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करपात्र दीपावली : 43,435 दीपों की रोशनी से नहाई धर्मसम्राट करपात्री जी की बगिया

Thu, 13 Aug 2026 11:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 11:54 PM IST
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Karpatra Diwali: The garden of Dharmasamrat Karpatri Ji bathed in the light of 43,435 lamps.
वाराणसी। करपात्र प्राकट्योत्सव की पूर्व संध्या पर बृहस्पतिवार को धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज की तपस्थली दुर्गाकुंड स्थित श्रीधर्मसंघ शिक्षा मंडल में करपात्र दीपावली मनाई गई। धर्मसंघ दीपों की रोशनी से नहा उठा। करीब 43,435 दीपों से धर्मसंघ का कोना-कोना रोशनी से जगमगा उठा। 119वें प्राकट्योत्सव पर चल रहे सप्ताहव्यापी करपात्र प्राकट्योत्सव के तीसरे दिन गोधूलि वेला में धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज एवं पं. जगजीतन पांडेय ने मणि मंदिर के मुख्य सभागार में स्वस्तिवाचन के बीच प्रथम दीप प्रज्ज्वलित किया।
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इसके बाद वैदिक आचार्यों एवं बटुकों ने एक साथ पूरे धर्मसंघ प्रांगण में दीप जलाए। मंदिर के बाहर बाग में पांच हजार दीपों की दीपमाला भी प्रज्ज्वलित की गई। मंदिर के मुख्य द्वार, करपात्री प्रतिमा, करपात्री सभागार, महाराज निवास, अन्नपूर्णा भोजन भंडार, गोशाला, बाग, अतिथिगृह तथा कार्यालय में एक साथ दीप प्रज्ज्वलित किए गए। मुख्य द्वार से लेकर पूरे प्रांगण में विद्युत झालरों एवं दीप मालाओं की भी आकर्षक सजावट की गई थी। दीपकों एवं विभिन्न प्रकार के पुष्पों से सनातन धर्म के प्रतीक चिह्न बनाए गए थे। इसमें स्वस्तिक, ओंकार, त्रिशूल, कमल पुष्प आदि प्रतीक आकर्षक लग रहे थे।
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एक साथ पूरे परिसर में दीप प्रज्ज्वलित होते ही धर्मसंघ में विहंगम दृश्य नजर आया। इसके साथ ही फूलों की रंगोली भी बनाई गई। मुख्य द्वार पर ‘सुस्वागतम्’ की रंगोली, मणि मंदिर के चारों स्तंभों पर कमल पुष्प की रंगोली, हॉल के मध्य में विशाल कलश की रंगोली तथा चारों ओर सनातनी प्रतीक चिह्न आकर्षक लग रहे थे। धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज का कृतित्व एवं व्यक्तित्व सनातन धर्म के दैदीप्यमान सूर्य के समान है। उनके दिखाए मार्ग चिरकाल तक समाज को प्रकाशित करते रहेंगे। करपात्र प्राकट्योत्सव के चौथे दिन शुक्रवार को मुख्य कार्यक्रम करपात्र रत्न सम्मान समारोह शाम चार बजे से होगा।
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