काशी विद्यापीठ दीक्षांत समारोह: अगले साल से नहीं देनी होगी डिग्री की फीस, सॉफ्ट कॉपी ही डिजीलॉकर पर होगी अपलोड
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 48वें दीक्षांत समारोह में 25 सेकंड में 63060 डिग्रियां डिजीलॉकर अपलोड हुईं। राज्यपाल ने क्लिक किया। राज्यपाल ने कहा कि अगले साल से डिग्री प्राप्त करने की फीस नहीं देनी होगी।
विस्तार
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 48वें दीक्षांत समारोह में 25 सेकंड में 63060 डिग्रियां अपलोड कर दी गईं। राज्यपाल और विद्यापीठ की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने एक क्लिक कर इसे डिजीलॉकर पर अपलोड किया। अपने दीक्षांत भाषण में राज्यपाल ने कहा कि अगले साल से डिग्री प्राप्त करने की फीस नहीं देनी होगी। ये काम सीधे डिजीलॉकर से होगा। इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा।
उन्होंने बताया कि 2022-23 में 51 हजार डिग्रियां अपलोड हुईं, जिसमें से सिर्फ 20 हजार डाउनलोड हुईं। 2023-24 में 60 हजार अपलोड और 38 हजार डाउनलोड, 2024-25 में 71 हजार अपलोड और 50 हजार डाउनलोड हुईं। राज्यपाल ने कहा कि अब कोई भी डिग्री, मार्कशीट और अंक तालिका की हार्ड कॉपी नहीं लेनी है। पेपरलेस काम करना पारदर्शिता को बढ़ाता है।
संबद्ध कॉलेजों के बारे में कहा कि 2023 में विश्वविद्यालय ने 68 अवॉर्ड दिए थे इसमें कोई संबद्ध, निजी और राजकीय कॉलेज नहीं था। 2024 में भी यही स्थिति बनी। 2025 में विश्वविद्यालय को 47, प्राइवेट कॉलेज 42 और सरकारी और एडेड कॉलेजों को 10 अवॉर्ड मिले हैं। ये आपकी उपलब्धि है। अब विश्वविद्यालय के इतर संबद्ध, निजी और एडेड कॉलेजों की गुणवत्ता जांची जा रही है।
मातृभाषा बढ़ाती है आत्मविश्वास
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने नसीहत देते हुए कहा कि जब विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में पढ़ता है तब उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। एनईपी में मातृभाषा पर जोर दिया गया है लेकिन अब भी लोग अंग्रेजी नहीं छोड़ रहे। माई भारत एप पर अब तक दो करोड़ से ज्यादा युवा इस अभियान से जुड़ चुके हैं। समाज के हर वर्ग से एक लाख युवा नेताओं का निर्माण किया जाएगा।
पीएम के कैच द रेन को बढ़ावा दें
राज्यपाल ने कहा कि काशी विद्यापीठ देश की नई शिक्षा नीति का अनुसरण करते हुए आधुनिक शिक्षण पद्धति और डिजिटल आधुनिक तकनीक को जोड़ रहा है। अपील की कि प्रधानमंत्री के वर्षा जल संरक्षण अभियान कैच द रेन को बढ़ावा दें। जल संरक्षण करें, वृक्ष लगाएं। यह प्रयास जन आंदोलन बनेगा। भारत में ऋषि मुनियों के अमूल्य पांडुलिपि के रूप में ज्ञान, विज्ञान अनुसंधान के धरोहर हैं, जिसे डिजिटल किया जा रहा है।