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उत्तर भारत में कर्नाटक शैली के संगीत की जड़ों को मजबूत कर रहे बीएचयू के प्रोफेसर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 29 May 2018 05:41 PM IST
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प्रो. के शशि कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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दक्षिण भारत का प्राचीन कर्नाटक संगीत। ढाई हजार वर्ष पहले जन्मी ये शैली सबसे पुरानी और धनी मानी जाती है। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के प्रो. के शशि कुमार संगीत के इस शैली के उम्दा फनकार हैं।
दक्षिण में जन्मे, वहीं से शिक्षा दीक्षा ली और अब उत्तर भारत में इसकी जड़ मजबूत कर रहे हैं। करीब तीस से अधिक समय से प्रो. शशि बीएचयू से जुड़े हैं और संगीत की इस शैली को संगीत कलासाधकों में सिंचित करने का काम कर रहे हैं। विदेशों में कई वर्कशाप के जरिये भी संगीत की इस शैली को आगे बढ़ा रहे हैं।
अमर उजाला से बातचीत में प्रो. शशि कहते हैं शास्त्रीय संगीत दो धारा है, एक हिंदुस्तानी और दूसरा कर्नाटक संगीत। 13वीं शताब्दी तक दोनों एक ही थे लेकिन 17वीं शताब्दी में हिंदुस्तानी संगीत के रूप में ध्रुपद, ख्याल उत्तर भारत में बढ़ने लगा और कर्नाटक संगीत दक्षिण में।
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दोनों संगीत में फर्क बस स्वर के लगाव का है। बनारस में अकेले कर्नाटक संगीत को आगे लेकर चल रहे प्रो. शशि बताते हैं कि कर्नाटक संगीत को लेकर यहां लोगों में रुचि है। हर साल करीब 15-20 विद्यार्थी ये संगीत सीख रहे हैं और वो उत्तर भारत से ही जुड़े हैं। कई विदेशियों की भी इसमें रुचि है वो इसे सीख रहे हैं।
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दक्षिण में जन्मे, वहीं से शिक्षा दीक्षा ली और अब उत्तर भारत में इसकी जड़ मजबूत कर रहे हैं। करीब तीस से अधिक समय से प्रो. शशि बीएचयू से जुड़े हैं और संगीत की इस शैली को संगीत कलासाधकों में सिंचित करने का काम कर रहे हैं। विदेशों में कई वर्कशाप के जरिये भी संगीत की इस शैली को आगे बढ़ा रहे हैं।
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अमर उजाला से बातचीत में प्रो. शशि कहते हैं शास्त्रीय संगीत दो धारा है, एक हिंदुस्तानी और दूसरा कर्नाटक संगीत। 13वीं शताब्दी तक दोनों एक ही थे लेकिन 17वीं शताब्दी में हिंदुस्तानी संगीत के रूप में ध्रुपद, ख्याल उत्तर भारत में बढ़ने लगा और कर्नाटक संगीत दक्षिण में।
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दोनों संगीत में फर्क बस स्वर के लगाव का है। बनारस में अकेले कर्नाटक संगीत को आगे लेकर चल रहे प्रो. शशि बताते हैं कि कर्नाटक संगीत को लेकर यहां लोगों में रुचि है। हर साल करीब 15-20 विद्यार्थी ये संगीत सीख रहे हैं और वो उत्तर भारत से ही जुड़े हैं। कई विदेशियों की भी इसमें रुचि है वो इसे सीख रहे हैं।
लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से हुए सम्मानित
के शशि कुमार
- फोटो : File Photo
बीएचयू संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग के हेड प्रो. के शशि कुमार कर्नाटक संगीत शैली के गायक हैं। दूरदर्शन, रेडियो से शुरू हुआ उनका संगीत का सफर देश विदेश के कई म्यूजिक कंसर्ट तक परवान चढ़ा।
हाल ही में उन्हें इंटरनेशनल बिजनेस काउंसिल की ओर से संगीत के क्षेत्र में उनके इन्हीं उत्कृष्ट कार्यों के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया है।
इसके पहले 2015 में उन्हें भारत गौरव रत्न सम्मान भी मिल चुका है। 2017 में उन्होंने तिरुपति में लाइव प्रोग्राम दिया। उन्होंने कई मलयाली और तमिल फिल्मों में भी अपनी आवाज दी और बतौर संगीतकार उन्हें काम किया है।
हाल ही में उन्हें इंटरनेशनल बिजनेस काउंसिल की ओर से संगीत के क्षेत्र में उनके इन्हीं उत्कृष्ट कार्यों के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया है।
इसके पहले 2015 में उन्हें भारत गौरव रत्न सम्मान भी मिल चुका है। 2017 में उन्होंने तिरुपति में लाइव प्रोग्राम दिया। उन्होंने कई मलयाली और तमिल फिल्मों में भी अपनी आवाज दी और बतौर संगीतकार उन्हें काम किया है।