविद्यालय की आधारभूत संरचना के विकास पर पड़ेगा।
पिछले साल यूजीसी ने 10 करोड़ दिए थे। आगामी शैक्षणिक सत्र में यूजीसी इसे कम कर सकती है। विद्यापीठ से पूर्वांचल के वाराणसी समेत चंदौली, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र और बलिया के कॉलेज संबद्ध हैं।
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ग्रेडिंग गिरने की वजह से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से बजट मिलने में समस्या होगी। यूजीसी अब सुविधाओं में भी कटौती करेगा और इसका सीधा असर विश्वविद्यालय की आधारभूत संरचना के विकास पर पड़ेगा।
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पिछले साल यूजीसी ने 10 करोड़ दिए थे। आगामी शैक्षणिक सत्र में यूजीसी इसे कम कर सकती है। विद्यापीठ से पूर्वांचल के वाराणसी समेत चंदौली, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र और बलिया के कॉलेज संबद्ध हैं।
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NAAC
विश्वविद्यालय की ग्रेडिंग गिरने का असर संबद्ध जिलों के महाविद्यालयों की ग्रेडिंग पर भी पड़ सकता है। काशी विद्यापीठ में 24 से 26 सितंबर के बीच नैक मूल्यांकन के लिए पियर टीम ने दौरा किया था।
पिछली बार नैक मूल्यांकन में विश्वविद्यालय को ‘बी प्लस’ ग्रेड मिला था। इस बार ए ग्रेड मिलने की उम्मीद थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके लिए कोशिश भी की लेकिन बताया जा रहा है कि नैक मूल्यांकन की प्रक्रिया में हुए बदलाव के चलते विश्वविद्यालय की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्या ने बताया कि नैक की ग्रेडिंग इस बार कम हुई है। इस बारे में आईक्यूएसी संग बैठक की जाएगी। विश्वविद्यालय स्तर पर कहां कमी रह गई, ग्रेडिंग पर आपत्ति जताई जाए या नहीं, इस पर भी चर्चा होगी।
पिछली बार नैक मूल्यांकन में विश्वविद्यालय को ‘बी प्लस’ ग्रेड मिला था। इस बार ए ग्रेड मिलने की उम्मीद थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके लिए कोशिश भी की लेकिन बताया जा रहा है कि नैक मूल्यांकन की प्रक्रिया में हुए बदलाव के चलते विश्वविद्यालय की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्या ने बताया कि नैक की ग्रेडिंग इस बार कम हुई है। इस बारे में आईक्यूएसी संग बैठक की जाएगी। विश्वविद्यालय स्तर पर कहां कमी रह गई, ग्रेडिंग पर आपत्ति जताई जाए या नहीं, इस पर भी चर्चा होगी।