राधा रानी की भक्ति में डूबी काशी, काटा गया दस फ्लेवर का केक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिव की नगरी काशी में बुधवार को राधे-राधे की धूम रही। राधा अष्टमी पर श्रीकृष्ण प्रिया का जन्मोत्सव धूमधाम से मना। कोरोना संक्रमण के कारण आयोजन तो सीमित हुए, लेकिन उल्लास कम नहीं हुआ। वहीं, इस्कॉन मंदिर के दसवें स्थापना दिवस पर राधा रानी का दस प्रकार के आभूषणों से शृंगार हुआ और दस फ्लेवर का केक भी काटा गया।
बुधवार को इस्कॉन मंदिर में दस नए आभूषण उपहार श्रीश्री राधा गोपाल जी को अर्पित किए गए और नए वस्त्र पहनाए गए। दस अलग-अलग सुंदर फूलों से सजावट की गई। दस प्रकार के फलों एवं पंचामृत से अभिषेक किया गया। 125 प्रकार के खास भोग राजभोग में लगाए गए। 1200 गायों का चारा और 2500 किलो अनाज दान दिया गया।
हरे-रामा, हरे कृष्णा की धुन पर थिरके भक्त
हरे कृष्णा हरे रामा संकीर्तन सोसायटी की ओर से बुधवार को माहेश्वरी भवन में धूमधाम से राधा अष्टमी मनाई गई। कोरोना के कारण आयोजन का रूप संक्षिप्त कर दिया गया। सोसायटी के दीनदयाल प्रभु जी के आवास गुरुबाग पर राधा रानी जी का प्राकट्य दिवस मनाया गया। कोरोना प्रोटोकाल का ध्यान रखते हुए हरे रामा हरे कृष्णा की धुन पर महिलाओं के साथ बच्चों और पुरुषों ने भी नृत्य किया।
श्रीश्री राधा कृष्ण के तैल चित्रों के साथ भगवान के विग्रहों का श्रृंगार किया गया। तुलसी आरती, गौर आरती, नरसिंह आरती के साथ राधा रानी जी की प्रशंसा में भजनों का गायन हुआ। राधा रानी को प्रिय भोज्य सामग्री के साथ छप्पन भोग अर्पित किया गया।
राघवेंद्र प्रभु ने बताया कि जिस प्रकार भगवान कृष्ण पूर्ण हैं, उसी तरह श्री राधा रानी जी भी पूर्ण हैं। राधा रानी भगवान श्री कृष्ण की अंतर धारा हैं। वैष्णव आचार्य मान्यता रखते हैं कि अगर परम पुरुष ईश्वर पुरुष हैं तो वह भगवान श्री कृष्णा हैं। यदि परम पुरुष स्त्री हैं तो वह श्री राधा रानी हैं।