काशी में पर्यटन का नया ठिकाना होगा खिड़किया घाट: देव दीपावली से पहले पूरा होगा सौंदर्यीकरण का काम, नौकायन का बनेगा केंद्र
वाराणसी में अस्सी से दशाश्वमेध घाट तक बढ़े पर्यटकों के दबाव को कम करने के लिए खिड़किया घाट के रूप में बेहतर विकल्प तैयार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में खिड़किया घाट गंगा में सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त जल विहार का साक्षी बनेगा।
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दुनियाभर से बनारस को निहारने के लिए आने वाले पर्यटकों को जल्द ही खिड़किया घाट का नया ठिकाना मिलने वाला है। देव दीपावली से पहले खिड़किया घाट पर पुनर्विकास परियोजना के पहले चरण का काम पूरा हो जाएगा। गंगा में नौकायन के लिए खिड़किया घाट को भी केंद्र बनाया जाएगा और इस घाट के संवरते ही गंगा में रूट प्लान लागू कर नाव और क्रूज का संचालन किया जाएगा।
राजघाट के ठीक बगल स्थित खिड़किया घाट आने वाले दिनों में गंगा में सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त जल विहार का साक्षी बनेगा। यहां तैयार प्रदेश के पहले फ्लोटिंग सीएनजी पंप के जरिए लहरों पर फर्राटा भरने वाली नावें, क्रूज और रोरो का संचालन होगा।
29 करोड़ रुपये की लागत से 600 मीटर पक्काघाट का निर्माण
अस्सी से दशाश्वमेध घाट तक बढ़े पर्यटकों के दबाव को कम करने के लिए खिड़किया घाट के रूप में बेहतर विकल्प तैयार किया जा रहा है। इस घाट को सड़क और जलमार्ग को जोड़ने वाले केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें 29 करोड़ रुपये की लागत से 600 मीटर पक्काघाट का निर्माण, सीएनजी नावों के लिए फिलिंग स्टेशन, एंफीथिएटर, चिल्ड्रेन पार्क, जीटी रोड से लिंक रोड बन रही है।
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घाट पर मिलेंगी ये सुविधाएं
इसके साथ ही पर्यटन सुविधा केंद्र, टिकट बूथ, कैफेटेरिया, पब्लिक प्रोमिनार्ड वॉल आर्ट व म्यूरल, सेल्फी पॉइंट, योग व मेडिटेशन केंद्र का भी निर्माण हो रहा है। आईओएफ (इंडियन ऑयल फाउंडेशन) ने सीएसआर के तहत करीब आधा दर्जन कार्य शुरू कराए हैं।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि घाट को पक्का करने के साथ पर्यटक सुविधाओं को नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इसी दौरान नावों को सीएनजी में तब्दील कराया जा रहा है। देव दीपावली से पहले खिड़किया घाट प्रमुख केंद्र के रूप में सामने होगा।
डीजल और पेट्रोल से चलने वाली नाव पर रोक
गंगा में डीजल और पेट्रोल से संचालित होने वाली नाव पर रोक लगाने से पहले नगर निगम से पंजीकृत बोट को सीएनजी आधारित किया जा रहा है। गंगा घाट पर बने पहले सीएनजी पंप से ही उन्हें ईंधन की आपूर्ति की जाएगी। गंगा में करीब दो हजार नावों का संचालन होता है। इसमें 918 नावें नगर निगम में पंजीकृत हैं। इसमें 166 नावों को इंजन लगाकर सीएनजी आधारित किया गया है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत पहले चरण में 1200 नावों को पंजीकृत कर नवंबर तक सीएनजी लगाने का लक्ष्य रखा है।
मार्च में पूरा होगा दूसरे चरण काम
गंगा में डिवाइडर से बनाई जाएगी लेन
गंगा में बढ़ रहे बड़े और छोटे नाव, बोट और क्रूज के सुरक्षित संचालन के लिए डिवाइडर बनाए जाने की तैयारी है। इसमें अस्सी से खिड़किया घाट के बीच बनने वाली लेन में आने और जाने के मार्ग अलग-अलग होंगे। खिड़किया घाट पर ही जलपुलिस की एक चौकी बनाई जाएगी और यहां से गंगा में ट्रैफिक की निगरानी भी कराई जाएगी।