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2047 की काशी : विकसित भारत में भूमिका पर विशेषज्ञों ने किया मंथन, नीति-निर्माताओं को दिया सुझाव
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काशी जेसीज़ चैरिटेबल ट्रस्ट ने 2047 की काशी : विकसित भारत के निर्माण में काशी की भूमिका विषय पर अपनी पहली राउंड टेबल मीट का आयोजन किया। सिगरा स्थित एक होटल में हुई बैठक में विशेषज्ञों के सुझावों को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाया गया। इसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने भाग लिया। बैठक में आर्किटेक्ट श्याम लाल सिंह, पत्रकार विश्वनाथ गोकर्ण, उद्योगपति राजीव जैपुरिया और सुबह-ए-बनारस के संस्थापक रत्नेश वर्मा शामिल हुए।
ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी अनिल के. जाजोदिया ने कहा कि काशी भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान है। उन्होंने विकसित भारत के लिए काशी की विशिष्ट पहचान बनाए रखने पर जोर दिया। समिति अध्यक्ष पी. के. अग्रवाल ने काशी की प्रगति और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जनसंख्या वृद्धि, शहरी प्रबंधन और रोजगार सृजन जैसी समस्याओं पर चिंतन की आवश्यकता बताई। रत्नेश वर्मा ने कहा कि काशी की पहचान उसकी विरासत और सांस्कृतिक जीवनशैली में है। उन्होंने विकास परियोजनाओं में सांस्कृतिक प्रभाव मूल्यांकन को अनिवार्य बताया। विश्वनाथ गोकर्ण ने कहा कि काशी का विकास केवल पर्यटन केंद्रित नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्थानीय नागरिकों की आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। विरासत और नागरिक मिलकर ही काशी की वास्तविक पहचान बनाते हैं। राजीव जैपुरिया ने शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास को विकसित काशी का आधार बताया। उन्होंने पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
2047 के लिए तैयार हो मास्टर विजन डॉक्यूमेंट
श्याम लाल सिंह ने वर्ष 2047 के लिए काशी का दीर्घकालिक मास्टर विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने पर बल दिया। बैठक के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की। उन्होंने शहर की विरासत और संस्कृति से जुड़े प्रकल्पों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। पारंपरिक उद्योगों के पुनर्जीवन और स्थानीय नागरिकों की सुविधाओं पर ध्यान देने की मांग की गई। ट्रस्ट सचिव पंकज अग्रवाल ने बताया कि प्राप्त सुझावों को संबंधित विभागों को भेजा जाएगा।
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ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी अनिल के. जाजोदिया ने कहा कि काशी भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान है। उन्होंने विकसित भारत के लिए काशी की विशिष्ट पहचान बनाए रखने पर जोर दिया। समिति अध्यक्ष पी. के. अग्रवाल ने काशी की प्रगति और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जनसंख्या वृद्धि, शहरी प्रबंधन और रोजगार सृजन जैसी समस्याओं पर चिंतन की आवश्यकता बताई। रत्नेश वर्मा ने कहा कि काशी की पहचान उसकी विरासत और सांस्कृतिक जीवनशैली में है। उन्होंने विकास परियोजनाओं में सांस्कृतिक प्रभाव मूल्यांकन को अनिवार्य बताया। विश्वनाथ गोकर्ण ने कहा कि काशी का विकास केवल पर्यटन केंद्रित नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्थानीय नागरिकों की आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। विरासत और नागरिक मिलकर ही काशी की वास्तविक पहचान बनाते हैं। राजीव जैपुरिया ने शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास को विकसित काशी का आधार बताया। उन्होंने पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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2047 के लिए तैयार हो मास्टर विजन डॉक्यूमेंट
श्याम लाल सिंह ने वर्ष 2047 के लिए काशी का दीर्घकालिक मास्टर विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने पर बल दिया। बैठक के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की। उन्होंने शहर की विरासत और संस्कृति से जुड़े प्रकल्पों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। पारंपरिक उद्योगों के पुनर्जीवन और स्थानीय नागरिकों की सुविधाओं पर ध्यान देने की मांग की गई। ट्रस्ट सचिव पंकज अग्रवाल ने बताया कि प्राप्त सुझावों को संबंधित विभागों को भेजा जाएगा।
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