नए साल में 100 साल का हुआ काशी विद्यापीठ, वर्ष 1921 में राष्ट्रपिता ने की थी स्थापना
देश की स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाला महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ नया साल 2020 शुरू होते ही 100 साल का हो गया। वर्ष 1921 में ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।
ऐसे में नए साल की शुरूआत से ही पूरे साल भर विश्वविद्यालय में अलग-अलग कार्यक्रम की रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है। कार्यक्रमों के माध्यम से 100 साल के सफर के बारे में बताया जाएगा। विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से यहां कई महापुरुष भी आए।
वर्ष 1934 में 26 जुलाई से 02 अगस्त तक काशी में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यकाकरिणी समिति और केंद्रीय हरिजन सेवक संघ के अधिवेशन के दौरान महात्मा गांधी ने यहां विश्राम भी किया था। विश्वविद्यालय के मानविकी संकाय में आज भी वो कमरा है, जहां बापू अधिवेशन के दौरान रूके थे। अब 2020 की शुरूआत होते ही विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के 100वें साल में प्रवेश कर गया।
ऐसे में पूरे साल भर अलग-अलग कार्यक्रम मनाए जाएंगे। वर्ष 2021 में बड़े पैमाने पर कार्यक्रम मनाया जाएगा। शताब्दी वर्ष का पहला कार्यक्रम चार जनवरी को गंगापुर परिसर में रिसर्च मेथडोॉलॉजी पर वर्कशॉप होगा, इसमें डिप्टी सीएम केशव मौर्या बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। इसके साथ ही आल इंडिया कबड्डी प्रतियोगिता, महिला सशक्तिकरण पर आधारित कार्यक्रम भी कराया जाएगा।
विद्यापीठ को ऐतिहासिक महत्व का मिल सकता है दर्जा
काशी विद्यापीठ को ऐतिहासिक महत्व वाली संस्था का दर्जा मिल सकता है। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यूजीसी को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इस पर फाइल आगे बढ़ गई है। विश्वविद्यालय ने अपने प्रस्ताव में संस्थान की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका के साथ ही कई प्रमुख घटनाओं का जिक्र किया है। यूजीसी की स्वीकृति मिलने के बाद विशेष पैकेज भी मिलेगा। साथ ही विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिलाने का प्रस्ताव भी बन रहा है।
नया साल विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि वाला होगा। हम 100वें साल में प्रवेश कर गए हैं। विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से स्थापना का महत्व बताया जाएगा। साथ ही जो भी चुनौतियां हैं, उसे भी दूर कर लिया जाएगा।
प्रो. टीएन सिंह, कुलपति